
लोचन चौहान
संपादक – छ.ग.सृजन।
बलौदाबाजार (छ.ग.) 5/12/2025 वैसे तो केंद्र और राज्य सरकारें वन संरक्षण संवर्धन के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों अरबों रुपए की बजट पानी की तरह खर्च कर रही है और एक पेड़ मां के नाम का स्लोगन देकर छत्तीसगढ़ के तमाम वन विभाग के बड़े उच्च अधिकारी कर्मचारी वृक्ष लगाते हुए फोटो खिंचावाकर वनों के संरक्षण संवर्धन की दुहाई देते हुए थकते नहीं है। लेकिन जमीनी हालात और हकीकत बिल्कुल ही उल्टा है हम इसलिए ऐसे दावा कर रहे हैं क्यों कि छ.ग.वन विभाग के दामन में ऐसे अनेक पुराने नए अधिकारी हैं जो सिर्फ जंगलों का विनाश करने में तुले हुए है जो वनों की रक्षण और संवर्धन के लिए रेंजर जैसे पदों पर बैठे वन अधिकारी अगर जंगलों को खुलेआम काट कर बेचने की अगर संकल्प ले लियें हो तो सरकारें हो या सिस्टम कुछ भी करें वनों का विनाश होना तय है ऐसा ही एक मामला बलौदाबाजार वनमंडल के अर्जुनी वनपरीक्षेत्र के थरगांव कुशगढ़ के वन कक्ष क्रमांक 313 व 312 का है


जहां पर राष्ट्रीय प्रजाति की बहुमूल्य सागौन वृक्षों की अंधाधुंध कटाई किया जा रहा है जिससे वन मंडलाधिकारी बलौदाबाजार श्री धम्मशील गड़वीर एवं मुख्य वन संरक्षक रायपुर और अरण्य भवन अटलनगर रायपुर में बैठे प्रधान मुख्य वनसंरक्षक वी.श्रीनिवास राव जैसे बड़े जिम्मेदार आला वनअधिकारी भी अनजान है। छत्तीसगढ़ सृजन के टीम को जब इस मामले के संबंध पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ ग्रामीण बताते है की इन दिनों वन परिक्षेत्र अर्जुनी में एक प्रशिक्षु रेंजर रूपेश्वरी दीवान प्रशिक्षणरत है जो अपने फारेस्ट गार्ड और कुछ सागौन तस्करों के साथ मिलकर जंगलों के बहुमुल्य राष्ट्रीय प्रजाति की सागौन लकड़ी की अवैध कटाई करवा कर जमकर चोरी व वनों की विनाश करने में लगे हुए हैं लेकिन रेंजर रुपेन्द्र साहू की नजरों में प्रशिक्षण पूर्ण होना कुछ महीने शेष है। कहकर किसी भी प्रकार की अवैध कटाई से इनकार कर मीडिया कर्मियों को खबर चला दो बोला गया और मीडिया द्वारा दिए गए सूचनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया जिससे लगता है वे जंगलों को बेचें चाहे अवैध तस्करी करें चाहे करायें चाहे जो भी अपनी मनमर्जी करें उन्हे तो मानो वन विभाग के उच्च अधिकारी और सरकार के वन मंत्री का सहयोग प्राप्त है जैसे बातें करने लगे और मीडिया कर्मियों के इन अपराधों के तरफ इंगित करने को हल्के में लेते हुए वे वनों का विनाश करने के लिए संकल्प बद्ध है।



कुछ दिनों पहले ही अर्जुनी परिक्षेत्र के ही ग्राम बिलारी और बगमल्ला के समीप शिकारियों द्वारा बिछाए गए है हाईटेंशन विद्युत तार की चपेट से एक मादा गर्भवती बायसन के विद्युत करंट से हुई मौत के मामले की जांच में प्रशिक्षु रेंजर रुपेश्वरी दीवान और उनके फारेस्ट गार्ड की घोर लापरवाही सामने आया था जिस पर वन मंडलाधिकारी द्वारा सिर्फ फारेस्ट गार्ड पर ही निलंबन की कार्यवाही किया गया एवं प्रशिक्षु रेंजर को अभयदान दे दिया गया जिसका नतीजा यह हुआ कि युवा प्रशिक्षु रेंजर खुलेआम जंगलों को कटवा कर बेचने और जंगलों के रक्षा के लिए सरकार द्वारा उन्हें पहनाई गई खाखी वर्दी को कलंकित कर रही है



अभी प्रशिक्षण भी पूर्ण नहीं हुआ है और अगर इस तरह के जंगल के अवैध कटाई में संलिप्त हैं अगर प्रशिक्षु रेंजर प्रशिक्षण प्राप्त कर एक रेंज का पूर्ण प्रभार मिल जाने पर लगता है पूरा जंगल बेच खायेगी। छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग को ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर उचित दांडिक कार्यवाही करने के साथ उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। अब देखना यह होगा की रेंजर रूपेन्द्र साहू और प्रशिक्षु रेंजर रूपेश्वरी दीवान पर वन विभाग के उच्च अधिकारीयों द्वारा क्या कार्यवाही किया जाता है। क्रमशः……












