
महासमुंद। महासमुंद जिले के सिरपुर मेंन रोड से बांसकुड़ा पट्टी नं.-2 कमार बस्ती तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएम जनमन) जनजाति आदिवासी न्याय अभियान के तहत कमार जनजाति समाज बहुल ग्राम के लोगों की सुगम और व्यवस्थित आवागमन के लिए 1.60 कि.मी.पक्की सड़क निर्माण हेतू पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अनुमानित लागत 78 लाख 93000 रुपए स्वीकृत किए गए थे जिसका निर्माण एजेंसी मेसर्स ओबेराय क कंट्रक्शन को दिया गया था परंतु पीएमजीएसवाई महासमुंद के पूर्व अधिकारी जांगड़े व ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता विहीन और लापरवाही से कार्य कर के कारण निर्माणधीन सड़क जगह-जगह उखड़ रहे थे जिसकी गुणवत्ता की जांच व दोषी लापरवाह ठेकेदार पर कार्रवाई हेतु शिकायत छत्तीसगढ़ सृजन समाचार पत्र के प्रधान संपादक लोचन कुमार चौहान द्वारा मुख्य अभियंता एवं राज्य गुणवत्ता समन्वयक छत्तीसगढ़ ग्रामीण विकास अभिकरण व अधीक्षण अभियंता परियोजना मंडल रायपुर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण कार्यालय में किया गया था




जिससे विभाग के उच्च कार्यालय के निर्देश पर जांच टीम गठित कर सड़क की गुणवत्ता की जांच किया गया जिसमें घटिया और गुणवत्ता हीन सड़क को शासन के मापदंड के आधार पर पुनः जन भावनाओं के अनुरूप सड़क की गुणवत्ता का सुधार हेतु कार्यवाही किया गया शिकायतकर्ता प्रधान संपादक लोचन चौहान के समक्ष रायपुर की जांच दल ने जांच किया जिसके आधार पर घटिया सड़क को उखाड़ कर पुनः दोबारा बनवाया गया। जिससे कमार जनजाति बहुल ग्राम पंचायत में यातायात व्यवस्थित और सुगम हो पाया एवं केन्द्र सरकार की जनमन योजना की सही क्रियान्वयन संभव हो पाया है।
बता दें कि


जिले के विकासखंड महासमुन्द अंतर्गत ग्राम बांसकुड़ा कमार बस्ती लंबे समय तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहा। आदिवासी बाहुल्य एवं विलुप्त प्रजाति कमार जनजाति की बसाहट होने के कारण यहां के परिवार सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों से कटे हुए थे। वर्षा ऋतु में कच्ची सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती थी, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। इस चुनौती को दूर करने हेतु वर्ष 2023-24 में ग्राम बांसकुड़ा को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत सड़क निर्माण हेतु चयनित किया गया। योजना के अंतर्गत 79.23 लाख रुपये की लागत से 1.60 किलोमीटर मीटर लंबाई की पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गई। विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की गई तथा विभागीय अभियंताओं द्वारा सतत निगरानी एवं गुणवत्ता नियंत्रण के साथ कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया गया। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत निर्मित यह सड़क ने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक परिवेश में व्यापक परिवर्तन लाकर ग्राम को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।


बांसकुड़ा कमार बस्ती में सड़क निर्माण पूर्ण होते ही ग्राम के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले। अब एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी बाधा के गांव तक पहुंचने लगी हैं। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन रोगियों को समय पर उपचार मिलने लगा है। टीकाकरण एवं स्वास्थ्य अभियान भी नियमित रूप से गांव तक पहुंच रहे हैं, जिससे मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आया है। बच्चों और युवाओं को स्कूल, कॉलेज एवं उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में अब कठिनाई नहीं होती। विद्यार्थियों की उपस्थिति दर में वृद्धि हुई है और शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ी है। कृषि एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में समय और लागत की बचत हो रही है। कमार जनजाति द्वारा तैयार किए जाने वाले बांस शिल्प उत्पादों को अब आसानी से बाजार में बेचा जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। दूध, सब्जी और दैनिक आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति संभव हुई है तथा रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। सड़क निर्माण से गांव का सामाजिक-आर्थिक एकीकरण भी सुदृढ़ हुआ है। मुख्य सड़क से जुड़ाव के कारण सामाजिक आयोजनों, मेलों और सामूहिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ी है। बाहरी क्षेत्रों से संपर्क मजबूत होने के साथ-साथ ग्राम में विकास कार्यों की गति भी तेज हुई है।





