
महासमुंद/लोचन चौहान(छ.ग. सृजन समाचार) सर्वविदित है की वैसे तो वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग छ.ग.शासन में वन विभाग के खजाने को खोखले करने वाले अधिकारी कर्मचारियों की कमी नहीं है लेकिन राज्य में कुछ आईएफएस अफसर ऐसे भी है जो की एक ही जगह अपनी पैठ बना कर चुंबकीय गुणों से युक्त होकर जंगलों के अवैध कटाई जैसे मामले में कार्यवाही करने में अपनी दोहरी और पक्षपात पूर्ण कार्यप्रणाली के कारण पूरे छ.ग.में मशहूर तो है ही साथ में वन विभाग की लुटीया डूबोने में भी लगे हुए हैं।ऐसे ही महासमुंद वन मंडल में पदस्थ आईएफएस अधिकारी पंकज सिंह राजपूत है जो महासमुंद वन मंडल में लगभग चार पांच वर्षों से चुंबक की तरह या छत्तीसगढ़ी में कहें तो”जोंक”की तरह चिपके हुए हैं। जिस कारण महासमुंद वनमंडल में वनों की अवैध कटाई,वन्य प्राणियों की अवैध शिकार के साथ साथ बहुमूल्य के इमारती लकड़ी व विभिन्न वनस्पतियों से अच्छादित वनों के आस्तित्व पर खतरा मंडराने लगी है प्रकृति ने महासमुंद जिले के वनों को सागौन,बीजा,खैर,साजा सहित विभिन्न मिश्रित प्रजाति के बहुमूल्य वनस्पतियों जीव जंतुओं व जैव विविधताओं से नवाजा है यहां वनमंडलाधिकारी के कुर्सी पर लंबे समय से पदस्थ आईएफएस पंकज सिंह राजपूत से अब वनमंडल महासमुंद नहीं सम्हल पा रहा है। विदित है की महासमुंद वनमंडल में वन विभाग के अवैध कटाई के लिए अतिसंवेदनशील व मशहूर वन कक्ष और बीटों की एक लंबी फेहरिस्त है जिस वनक्षेत्रों में मुख्य रूप में पिथौरा वनपरिक्षेत्र के ही लोहरीनडोंगरी,राजाडेरा,गिरना, जम्हर,भतकुंदा,किशनपुर सहित ऐसे अनेकों जगह है


लोहरीन डोंगरी के जंगल
नाम उजागर नहीं करने के शर्त पर कुछ जानकार सूत्र बताते हैं कि वन संरक्षण संवर्धन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर वन मंडलाधिकारी पंकज सिंह राजपूत का गुप्त रुप से आर्थिक पोषण करने वाले रेंजर, डीप्टी रेंजर,फारेस्ट गार्ड, बाबूओ, लिपिक की एक लंबी फेहरिस्त है जिसे स्पष्ट रुप से कमीशन खोरी भी कहा जा सकता है जो कैम्पा मद, एवं केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा वन संरक्षण के लिए लागू किए गए विभिन्न योजनाएं और जिले के वनों में एकीकरण,अंगीकरण, प्लांटेशन,एकीकरण,एवं अन्य कार्य में जमकर फर्जी वाड़ा कर वन विभाग का लुटिया डूबोने में लगे हैं जिससे महासमुंद वन मंडल में वनों के आस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। कुछ सूत्र अपने नाम उजागर नहीं करने के शर्त पर बताते हैं जिले के वनमंडलाधिकारी पंकज सिंह राजपूत का दिल्ली के एक बड़े सत्ताधारी नेता के साथ उठना बैठना और शहद के बुंदों की तरह मिठास के साथ संबंध है इसलिए महासमुंद वन मंडलाधिकारी का गद्दी आईएफएस तमगाधारी महासमुंद वनमंडलाधिकारी पंकजसिंह राजपूत के जिले में लंबें समय से पदस्थ रहने से वनमंडल महासमुंद में मलाई खाने की मिठास मधुरता को और बढ़ा रहा है ऐसा लगता है भारत सरकार के भारतीय वन सेवा के आईएफएस पंकज सिंह राजपूत को महासमुंद जिले के वनों के आस्तित्व को खतरे में डालने की कसम देकर भेजा गया है। इसलिए वनमंडलाधिकारी पंकज सिंह राजपूत के आदेशो का पालन वन परिक्षेत्र पिथौरा के रेंजर,बाबू लिपिक भी नहीं करते हैं बावजूद फिर भी महासमुन्द वन विभाग के खजाने को लुटने की मिठास और अनुभव ने उन्हें महासमुंद वनमंडलाधिकारी के गद्दी पर और भी मजबूती से जकड़ कर रखी हुई है। जिस पर छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग के मुख्यालय अरण्य भवन में बैठे प्रधान मुख्य वन संरक्षक,वन संरक्षक जैसे बड़े पदों में बैठे अफसरों को भी ये नजर नहीं आ रहा है महासमुन्द वन मंडलाधिकारी महासमुंद में अगर एक साल और पदस्थ रहे तो जिले के पर्यावरण एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे पर्यावरण प्रेमियों और समाजिक कार्यकर्ता के अंदर वनों को बचाने पंकज सिंह राजपूत को बहिष्कार करने के लिए आंदोलन करने की ज्वाला भड़कने में देर नहीं लगेगी इसलिए”अंधेरे नगरी चौपट राजा” कहावत को चरितार्थ कर रही वन विभाग जिला महासमुंद के कार्यो की विस्तृत और सुक्ष्म जांच कार्यवाही के लिए गठित की गई राज्य और केन्द्र सरकार के करप्शन की जांच करने वाले स्वातंत्र्य जांच एजेंसीयो को भी एक नजर महासमुंद जिले के जंगलों और वन संरक्षण संवर्धन के नाम पर वन विभाग की प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों रु पानी की तरह बहाए जाने की वास्तविक जमीनी हकीकत के तरफ दिशा दिखाने के लिए छत्तीसगढ़ सृजन अग्रसर होने की कदम से पीछे नहीं हटेगी।

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संपादक- लोचन कुमार चौहान
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