
सरायपाली। जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव में वर्ष 2023 के एक प्रकरण ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। लकवाग्रस्त प्रधानपाठक की लंबे समय से अनुपस्थिति, बाहरी व्यक्ति से अध्यापन, फर्जी हस्ताक्षर और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों की जांच के दौरान संबंधित शिक्षकगणों 02 वर्ष पूर्व दिए गए अपने बयानों से पलट गए हैं। बल्कि तात्कालीन एसडीएम आइएएस अधिकारी पर जबरन दबाव बनाने का आरोप मढ़ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 अगस्त 2023 को तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (रा) सरायपाली हेमंत रमेश नंदनवार (आइएएस) ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक धनीराम चौधरी अनुपस्थित पाए गए, जबकि उनकी जगह छिन्दपाली निवासी जितेन्द्र साहू पढ़ाते मिले। जांच में यह तथ्य सामने आया कि धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त हैं और लगभग एक वर्ष से विद्यालय नहीं आ रहे थे। इस दौरान प्रतिमाह 6500 रुपये देकर जितेन्द्र साहू से अध्यापन कराया जा रहा था।


मौके पर उपस्थित संकुल प्रभारी ठण्डाराम टिकूलिया, संकुल समन्वयक गिरधारी लाल पटेल, शिक्षक दिनेश पटेल, जितेन्द्र साहू, सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डी.एन. दीवान एवं जितेन्द्र रावल की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया, जिसे पढ़कर सभी ने हस्ताक्षर किए। पंचनामा में शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि प्रधानपाठक एक वर्ष से स्कूल नहीं आ रहे हैं और बाहरी व्यक्ति से पढ़ाई कराई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि सितम्बर 2022 से 11 अगस्त 2023 तक जितेन्द्र साहू ने पढ़ाया और निरीक्षण के अगले ही दिन वह गायब हो गया। हैरानी की बात यह है कि इसी अवधि में प्रधानपाठक धनीराम चौधरी के हस्ताक्षर उपस्थिति पंजी में दर्ज पाए गए, जबकि पंचनामा व बयान में उनके स्कूल न आने की पुष्टि है।
इस मामले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने 18 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री सचिवालय एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिवों सहित डीईओ महासमुन्द से की थी। इसके बाद 11 दिसम्बर को प्रभारी बीईओ बद्रीविशाल जोल्हे, एबीईओ लोकेश्वर सिंह कंवर, बीआरसीसी अनिल सिंह साव एवं प्राचार्य खिरोद पुरोहित की टीम ने लिमगांव मिडिल स्कूल पहुंचकर जांच की।
जांच के दौरान चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ठण्डाराम टिकूलिया, गिरधारी लाल पटेल एवं दिनेश पटेल अपने पूर्व में दिए गए पंचनामा व बयानों से पूरी तरह मुकर गए। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन एसडीएम सरायपाली ने दबाव डालकर उनसे पंचनामा व बयान बनवाया था। इससे पूर्व 26 जून को भी जांचकर्ता अधिकारी जोइधाराम डहरिया तात्कालीन बीईओ, विनोद कुमार शुक्ला तात्कालीन एबीइओ, लोकेश्वर सिंह कंवर एबीइओ एवं सत्य नारायण शर्मा तात्कालीन लेखापाल ने लिमगांव स्कूल पहुंच कर जांच किया था और बयान लिये थे। तब इन तीनों शिक्षकों ने हेमंत रमेश नंदनवार आइएएस अधिकारी पर दुर्व्यवहार करने और धमकी देने के आरोप लगाए थे।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि स्कूल के दाखिल-खारिज पंजी, अंकसूची और स्थानांतरण प्रमाणपत्रो सहित निरीक्षण पंजी में भी प्रधानपाठक धनीराम चौधरी के स्थान पर शिक्षक मनीष साहू एवं दिनेश पटेल द्वारा हस्ताक्षर कर सील लगाई जाती थी, जबकि उन्हें ऐसा करने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला था। शिक्षकों का कहना है कि प्रधानपाठक के हाथ कांपने के कारण वे हस्ताक्षर नहीं कर पाते थे, जिससे फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका और गहरा गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 2 अगस्त 2022 को संकुल प्रभारी एवं संकुल समन्वयक ने प्रधानपाठक के लकवाग्रस्त होने और बाहरी शिक्षक रखे जाने की सूचना लिखित रूप में बीईओ कार्यालय सरायपाली को दी थी, जिसकी पावती भी ली गई थी। बावजूद इसके तत्कालीन बीईओ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो संदेह को जन्म देती है।
फिलहाल मामला जांचाधीन है। जांच रिपोर्ट अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है। इससे शिक्षा विभाग व प्रशासनिक अधिकारियो की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।



