Post: भ्रष्ट पंचायत सचिवो को संरक्षण देने के आरोपो में घिरे सीईओ एस.आलोक हटाए गए। नंदनवार के पदस्थापना से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप।

भ्रष्ट पंचायत सचिवो को संरक्षण देने के आरोपो में घिरे सीईओ एस.आलोक हटाए गए। नंदनवार के पदस्थापना से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप।

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महासमुन्द।छ.ग.सृजन छत्तीसगढ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिनांक 29 जुलाई को जारी आदेश के तहत हेमंत रमेश नंदनवार(आइएएस) को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला महासमुन्द के पद पर पदस्थ किया गया है। श्री नंदनवार की नियुक्ति ऐसे समय मे की गई है, जब पूर्व सीईओ सच्चिदानंद आलोक के कार्यकाल पर कई प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।

पूर्व सीईओ एस. आलोक को 25 अक्टुबर 2021 को दुर्ग से महासमुन्द में अस्थायी रूप से सीईओ पद का दायित्व सौंपा गया था। वे महासमुन्द में सबसे अधिक समय तक पदस्थ रहने वाले सीईओ माने जाते है।

मालूम हो कि एस.आलोक के कार्यकाल में कई पंचायत सचिवो पर भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप सामने आए, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नही हुई। दुरूगपाली बसना ब्लाक के पंचायत सचिव महेश ओगरे का शिकायत पर जांच में दोषी पाए जाने के बाद केवल चेतावनी पत्र देकर मामला दबा दिया गया। मंत्रालय स्तर पर दोबारा शिकायत के बाद एक वार्षिक वेतनवृद्वि असंचयी प्रभाव से रोकी गई। पिथौरा ब्लाक की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर सचिव कुन्ती आवडे ने स्थानातंरण के बाद शासकीय रिकार्ड अगले सचिव मुरलीधर साव को नही सौंपे, जिसकी पुष्टि के बाबजूद कोई कार्रवाई नही की गई। बिजेमाल ग्राम पंचायत के सचिव नरेन्द्र वैष्णव निलंबन के बाद भी अभिलेखो को हस्तातंरित नही किये। जांच में पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नही की गई। बसना ब्लाक के जगत पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) योजना में वित्तीय गडबडी, रोकड बही बिल बाउचर सहित दस्तावेज गायब पाए गए, फिर भी एफआइआर तक दर्ज नही कराई गई। पिथौरा ब्लाक के लाखागढ पंचायत में गोठान मामले में वित्तीय गडबडी की शिकायत मिली। जांच में दोषी सिद्व होने के बाबजूद जांच को दोहराकर मामले को लीपापोती कर बंद कर दिया गया। इससे ग्रामीण महिलाएं ने एस. आलोक को चूडी बिन्दी भेंट करने सुशासन शिविर में पहुंची थी।

नवपदस्थ सीईओ हेमंत रमेश नंदनवार से जिले की पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता, कर्तव्यनिष्ठा और भ्रष्टाचार पर अंकुश की उम्मीद की जा रही है।

इन सभी गंभीर मामलों की शिकायतें आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास द्वारा पहले छत्तीसगढ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग और क्रमशः पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पंचायत मंत्री विजय शर्मा और प्रमुख सचिव निहारिका बारीक को भेजी गई।

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