
महासमुंद 3.09.2026 जिले के शिक्षा वि.खं.पिथौरा अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डूमरपाली के शिक्षक दुर्वासागिरी गोस्वामी द्वारा मेडिकल अवकाश समयावधि में म.प्र.के भोज मुक्त विश्वविद्यालय में एम.ए.अंतिम वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित होने का दिलचस्प मामला प्रकाश में आया है…जो शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला डुमरपाली एवं जिला शिक्षा अधिकारी के साथ साथ पूरे महासमुन्द जिला के शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न पैदा कर दिया है
आइए समझते क्या है पूरा मामला

वैसे तो महासमुंद जिला में शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शासकीय प्राथमिक शाला,पूर्व माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं मे अपने अजीबो गरीब कारनामें और विभागीय जिम्मेदारियों व कार्य के प्रति उदासीनता व मनमर्ज़ी रवैया बरतने वाले वेतनभोगी शिक्षकों की कोई कमी नहीं है लेकिन जब कोई शिक्षक खुलेआम विभागीय अधिकारियों के आंखों में धूल झोंक कर स्वयं की स्वास्थ्य गत आधार बनाकर सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिथौरा के डाक्टर से स्वयं को बीमार होना प्रमाणित करने डाक्टर से जुगाड़ कर मेडिकल अवकाश लेकर किसी हास्पिटल,या घर में स्वास्थ्य लाभ बेड रेस्ट के बजाय स्वयं की शैक्षणिक योग्यता एम.ए.भूगोल अंतिम वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए दिगर प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय जबलपुर म.प्र.परीक्षा में सम्मिलित होने जाना पाया गया है यह मामला सिर्फ किसी एक शिक्षक का मेडिकल अवकाश से ही संबंधित नहीं है बल्कि इस तरह से महासमुंद जिला शिक्षा विभाग में जान बूझकर मेडिकल अवकाश के नाम से बहाना बनाने के पश्चात शासन के खजाने से मेडिकल भत्ता के रुप में सरकारी खजाने को लुटने वाले कर्मचारियों की एक लंबी फेहरिस्त है जो जिला के शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के निष्क्रिय कार्यप्रणाली का घोतक परिणाम है लेकिन इस मामले ने जिले की शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अंचलों में संचालित विद्यालयों के प्रति शिक्षकों की कार्यप्रणाली विभाग के प्रति ज़िम्मेदारी व विभागीय स्तर पर शिक्षकों पर महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी की वैधानिक नियंत्रण पर सवालिया निशान हैं..एवं इस तरह के मामले में पिथौरा स्वास्थ्य विभाग के कार्यप्रणाली भी प्रथम दृष्टया संदेहास्पद प्रतीत होती है… क्योंकि जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर स्वयं को होशियार और कड़क नाथ मुर्गा समझ कर जो लापरवाह कर्मचारी ऐसे मेडिकल रिपोर्ट का सहारा लेते हैं उस मेडिकल रिपोर्ट को जारी करने वाले डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच किए जाएं तो मेडिकल अवकाश के बहाने घुमने फिरने और गटरमस्ती करने वाले विभिन्न विभागों के शासकीय वेतन भोगी कर्मचारियों की जारी किए गए मेडिकल रिपोर्ट में अनेक चौंकाने वाली तथ्य निकलकर बाहर आएगी..जिसमें ब्लाक और जिला स्तर के उच्च अधिकारी भी नपेंगे… क्योंकि कोई भी अधिकारी कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत निजी योग्यता या कार्य के लिए बिना किसी विभागीय लिखित आदेश या अनुमति के बगैर शासकीय कर्मचारी अपने प्रदेश से बाहर कैसे जा सकता है…

हद तो तब हो गया जब शिक्षक दुर्वासागिरी गोस्वामी की अवकाश अवधि में उनका मुख्यालय ठाकुरिया खुर्द किया गया था बावजूद दुर्वासागिरी गोस्वामी ने शिक्षा विभाग एवं विभागीय उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देश को सुखे पत्ते की तरह पैरों तले रौंद दिया गया अब इस पूरे मामले की जांच पश्चात दोषी सिद्ध पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद नें नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग रायपुर को सात बिंदुओं में अनुसंशा पत्र प्रेषित की गई है। अब देखने वाली बात होगी की इस लापरवाह, अकड़बाज और अहंकारी शिक्षक दुर्वासागिरी पर क्या कुछ कार्यवाही की जाती है या फिर यह फाइल हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।














