

संपादक-लोचन चौहान (छ.ग.सृजन)
धरमजयगढ़ /विशेष- छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने बहुमूल्य वन संपदाओं एवं विभिन्न वनस्पतियों से अच्छादित कर यहां के लोगो के जीवन को सुगम व.अनुकूल जलवायु दी है यहां के वनो मे.विविध तरह के वन्य प्राणी स्वच्छंद विचरण कर इस पर्यावरण को संतुलित रखने में अपनी महती भूमिका निभाते हैं यहां स्थिति सरगुजा रायगढ के अधिकांश वन क्षेत्र को हाथीयों के रहवास के लिए अनुकूल मानी जाती है जिससे हाथी इस वन क्षेत्र में निर्भय व स्वच्छंद रूप विचरण करते हैं यहां वन विभाग द्वारा हाथियों की संरक्षण संवर्धन.हेतु वन क्षेत्र में उनकी सुरक्षा एवं समुचित विकास के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग हर वर्ष भिन्न-भिन्न प्रकार से कार्य योजना बनाकर प्रतिवर्ष करोड़ों की बजट खर्च कर वन्य प्राणियों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ने की दावा करती है, परंतु धरमजयगढ रेंज वन क्षेत्र मे हाल ही में अज्ञात कारणों एक नर हाथी की मौत ने विभाग के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ी कर दी है ग्रामीण गलियारों में चल रही चर्चा अनुसार यह मामला किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा वन्य प्राणियों के शिकार करने की नियत से लगाई गई हाई टेंशन विद्युत तार की चपेट में आ जाने से हाथी की मृत्यु होने की चर्चा का बाजार गर्म है लेकिन नर हाथी की मौत होने से विभाग के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े होना लाजमी है


पूरी घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के आला अफसरों का टीम ने मौके पर पहुंचकर मृत नर.हाथी का पोस्टमार्टम कराया जाकर रिपोर्ट आने तक का इंतजार कर रहे हैं अब देखना होगा कि आखिर वन विभाग का हाथ विशालकाय नर हाथी को हाई टेंशन विद्युत तार बिछा कर मारने वाले आरोपियों को पकड़ पाती है कि नहीं या यह मामला सिर्फ कागजों में ही सीमट कर रह जाएगी,
लेकिन सबसे बड़ा सवाल है मृत नर हाथी के शरीर मे परिलक्षित विद्युत करंट के निशान स्पष्ट प्रदर्शित करता है कि नर हाथी की मृत्यु हाई टेंशन विद्युत की चपेट में आने से हुई है, छत्तीसगढ़ शासन वन्य प्राणीयो की सुरक्षा के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है परंतु वन एवं वन्य प्राणीयों समुचित सुरक्षा होती नहीं दिख रही है छ.ग.मे वन्य प्राणी एवं वन सुरक्षा की कार्य योजना सिर्फ वन विभाग के कार्यालय की फाइलो में ही सिमट कर रह गया है आखिर कब तक विभागीय निष्क्रियता और बेपरवाह वन अफसरों की गलती का खामियाजा वन्य प्राणी अपनी जान गंवाकर देते रहेंगे अगर ऐसे ही रहा तो.वो दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ मे मौजूद बहुमूल्य वनस्पतियों से अच्छादित वन क्षेत्र वन्य प्राणी विहीन होने मे देर नहीं लगेगी,
क्या उक्त वन क्षेत्र में जिम्मेदार फॉरेस्ट गार्ड डिप्टी रेंजर अपने मुख्यालय में रहकर बराबर नाइट गस्त करते है इस बात पर संदेह प्रतीत होती है शासन की चमचमाती सरकारी चार पहिया वाहनों मे बैठकर मोटी तनख्वाह लेना मजा करना व एयर कंडीशन.कार्यालय में बैठकर फरमान करने से वन सुरक्षा नहीं होती बल्कि सरकार एवं वन अवसरों को इस बात पर विचार करना चाहिए की छत्तीसगढ़ मे वन्य अपराध से संबंधित कानून के लचीले होने से राज्य में लगातार वन्य अपराध बढ़ रहे हैं जिससे वन्य अपराध करने वाले व इस तरह के अपराध से जुड़े लोगों को आसानी से न्यायालय से राहत भी मिल जाती है फिर बाहर आकर फिर पुनः वन्य अपराध करने में लग जाते हैं छत्तीसगढ़ सरकार को राज्य में हो रहे वन्य अपराध को गंभीरता से लेते हुए वन्य अपराध से संबंधित कानून को और भी सख्त करने की जरूरत है जिससे भविष्य में बहुमूल्य वन संपदा एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
