
लोचन चौहान
प्रधान संपादक,- छत्तीसगढ़ सृजन
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बारनवापारा।31.01.2026 –वन्यजीव अभ्यारण्य बारनवापारा के वनों में इन दिनों अवैध कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परिक्षेत्र कार्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित दोंद मुड़पार के वन क्षेत्र से लकड़ी तस्कर बहुमूल्य राष्ट्रीय प्रजाति की सागौन बीजा जैसे बहुमूल्य पेड़ों पर अपना हाथ साफ कर रहे हैं सूत्रों प्राप्त जानकारी के के अनुसार इस क्षेत्र से वन्य प्राणियों के अवैध शिकार भी हो रहा है जो वन्य प्राणी एवं वनस्पतियों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन वन्य प्राणी के लिए एक गंभीर सवाल पैदा कर रहा है अभ्यारण की एक दूसरा पहलू यह भी है अभ्यारण सीमाक्षेत्र में स्थित जांच चौकियों से होकर रात में गुजरने वाली दोपहिया चारपहिया वाहनों की कोई जांच नहीं की जाती है देवपुर जांच चौकि रात में पूरी तरह से खुली रहती है अभ्यारण से बाहर की ओर जाने वाले दो पहिया चार पहिया वाहनों की जांच होती ही नहीं है जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है अभ्यारण क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति पर्ची दिखाने के बाद चार पहिया वाहनों की किसी भी प्रकार की कोई सघन जांच पड़ताल या चेकिंग नहीं की जाती है चूंकि बारनवापारा बार अभ्यारण क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र है दिन में सामान्यत:आवागमन को बाधित नहीं किया जा सकता है

परंतु वन्यजीवों के संरक्षण के लिए रात्रि में भी समुचित व ठीक से जांच पड़ताल नहीं होने से विभिन्न वन्य अपराधों से संबंधित गतिविधियों मे संलिप्त लोगों की मनोबल में वृद्धि होनी स्वाभाविक है। कुछ विश्वनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दिनों अभ्यारण क्षेत्र में एक बाघ विचरण कर रहा है इसलिए बारनवापारा अभ्यारण क्षेत्र में जंगल सफारी भ्रमण के लिए पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है एक ओर वन्य प्राणियों व अभ्यारण में बहुमुल्य वनस्पतियो की सुरक्षा की चुनौती भी दिनों दिन बढ़ते जा रहा हैं बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण राजधानी रायपुर से सबसे नजदीक स्थित होने के कारण दुनिया भर से छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटकों की नजरे बारनवापारा अभ्यारण में रहती है इसलिए राज्य सरकार को बारनवापारा अभ्यारण सीमाक्षेत्र को और भी अधिक सुरक्षित करने तार की जालीदार फेंसिंग भी लगाए जाने की आवश्यकता है स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों में चर्चा का विषय बना हुआ है अगर ऐसा नहीं किया गया तो कुछ ही वर्षों में बारनवापारा अभ्यारण वन्यजीव एवं वनस्पति विहीन हो जाएगी जिससे राज्य व देश भर में जंगल सफारी और पर्यटन के नाम से जाने पहचाने वाले पर्यटन का केंद्र बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण की वास्तविक सुंदरता एवं आकर्षण समाप्त हो जाएगी अब देखने वाली बात होगी की क्या राज्य सरकार आने वाले दिनों में बारनवापारा अभ्यारण में स्वच्छंद विचरण कर रहे वन्य जीवों की संरक्षण संवर्धन की दिशा में उनके सुरक्षा के लिए आगे क्या कुछ कदम उठाती है।

छत्तीसगढ़ के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जो अपनी कीमती इमारती लकड़ियों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ प्रमुख वृक्षों में सागौन,साल, बीजा, हल्दु, धावड़ा, सलई और प्रमुखता से बांस के झुरमुट पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ महुआ, बेर और तेंदू के पेड़ भी पाए जाते हैं।
बारनवापारा के वनों में पाए जाने वाले मुख्य इमारती और प्रमुख पेड़ निम्नलिखित हैं:
सागौन: अभयारण्य के प्रमुख वृक्षों में से एक, जो बहुत कीमती लकड़ी प्रदान करता है।
साल : घने जंगलों में बहुतायत से पाया जाने वाला कीमती वृक्ष।
बीजा : एक अन्य महत्त्वपूर्ण इमारती लकड़ी।
हल्दु : यह भी यहां के मिश्रित वनों में पाया जाता है।
धावड़ा: प्रमुख इमारती वृक्ष।
बांस : यहां पूरे अभयारण्य में बांस के झुरमुट आम हैं।
टर्मिनलिया: ये प्रमुख पेड़ भी वनों का हिस्सा हैं।
अन्य वृक्ष: सलई, अमलतास और तेंदू।
यह अभयारण्य अपनी हरी-भरी वनस्पति, मुख्य रूप से मिश्रित वन, साल के वन और पूर्वी भाग में सागौन के वृक्षारोपण के लिए जाना जाता है।










