
नुआपड़ा(ODISHA)13 साल का एक आदिवासी बालक अपनी पढ़ाई पूरी करने रोज 100 कि.मी.आता जाता है …
कलेक्टर नुआपड़ा ने बालक छात्रावास को तीन दिन में शुरु करने का आदेश दिया।
(यात्रा के दौरान मिली एक खास खबर..)
15 अगस्त 2025 की पूर्व रात्रि को प्रसारित
(छ.ग.सृजन – डा. लाल बहादुर महांती – विशेष संवाददाता)
कुछ दिन पहले की बात है सावन में सोमवार के दिन नुआपड़ा जिला उड़ीसा स्थित पतोरा डेम में योगेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जा रहा था .. शाम के समय दिया बाती के जलते रास्ते के किनारे खड़ा स्कूल ड्रेस पहने एक बालक 🌝 ने हाथ से आगे ले जाने के लिए इशारा करते हुए लिफ्ट की मांग की .. मैंने बाइक धीरे से रोकी ..बैठाया और पूछा .
कहां जाओगे बेटा ..?
जवाब मिला – धरमबांधा ..
यहां से कितनी दूर होगा .. ?
यही कोई 8 कि मी ..
कहां पढ़ते हो .. ?
नेगीपाली-बिसोरा का आदर्श विद्यालय
वो तो बहुत दूर है ..
हां ! 50-60 कि मी ..
रोज आना जाना होता है ..
हां .. !
बहुत टाइम लगता होगा ..
हां ! सुबह 6 बजे घर से निकलता हूं
फिर घर आते आते 7-8 बजे रात हो जाता है .. लिफ्ट लेके आना या बस ही सहारा है ..
पिताजी क्या करते हैं .. ?
मकान बनाने वाला राजमिस्त्री
दिन भर इतना परिश्रम .. खर्चा .. ?
तब तुम पढ़ते कब हो .. ?
आते तक थक जाता हूं ..
अरे .. तुम बिमार पड़ जाओगे ..
तो पढ़ोगे कैसे ..?
उत्तर में – हां हूं !
बातचीत होते-होते घर आ जाता है ..
गरीब घर के होनहार बच्चों के लिए
आदर्श विद्यालय आशा की किरण है

मुक्ता रंजन के 43वर्षीय पिता पुनीत राम मांझी 12वीं पास हैं वहीं माता पुष्पा मांझी 7वीं तक पढ़ी हैं। अपने पुत्र के विषय में बात करते हुए कहते हैं -धरमबांधा के 25-26 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे पर एक अकेले मुक्ता रंजन ने ही बाजी मारी इसलिए आदर्श विद्यालय नेगीपाली के लिए चयन हुआ। इसमें गांव के टीचर खेलन राऊत ने बहुत गाइड का काम किया इस कारण वो छठवीं,सातवीं पास करके आज 8वीं में अध्ययनरत है।

प्रधानमंत्री आवास में रह रहे पिता पुनीत मांझी ने बताया कि वो राजमिस्त्री है और एक एकड़ में खेती करके गुज़र बसर करता है। मुक्ता के रूप में उनका एक ही संतान है।
रोज 100किमी की दूरी तय करके पढ़ाई जारी रखना क्या मुक्ता के लिए किसी यंत्रणा से कम नहीं है ? प्रश्न पर दोनों भौंहों में तान देते हुए पुनीत मांझी का कहना है .. सर जी,मैं मुक्ता को कहता हूं पास में कहीं पढ़ लें तो कहता है मैं नेगीपाली विद्यालय में ही पढ़ूंगा चाहे कुछ भी हो जाए। 6वीं में मैं स्कूल के पास बिसोरा गांव में और 7वीं में मोंगरापाली में व्यवस्था कराया था। कुछ महीनों बस से मंथली किराया में जाता था।
प्राइवेट स्कूलों में भारी फीस
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं
अभी मेरे को 100रु डेली का बस भाड़ा लग रहा है। क्या करें सर जी ! प्राइवेट स्कूलों के भारी फीस के चलते हम वहां पढ़ा नहीं सकते जबकि शासकीय स्कूलों में पढ़ाई नहीं के बराबर है ऐसे में गरीब घर के होनहार बच्चों के लिए ओडिशा सरकार द्वारा खोला गया आदर्श विद्यालय आशा की किरण है और प्रेरणा के श्रोत हैं।
पता चला है कि बिसोरा गांव में 4000रु महीना में प्राइवेट हास्टल खुला है पर हमारे इनकम के हिसाब से खर्चा नहीं कर सकते।
बालक छात्रावास बनकर तैयार
पर शुरू होने में समय लगेगा

हां ; नेगीपाली में बालक छात्रावास बन गया है।मेरा बेटा बोल रहा था पर अभी 3 महीना समय लगेगा .. वो यदि शुरू होता है तो सब आसान हो जाएगा चूंकि वहां रहना खाना शासन तरफ से फ्री रहेगा। मुक्ता रंजन की मां पुष्पा मांझी कहती है बेटा जब पढ़कर शाम-रात को घर सकुशल लौटता है तभी सुकून मिलता है और रात का खाना हम एकसाथ बैठकर खाते हैं,दिनभर का हाल-चाल भी पूछते हैं। किसी अनहोनी से निपटने और तत्काल सहायता के लिए हमने मुक्ता को दिया है मोबाइल – 99382 40214

