
बलौदाबाजार।छ.ग.वन विकास निगम बारनवापारा परियोजना मंडल के बार परिक्षेत्र को वर्षों से खोखला करने के बाद अब रवान परिक्षेत्र के रेंजर हिरऊ राम पैंकरा वन विकास निगम के सबसे अधिक राजस्व और वन उपज उत्पादन करने वाले रवान परिक्षेत्र को लुट रहा है और लाखों रुपए का चुना लगा रहा है। उनके द्वारा बारनवापारा परिक्षेत्र में पदस्थापना के दौरान जमकर विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कार्य किया गया है जो किसी भी तरह माफी के लायक नहीं ऐसे लोगों को तो शासन को बर्खास्त कर बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए आइए जानते है क्षेत्र के कुछ विश्वनीय ग्रामीण सूत्र बताते हैं की रवान और बारनवापारा परिक्षेत्र में वर्षों से पदस्थ निगम की मलाई मक्खन का बड़े ही शातिर तरीके से स्वाद चख रहे चालाक और खुराफाती स्वभाव के रेंजर हिरऊ राम पैंकरा का उनके बीते कुछ वर्षों की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी को अपने कलम की नोक चुभोचुभो कर उन्हें बिलबिलाने को मजबुर करते है। याद रहे हमारी कलम किसी नेता नारायण नीती पार्टी सरकार अवतार एवं कोई सरकारी दलाल व चोरों की गुलामी नहीं करता है

एक नज़र भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा एवं वन विकास निगम का लुटिया डूबोने में वन विकास निगम के उच्च अधिकारीयों की वरदहस्त से रवान रेंज में अमरत्व की उपाधि से नवाजे गए प्रोजेक्ट रेंज आफिसर हिरऊ राम पैंकरा की बीते कारनामे पर नजर डालते हैं।
बार परिक्षेत्र में पदस्थ रहते हुए
कक्ष क्रं.97 में नीलगिरी पौधा रोपण वर्ष 2016 मे किया गया था आज न तो पूरा पौधा है न ही कोई ठुंठ है लोग बताते हैं की यहां पर लाखों रुपए की लागत से लगभग एक लाख निलगिरी का पौधा रोपण किया था लेकिन आज दबी कुचली और अंतिम सांसें गिन रहे कुछ ही पौधे नजर आते हैं निगम के लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी यहां से निगम को चवन्नी का भी वनोपज उत्पादन नहीं हो सकता है आखिर इसकी देखरेख और सुरक्षा का मजिम्मेदार कौन है और लाखों रुपए के बजट से किए गए नीलगिरी का प्लांटेशन में किए गए खर्चों की भरपाई कौन करेगा क्या छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम सिर्फ लूट का अड्डा है या चंद लुटेरों का अड्डा है। अगर कोई जिम्मेदार है तो क्या उससे राशि वसूली किया जाएगा ये एक बड़ा सवाल है। रेंजर,डिप्टी रेंजर, बीडगार्ड,डीएम,डीप्टी डीएम सभी जिम्मेदार है तो जांच कर एक-एक निलगिरी पौधे की सुरक्षा की जवाबदेही सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बार रेंज के कक्ष क्रमांक 98 में भी रोपड़ वर्ष सन टीपी 2000 में लाखों रुपए की लागत से सागौन प्लांटेशन किया गया था लेकिन वहां भी चंद पौधों एवं अंतिम सांसें गिन रहे कुछ ही अधमरा पेड़ों के सिवाय कुछ भी नहीं है। जिसका जिम्मेदार कौन है। हिऊराम पैंकरा जब से वन विकास निगम में बीडगार्ड बना तब से भ्रष्टाचार कर रहा है। डिप्टी रेंजर बनने के बाद रायकेरा रेंज में पदस्थ रहने के दौरान भी इनके द्वारा बड़े बड़े कारनामे किए गए हैं। जिस वन कक्ष में कुप कटाई के लिए थिनिंग कार्य कराना था वहां ना कराके इनके द्वारा गैर जिम्मेदाराना तरीके से अन्य दूसरे कूप की कटाई करवा दिया गया था जिसकी शिकायत पर जांच किया गया लेकिन तत्कालीन डीएम सोमावार के संरक्षण में इनका बचाव किया गया और इस पर कार्यवाही शून्य रहा।

रायकेरा रेंज में ही इनके समय में सिर्फ डीएम सोमावार के मौखिक आदेश से ही कूप कटाई कर दिया गया था और लकड़ी डिपो भेज दिया गया था जंगल में ही थिनिंग का कार्य कराता था और और वहां से भेजे गए आमद की रिसीव भी करता था उसी समय इसी समय कोडार काष्ठागार डीपो के एक ही लाट नं.O-887 के सागौन काष्ठ को दो दो ठेकेदारों को बेंच दिया गया। एक ठेकेदार को बेचना समझ में आता है ठीक है लेकिन दो-दो ठेकेदार को सागौन का लट्ठा कहां से उपलब्ध कराया गया लकड़ी की भरपाई कहां से किया गया। जब दो ठेकेदारों को एक ही लाट नं.के लट्ठा को बेचा गया है तो ना जाने कितने लाट को इनके द्वारा ठेकेदारों को दिया गया होगा गंभीर सवाल है।ये भी एक बड़ा जांच का विषय है। लेकिन आज तक इन मामलों का जांच नहीं हुआ है क्यों कि इन सब का जांच का ज़िम्मा तत्कालीन डीएम सोमवार साहब कर रहे थे और फाइल दबा दिया गया अगर इस मामले का रीओपन कर जांच किया जाएगा तो ये भ्रष्टाचारी रेंजर हिरऊ राम पैंकरा के पुराने करतूत सामने आएगा

और इनका का गर्दन कानून के शिकंजे में फंसेगा। इनके खिलाफ मजदूरों में भी काफी नाराजगी है अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ ग्रामीण मजदूर बताते हैं की हिरऊ राम पैंकरा द्वारा जब से रवान रेंज में पदस्थ हुए हैं तब से आज तक मजदूरी भुगतान में भी वित्तीय अनियमितता लगातार बरती गई है जो वित्तीय अनियमितता की चरम सीमा को पार कर गई है इनके द्वारा कार्य भुगतान के लिए बनाए जाने वाले प्रमाणकों में नाम किसी और का और भुगतान किसी और को किया जाता है रवान रेंज से उच्च कार्यालय को प्रस्तुत किए गए मजदूरी भुगतान के प्रमाणको में दर्ज़ मजदूरों का नाम और बैंक स्टेटमेंट का सूक्ष्मता से मिलान किया जाए तो एक बड़े वित्तीय अनियमितता से पर्दा उठेगा ।

जिससे वन विकास निगम के रेंजर हिरऊ राम पैंकरा के कार्य प्रणाली एवं कथनी और करनी का दूध का दूध पानी का पानी होगा।





