Post: छ.ग.के डीएफओ पंकज सिंह राजपूत इन दिनों सुर्खियों में। कर्मों का फल भोगना पड़ता है पंकज राजपूत।

छ.ग.के डीएफओ पंकज सिंह राजपूत इन दिनों सुर्खियों में। कर्मों का फल भोगना पड़ता है पंकज राजपूत।

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लोचन चौहान

प्रधान संपादक-छ.ग.सृजन

मोबाइल नं. 7441148 115

रायपुर:-24.01.2026:-छ.ग.में भारतीय वनसेवा के एक अफसर की चर्चा इन दिनों शोसल मिडिया में पूरे जोरों पर है ये चर्चित वनमंडलाधिकारी कोई और नहीं बल्कि सामान्य वनमंडल महासमुंद के पूर्व वन मंडलाधिकारी पंकज सिंह राजपूत का है जो वर्तमान में खैरागढ़ में पदस्थ हैं। सूत्र बताते हैं की पंकज राजपूत ऐसे अधिकारी हैं जो विभागीय भ्रष्टाचार में आगे है ही ये अपनी पदीय गरिमा का दुरुपयोग कर काफी अय्याशी बाजी करने में भी इन्हें महारत प्राप्त हैं। कुछ सूत्र बताते हैं की जिस समय पंकजसिंह राजपूत का सलेक्शन वनसेवा के पद में हुआ तत्पश्चात उनके विवाह के समय स्वयं को वे ऐसे पेश करते थे की वे एक निम्न वर्गीय एकदम भोले भाले सामान्य व्यक्ति गरीब परिवार से होने पर भी अपनी कड़ी मेहनत से वे वन सेवा के बड़े अफसर बनने के मुकाम तक पहुंचे होने का ढोंग किया करते‌ रहे। निश्चित ही किसी व्यक्ति की बड़ी उपलब्धियां उनकी कड़ी मेहनत व लगन से ही उन्हें प्राप्त होती है मगर पंकजसिंह राजपूत के मामले में ये बात भी खुब प्रशासनिक गलियारों में चर्चित रहा है की वे गरीब और सामान्य परिवार से नहीं बल्कि सम्पन्न और वैभव विलास की जिंदगी जीने वाले संभ्रांत परिवार से संबंध रखते हैं एवं स्वयं को बहुत ही बढ़ा चढ़ा कर महिमा मंडित कर वाह-वाही बटोरने के लिए भी जाने जाते हैं। पूर्व में महासमुंद वनमंडलाधिकारी रहे पंकज सिंह राजपूत अपनी शातिर और चतुर बुद्धि से अपने अधीनस्थ छोटे निचले कर्मचारियों को प्रताड़ित करते रहे और या कहे अपनी मीठी छूरी की मकड़जाल बुनकर ऐसे फंसाके चले गए की वे उनके कार्यकाल में हुए लाखों करोड़ों रुपए के घोटाले के चपेट में महासमुंद जिले के वन विभाग के कई अधिकारी कर्मचारी फंसे हुए हैं। जो उनके मीठी छुरी के प्रहार चाल से अभी तक उबर नहीं पा रहे हैं अगर महासमुंद जिले में उनके कार्यकाल के समय हुए विभिन्न विकास कार्यों का सत्यापन किया जाए तो करोड़ों रुपए की वसूली पंकज राजपूत के नाम पर निकलेगी। क्योंकि जिला स्तर पर हुए कोई भी विभागीय भ्रष्टाचार की अंतिम जवाबदारी उस जिले विभाग के मुखिया का होता है

कुछ सूत्र बताते हैं जशपुर पदस्थापना के दौरान तपकरा रेस्ट हाउस में उनके अय्याशी के चर्चे और कॉल गर्ल का दिवाना व बड़े ही शातिर तरीके से अपनी पापों के पर्दाफाश के डर से वे बार बार अपने ड्राइवर को उतार गाड़ी बदलकर बदल-बदल कर स्वयं गाड़ी ड्राइविंग कर अपनी पाप व काले करतूतों‌ पर पर्दा डालते रहे उसी बीच शासन ने उनका स्थानांतरण महासमुंद किया लेकिन उन्हें तो आदत सी लगी थी अय्याशी की वे कहां रुकने वाले थे लंबे समय तक महासमुंद में पदस्थ रहे और यहां भी विभागीय गलियारों व सूत्रों से छनकर आए खबरों में ये खुब चर्चित रहे की राज्य सेवा के एक पुलिस अधिकारी के साथ एक ही सरकारी गाड़ी में हमेशा घूमा करते थे उनके द्वारा खूब मंहगी शराब पीने का आदि होने की खबरें भी सुर्खियों में रहा। कभी-कभी तो वे इतने शराब पी लिया करते थे की उन्हें पकड़कर गाड़ी में बैठाकर उनके सरकारी बंगले तक पहुंचाना पड़ता था। लोग अपने परिवार पत्नी बच्चों की जिंदगी को खुशहाल रखने जीवन खपा देते हैं हर कष्ट सहन करते हैं लेकिन इन जीवन मूल्यों का पंकजसिंह राजपूत के जीवन में कोई अर्थ नहीं है सूत्र बताते हैं कि उनके द्वारा अपनी धर्मपत्नी को भी तलाक देने‌ न्यायालय में याचिका दायर किया गया है पत्नी तो पत्नी है पंकजसिंह राजपूत का स्वभाव तो इतने अमानवीय और गिरे हुए है कि वे अपने अबोध बालक का भी उन्होंने चिंता नहीं किया और अपनी पत्नी और बच्चे को भी त्याग दिया यह बहुत बड़ी सोचने वाली बात है कि जो पंकज राजपूत अपनी पत्नि और बच्चे को त्याग दिया किसी आम व्यक्ति या किसी के लिए सम्मान के पात्र कैसे हो सकते हैं ऐसे अधिकारी सभ्य समाज और स्वच्छ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है। सामान्य: यह धारणा होती है की लोग उच्च शिक्षित होकर अच्छे प्रशासनिक पदों में जाकर देश धर्म का सेवा कर समाज में मान सम्मान प्राप्त करने की बात करते हैं लेकिन इतने उच्च और प्रशिक्षित व इतने बड़े पद में होते हुए भी पंकजसिंह राजपूत की इतनी नीच और घटिया प्रवृत्ति कैसे बन गई। ये भारतीय समाज को सोंचने की जरूरत है

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