
रायपुर:-छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मंडल में इन दिनों सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है क्योंकि सब कुछ ठीक इसलिए नहीं चल रहा है क्योंकि रवान रेंज के रेंजर हिरऊराम पैंकरा और उनके कार्यपणाली से बरनावापारा परियोजना मंडल वन विकास निगम की छवि धुमिल हो रही है वैसे तो वर्षों से ये रेंजर अपनी वनरक्षक के पदस्थापन के समय से एक ही परियोजना मंडल में अपना वर्चस्व स्थापित कर अपने कुछ स्वार्थी डप्टी डीएम चित्रा त्रिपाठी की चाटुकारिता कर उनकी आओ भगत से रवान रेंज की प्लांटेशन, कूप कटाई, वनोपज के परिवहन कार्य मजदूरी भुगतान वाहनों की मरम्मत जैसे अनेक विभागीय कार्यों में अपनी मनमर्जी कार्य करते हुए निगम की खजाने में लाखों की सेंध मारी करने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
कोई अधिकारी कर्मचारी ऐसा तब कर सकता है जब उसके। उच्च अधिकारी डिप्टी डीएम या उसके ऊपर के अधिकारी उनके इस गैर कानूनी कार्यों में अपनी मौन सहमती देवें लगातार बारनवापारा परियोजना मंडल में रवान रेंज में विभागीय नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे अधिकारी पर आखिर निगम मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों की नजरें क्यों नहीं पड़ती है स्वयं अपनी राजनीतिक पकड़ के कारण नेतागिरी और फूट डालो शासन करो की अंग्रेजी नीति पर चलने वाले ऐसे भ्रष्ट्र अधिकारी हर बार बड़े-बड़े गलती करने के बाद भी ऐसी ही गलती करने के लिए उन्हें उसे गलती की पुनरावृत्ति के लिए लगातार मौका दिया जाना बहुत ही निंदनीय और शर्मनाक है बड़गांव निलगिरी प्टेलांटेशन, मोहदा बीट के पेड़ों की मार्किंग में अनियमितता, कुछ दिनों पहले रवान रेंज कार्यालय से चंद कदमों के दुरी पर 116 और 89 वन कक्ष में लगी भीषड़ आग से निगम के सागौन व मिश्रित प्रजाति के लट्ठों, बल्लीयों,जलाऊ चट्टे की आग से हुए भीषण तबाही में हुई नुकसान का ज़िम्मेदार आखिर कौन है यह रेंजर अपने अधीनस्थ छोटेकर्मचारियों की आड़ लेकर और कुछ एक दो छोटे कर्मचारीयों की शिकायत करवाकर बरनावापारा परियोजना मंडल में अपनी निरंकुश एवं एक तरफा राज चला रहा है जिससे क्षेत्रवासी के साथ-साथ निगम के स्थानीय अधिनस्थ छोट कर्मचारी गण भी हिरऊ रेंजर की निरंकुश कार्य प्रणाली से पीड़ित है लेकिन उच्च अधिकारियों के वरदहस्त से ऐसे अधिकारी वर्षों से बारनवापारा परियोजनामडल का लुटिया डबोते हुए मौज कर रहे है उनको लगता है कि उनके लिए कोई भी मिडिया कवरेज की सत्यता कोई मायने नहीं रखता है उनके चतुर चाल और सच्चाई पर पर्दा डालने और उसे मिटाने की कोशिश करना उनकी मानो उनकी वर्षों पुरानी परपरा बन गई है उन्हें अभी भी लगता है वे हमेशा उनकी ऐ चतुराई हमेशा ही कायम रहेगा लेकिन सुन ले पढ़ लें हिरऊ राम पैंकरा रेंजर आखिर में जीत सत्य की ही होती है आखिर अपने अधीनस्थ छोटे कर्मचारीयों को सामने रखकर आखिर कब तक आप अपनी नाकामियों और फर्जीवाड़ा को छुपाते रहोगे … सच्चाई का सामना तो करना ही पड़ेगा… क्रमशः….



