
लोचन चौहान
प्रधान संपादक-छ.ग.सृजन
मो.7441148115
रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम अंतर्गत बारनवापारा परियोजना मंडल मे कुल पांच परिक्षेत्र हैं जिसमें मुख्य रुप से आरंग,रवान, रायकेरा,सिरपुर, बारनवापारा है निगम के इन वनों से छत्तीसगढ़ राज्य शासन को बहुमूल्य प्रजाति की सागौन,,साल बीजा, साजा सहित अनेक बहुमूल्य प्रजाति की इमारती लकड़ी का उत्पादन प्रतिवर्ष होती है जिसकी मेंटेनेंस और प्लांटेशन सहित यहां से बेहतर अच्छी गुणवत्ता के वनोपज उत्पादन की पूरी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की होती है यहां से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होती है लेकिन विडंबना देखिए कि निगम के गठन को वर्षों बीत जाने के बाद भी यहां के 3 स्टार रेंजर और उनके अधिकारी कर्मचारियों को रात्रि में गस्त करने के लिए एक वाहन भी उपलब्ध कराने में वन विकास निगम को कोई दिलचस्पी नहीं है ना ही निगम के उच्च अधिकारीयों को रात्रि गस्त के लिए वाहन और उनकी आफिस वर्क और बैठने के लिए कहीं भी भवन कार्यालय नहीं है निगम के कर्ताधर्ताओं ने बारनवापारा परियोजना मंडल के कर्मचारी अधिकारी के लिए आफिस कार्य के लिए भवन और गस्त के लिए वाहन उपलब्ध कराने कोई कार्यवाही आज तक नहीं किया जा रहा है अटल नगर नया रायपुर में निगम के मुख्यालय के एयर कंडीशनर वातानुकूलित कमरें में बैठने वाले आला अफसरों को बारनवापारा परियोजना मंडल में पदस्थ अधिकारी कर्मचारीयों की मजबूरी और परेशानी की तरफ देखने की फुर्सत नहीं है लगातार वन्य अपराधियों लकड़ी तस्करों से जूझते हुए बारनवापारा परियोजना मंडल अंतर्गत हजारों हेक्टेयर में फैले निगम के बहुमूल्य वनोपज एवं निगम वन क्षेत्र में वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए अपनी जान को जोखिम में डालकर दिन-रात कार्य करने वाले निगम के अधिकारी कर्मचारियों के लिए दिन एवं रात के समय में रात्रि गस्त करने के लिए एक वाहन भी उपलब्ध नहीं कराया जाना और बैठने के लिए कोई भवन नहीं होना बारनवापारा परियोजना मंडल का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है।

छत्तीसगढ़ सृजन मीडिया की टीम ने जब निगम के बारनवापारा परियोजना मंडल के जंगलों का दौरा किया और ऑफिस कार्यालय की जानकारी लेने के लिए पांचों रेंज के अधिकारियों को संपर्क साधा तो एक परीक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि उनके द्वारा सिरपुर के पास मरौद नाका एवं एक पेड़ के नीचे 3 स्टार निगम रेंजर द्वारा निगम के जंगलों की सुरक्षा के लिए धूप छांव बरसात हर मौसम में वहीं से निगरानी करने की बात कही। वहीं रवान रेंज कार्यालय की टूटी-फूटी बिल्डिंग के चारों तरफ टूटे खिड़कियों से वनविकास निगम की अपने अधिकारी कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशीलता को प्रदर्शित कर रही थी। आरंग रेंज कार्यालय तो वन काष्ठागार कोडार में संचालित की जाती है निगम के रायकेरा रेंज के परीक्षेत्र कार्यालय का भी कोई अता पता नहीं है।

और बारनवापारा रेंज कार्यालय का तो नामों निसान कहीं भी नजर नहीं आता है। वही प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के वनोपज उत्पादन कर राज्य शासन को लाभ पहुंचाने वाले यहां के पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों को बारनवापारा परियोजना मंडल में अपने जंगलों और वन्य प्राणियों को बचाने के लिए त्वरित आवागमन हेतु आवश्यक चार पहिया वाहनों एवं कार्यालय भवन के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने से स्थानीय अधिकारी कर्मचारीयों में मायूसी और हतास होना स्वाभाविक है। आखिर में करें तो क्या करें आखिर नौकरी तो करना है चाहे धूप में बैठे हैं चाहे पेड़ के नीचे चाहे मरौद बरियर नाका में बैठे हैं आखिर अपनी जिंदगी को वन विकास निगम को समर्पित कर चुके ऐसे अधिकारी कर्मचारी का सुनने वाला छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में कोई नहीं है अब देखना होगा कि राज्य शासन में वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैंकरा अपने अधिकारी कर्मचारियों के लिए कार्यालय भवन और वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में वे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे या निगम के अधिकारी कर्मचारी पूर्व की तरह ही टूटी फूटी जर्जर भवन और पेड़ों बेरियरों के नीचे से ही निगम कार्यालय का संचालन करते हैं।