धरमबांधा से 50किमी दूर
ओडिशा आदर्श विद्यालय
पड़ोसी प्रदेश छत्तीसगढ़ से मात्र 5किमी की सीमा से लगा हुआ है नुआपड़ा जिला का आदर्श विद्यालय ; जो अपनी अलग पहचान बना चुका है। कक्षा 6 से 12 तक CBSC पैटर्न पर वर्ष 2016 में स्थापित विद्यालय ने अच्छी शिक्षा व्यवस्था के चलते 9वें वर्ष में पूरे जिले में पहली पायदान पर है।

अंजू फ्रूट्स के संचालक-गोविंद चंन्द्र साहू
नुआपड़ा निवासी गोविंद चंन्द्र साहू का कहना है की आदर्श विद्यालय नेंगीपाली जाने के लिए दूरी और वाहन का समायोजन नहीं हो पाने के कारण की बच्चे स्कूल में पढ़ने से वंचित हो गए हैं 680 सीट वाले विद्यालय में प्रवेश पाने के बाद भी कई विद्यार्थी पढ़ने नहीं आ पाये इसका मुख्य कारण ज्यादा दूरी या ठीक टाइम पर स्कूल से आने जाने के लिए वाहन का उपलब्ध नहीं हो पाना है।

सभी टीचर्स एक दूसरे पर फोकस
रखते हैं इसलिए बेहतर रिजल्ट है
नेगीपाली आदर्श विद्यालय के प्रिंसिपल श्री खृष्टीभूषण बिस्वाल ने एक मुलाक़ात में बताया शिक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए वे हर समय सजग रहते हैं और मानीटरिंग करते रहते हैं।बच्चों के पैरेंट्स के मार्गदर्शन को भी ध्यान में रखा जाता है इसलिए पूरे जिले में 10वीं और 12वीं में शत् प्रतिशत रिजल्ट आया है। आपने छत्तीसगढ़ से यहां आकर एक पत्रकार के नाते हमारे विद्यालय में पढ़ रहे मुक्ता रंजन मांझी से आमना-सामना करवाया है।मैं आपसे वादा करता हूं बालक छात्रावास खुलते ही इसे पहले नं पर प्रवेश दिया जाएगा।

यहां पदस्थ अर्थशास्त्र के शिक्षक आशू भोई और कामर्स के शिक्षक अभिजीत पात्रो ने बातचीत के दौरान बताया -अभी यहां 662 छात्र-छात्राएं हैं। इंग्लिश मीडियम में दिन में 10 से 4 बजे तक पढ़ाई होती है।खेल,संगीत,भाषण, चित्रकला पर भी ध्यान दिया जाता है।वहीं विज्ञान सहायक बिंदुसागर प्रधान ने बताया दूर से आने वाली बालिकाओं के लिए 100 सीटर छात्रावास है,ये 2022 से शुरू है जबकि बालकों का छात्रावास बनकर रेडी हो गया है। 🌝 अब देखो कब तक शुरु होता है ..

छत्तीसगढ़ की भाषा और संस्कृति
से ओत-प्रोत है नुआपड़ा जिला
सीमा से लगे होने के कारण ओडिशा का नुआपड़ा जिला आम बोलचाल मैं छत्तीसगढ़ीभाषा,रीति-रिवाजऔर परम्परा से ओत-प्रोत है। जिला के दक्षिण भाग में सीमा से लगा नेगीपाली आदर्श विद्यालय हैं वहीं दूसरी ओरद सुनाबेड़ा अभयारण्य के घनघोर पहाड़ी जंगलों से घिरा ग्राम पंचायत धरमबांधा है।

मैं पढ़ लिखकर डाक्टर बनना
चाहता हूं – मुक्ता रंजन मांझी
बेहद शांत और सरल स्वभाव के 13 वर्षीय इस आदिवासी बालक का सपना डॉक्टर बनना है।पढ़ाई के प्रति अटूट रुझान को देखते हुए हक़ीक़त साझा करने का मौका मुझे दो बार मिला जब वो लिफ्ट देकर घर तक पहुंचाया गया। मुक्ता कहता है विद्यालय में सभी विषयों की पढ़ाई ठीक है।दोपहर के भोजन में अंडा सहित चावल,दाल,बड़ी व अन्य खाना सब फ्री में मिलता है।

बालकों का छात्रावास तुरंत शुरू कराया जाएगा – कलेक्टर दास
नुआपड़ा जिला में पदस्थ कलेक्टर एवं आदर्श विद्यालय के अध्यक्ष श्री मधुसूदन दास (IAS) से उनके कार्यालय में बातचीत हुई। तुरंत प्रिंसिपल एवं चीफ इंजीनियर को फोन में आदेश देकर 15अगस्त के ठीक बाद बालक छात्रावास को शुरू करने को कहा। यह भी कहा कि धरमबांधा से आने वाला छात्र मुक्ता रंजन मांझी को पहले सीट मिलेगी और पढ़ाई-लिखाई का पूरा ध्यान रखा जाएगा।एक फोटो साझा करते हुए मुझे इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि पड़ोसी जिले महासमुंद(छ.ग.) से आकर शिक्षा के लिए समर्पित एक बालक के लिए आप सार्थक प्रयास कर रहे हैं। धन्यवाद।







