
लोचन चौहान
प्रधान संपादक- छत्तीसगढ़ सृजन
मोबाइल नं.7441148 115
पिथौरा। 4/02/2026 महासमुंद वनमंडल अंतर्गत वनपरिक्षेत्र पिथौरा के बगारपाली संरक्षित सिंचित प्लांटेशन रोपड़ी कक्ष 212 एवं उससे सटे एन.आर.वनक्षेत्र में अलग-अलग जगह लगभग 10 जंगली सुवर की अवैध रुप से शिकार कर आरोपियों द्वारा घटना के साक्ष्यों को छुपाने मृत जंगली सुअरों को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ दिया गया है इस पूरे घटना की सूचना मिलने पर पूरे महासमुंद वनमंडल में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने वनपरिक्षेत्र पिथौरा के अलग-अलग वन परिवृत्तों उप परिक्षेत्रों में पदस्थ वनअमले के कार्य प्रणाली वन्य जीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल पैदा कर दिया है। महासमुंद वनमंडल में किसी वन परिक्षेत्र के कंटीली फेंसिंग तार से संरक्षित सिंचित प्लांटेशन के भीतर इतनी अधिक संख्या में एक साथ जंगली सुअर का अवैध शिकार कर बिना पोस्टमार्टम के कफ़न दफन कर देना बहुत ही गंभीर संध्यास्पद होने के साथ विभागीय लापरवाही भी है कोइ उच्च अधिकारी को बिना सूचना एवं पोस्टमार्टम के गुपचुप तरीके से मृत जंगली सुअरों को दफना दिया जाना प्रथम दृष्टया गलत एवं कानून के विरुद्ध एक साजिश के तहत किए गए गंभीर वन्य अपराध की श्रेणी में आता है एवं बिना किसी विभागीय अधिकारी कर्मचारी के संलिप्तता के बगैर संरक्षित क्षेत्र में इस तरह की घटना कारित करना संभव नहीं हो सकता है

गड्ढा क्रमांक-1
वन्यप्राणी जंगली सूअरों का एक साथ शिकार कर किसी राजपत्रित अधिकारी को बगैर सुचना दिए पोस्टमार्टम किए बिना ही दफन किए जाने की शिकायत पर इस अतिसंवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए मामले पर स्वयं प्रधान मुख्य वन संरक्षक(वन्य प्राणी)एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक छ.ग.अरुण कुमार पाण्डेय द्वारा निगरानी किया जा रहा है शिकायत पश्चात वनमंडलाधिकारी महासमुंद मयंक पांण्डेय को गहन एवं सूक्ष्मता से जांच कार्यवाही हेतू निर्देशित किया गया है। उच्च स्तरीय निर्देश पर पिथौरा उप वनमंडलाधिकारी एसडीओ डिम्पी बैस मामला अति संवेदनशील होने से रातों-रात मौका निरीक्षण कर जांच में जुट गई है। डॉग स्क्वायड भी बुलाया जा रहा है।


पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ “अरुण कुमार पाण्डेय का माथा ठनका डीएफओ को दिए गहन एवं सुक्ष्मता से जांच कार्यवाही के कड़े निर्देश।


इस घटना ने वन परिक्षेत्र पिथौरा के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल पैदा कर दिया है जिस वन्यजीवों और जंगलों को बचाने के लिए शासन हजारों करोड़ रुपए की भारी भरकम बजट अपने वन कर्मचारी के लिए प्रतिमाह खर्च करती है वहीं कर्मचारी अगर उनके रक्षक की जगह भक्षक बन जाएं तो उनसे किसी भी प्रकार की उम्मीद करना बेमानी होगी प्राप्त सूचना के आधार पर यह मामला इसलिए और अति संवेदनशील हो जाता है क्योंकि इतने सारे जंगली सूअर को मार कर दफन कर दिया जाता है और किसी रेंजर एसडीओ डीएफओ जैसे किसी उच्च अधिकारी को इस घटना की कोई सूचना तक नहीं दिया जाता है
लेकिन स्थानीय फॉरेस्ट गार्ड एवं डिप्टी रेंजर को इस पूरे मामले का जानकारी होते हुए भी इस अतिसंवेदनशील घटना को अपने उच्च अधिकारियों व विभाग से पूर्णतः छुपाई गई है एवं किसी बड़े अधिकारी को सूचना देने की जहमत तक नहीं उठाई गई जिससे मामला और अति गंभीर हो जाता है और पूरे घटनामें विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता की पुष्टि करता है।ऐसे में वन्य प्राणियों और वनों के विनाश में संलिप्त दोषीयों को अगर शासन बर्खास्त नहीं करता है तो वे लगातार ऐसे ही वन्य प्राणियों और जंगलों के विनाश में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे अब देखने वाली बात होगी कि आखिर मामले की जांच में क्या कुछ निकल कर आता है कुल कितने आरोपी पकड़े जाते हैं और अवैध जंगली सुअरों के शिकार के आंकड़े कितने बढ़ते हैं एवं विभाग वास्तविक अपराधियों तक पहुंच पाता है या नहीं या इतने अधिक संख्या में वन्य प्राणियों के शिकार करने वाले शिकारीयों और घटना में संलिप्त वनअधिकारी कर्मचारीयों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जाती है या नहीं। अगर वनों एवं अन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती एवं उनकी सुरक्षा के लिए कोई कड़े कानून नहीं बनाए जाते हैं

तो ऐसे ही वन्य प्राणियों का विनाश होता रहेगा। इसलिए राज्य एवं केंद्र सरकार को पर्यावरण एवं वन्य प्राणियों के सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कानून बनाने की जरूरत है अन्यथा जीव जगत और पर्यावरण जल्द ही समाप्त हो जाएगी जिससे इस पृथ्वी पर मनुष्य जीवन भी समय के पहले नष्ट हो जाएगी। ध्यान रहे इस अतिसंवेदनशील मामले की गहन और सूक्ष्म जांच प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय की विशेष निगरानी में किया जा रहा है।