Home » Uncategorized » वाह रे शिक्षा विभाग”प्रतीत होता”लेकिन सत्य है..प्रभारी डीईओ बी.एल.देवांगन की भूमिका संदेहास्पद.. शिक्षक दुर्वासागिरी के विरुद्ध जांच रिपोर्ट में स्पष्ट अभिमत क्यों नहीं?

वाह रे शिक्षा विभाग”प्रतीत होता”लेकिन सत्य है..प्रभारी डीईओ बी.एल.देवांगन की भूमिका संदेहास्पद.. शिक्षक दुर्वासागिरी के विरुद्ध जांच रिपोर्ट में स्पष्ट अभिमत क्यों नहीं?

महासमुंद 7.09.2026 महासमुंद जिला के पिथौरा वि.खं.अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डूमरपाली के शिक्षक दुर्वासा गिरी गोस्वामी की छ.ग.राज्य से बाहर म.प्र.के जबलपुर स्थित भोजमुक्त विश्वविद्यालय में बिना आदेश व‌ विभागीय अनुमति के परीक्षा में सम्मिलित होने के मामले की जांच में गड़बड़ी कर लापरवाह एवं अकड़बाज दोषी शिक्षक दुर्वासा गिरी गोस्वामी को बचाए जाने की कोशिश किए जा रहे हैं जिससे महासमुंद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल.देवांगन की दूषित कार्यप्रणाली और भूमिका स्पष्ट परिलक्षित हो रही है शिक्षक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा के डाक्टर से टाइफाइड बीमारी का मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पूर्व माध्यमिक शाला डूमरपाली एवं वि.खं.पिथौरा कार्यालय में मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन लगाया गया था जिसमें प्रधान पाठक एवं शिक्षा विभाग के अवकाश स्वीकृत करने वाले किसी सक्षम अधिकारी का हस्ताक्षर ही नहीं था लेकिन शिक्षक ने मनमर्जी तरीके से एक आवेदन देकर और ऑनलाइन छुट्टी के लिए अपील करके विधी विरुद्ध तरीके से दिगर राज्य में शैक्षणिक परीक्षा में सम्मिलित होने की पुष्टि होने एवं मामले की जांच रिपोर्ट में सात बिंदुओं में स्पष्ट परिलक्षित है लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जानबूझकर जांच रिपोर्ट में उल्लेख “ऐसा प्रतीत होता है की”शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सत्य है लिखा गया है जिसमें प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल.देवांगन द्वारा अपनी स्पष्ट अभिमत नहीं देने के कारण अभी तक दोषी शिक्षक दुर्वासागिरी पर उच्च कार्यालय द्वारा कोई भी वैधानिक कार्यवाही नहीं की जा सकी है अब संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग रायपुर ने एक पत्र जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के नाम विगत 31.07.2026 को जारी किया हैजिसमें जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल.देवांगन को जांच दल से तत्काल दोबारा स्पष्ट अभिमत लेते हुए स्वयं भी स्पष्ट अभिमत के साथ मामले पर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं अब समझने वाली बात है कि इस मामले में बिना विभागीय अनुमति और मेडिकल अवकाश लेकर दीगर प्रदेश में परीक्षा में सम्मिलित होने वाले लापरवाह दोषी शिक्षक दुर्वासा गिरी गोस्वामी को बचाने की कोशिश की जा रही है और शिकायतकर्ता की जांच को लंबे समय तक खींचने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी बाबू और स्थानीय जांच अधिकारियों की मिली भगत से इस मामले में लीपापोती की जा रही है अब देखने वाली बात होगी कि प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी दोबारा कब स्पष्ट अभिमत के साथ कार्यवाही हेतु उच्च कार्यालय को जांच रिपोर्ट भेजते हैं या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। 31 जुलाई 2026 को जारी निर्देश में 7.08.2026 तक दोबारा स्पष्ट अभिमत के साथ जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित दिया गया हैलेकिन अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के द्वारा स्पष्ट अभिमत के साथ उच्च कार्यालय को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत प्रेषित नहीं किया जाना पूर्णत: लापरवाह शिक्षक दुर्वासा गिरी गोस्वामी को बी.एल देवांगन एवं जांच में अधिकारियों के द्वारा जानबूझकर प्रकरण को लचीला बनाने एवं शिकायतकर्ता का मनोबल तोड़कर लापरवाह अकड़बाज शिक्षक दुर्वासा गिरी गोस्वामी बचाए जाने की पुष्टि करता है जो बहुत ही निंदनीय एवं शर्मनाक है जल्द ही इस पूरे मामले का शिकायत शिक्षा मंत्री छ.ग.शासन एवं लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को पूरे प्रकरण से अवगत कराया जाएगा जिससे कि मामले में संलिप्त समस्त दोषियों के विरुद्ध कड़ी कड़ी अनुशासनात्मक एवं उचित दांडिक कार्यवाही किया जा सके।\n

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