Post: सुशासन तिहार“ में मत्स्य विभाग की योजना से लाभान्वित हुए  टिकेश्वर एवं गंगाबाई’।

सुशासन तिहार“ में मत्स्य विभाग की योजना से लाभान्वित हुए  टिकेश्वर एवं गंगाबाई’।

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महासमुंद(छ.ग.सृजन)25 अप्रैल 2025/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आमजन तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित करने हेतु प्रारंभ किए गए “सुशासन तिहार“ अभियान का सकारात्मक प्रभाव जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भी देखने को मिल रहा है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है, बल्कि उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन भी आ रहा है।

शासन की योजनाओं का लाभ जब ज़मीनी स्तर तक पहुंचता है, तभी उसका असली उद्देश्य पूर्ण होता है। सिंघनपुर के श्री टिकेश्वर सतनामी की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जिन्हें मत्स्य विभाग की फुटकर मत्स्य विक्रय योजना के तहत आइसबॉक्स प्रदान किया गया। इस सहयोग ने उनके मछली व्यवसाय को नई दिशा दी और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया। टिकेश्वर ने बताया कि मछली विक्रय के दौरान ताजगी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन विभाग द्वारा प्रदत्त आइसबॉक्स से अब वे मछलियों को लंबे समय तक संरक्षित रख पाएंगे। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि उनके व्यवसाय में स्थायित्व भी आएगा।
टिकेश्वर बताते हैं, कि“पहले मछलियों को जल्दी बेचना पड़ता था, वरना खराब होने का डर रहता था। अब आइसबॉक्स की मदद से मैं मछलियों को दूर के बाजारों तक भी अच्छे हालत में बेच पाऊंगा। इससे मेरी आमदनी भी बढ़ेगी।


इसी प्रकार से ग्राम गोड़पाली की निवासी श्रीमती गंगाबाई निषाद ने मछली पकड़ने के लिए जाल प्रदान करने हेतु आवेदन किया था। उनके इस आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग द्वारा उन्हें “मत्स्यपालन प्रसार योजना“ के अंतर्गत मछली पकड़ने हेतु जाल उपलब्ध कराया गया। गंगाबाई निषाद लंबे समय से मछली पालन के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करती आ रही हैं। अब जाल प्राप्त होने से उन्हें अपनी आजीविका को और सुदृढ़ करने का अवसर मिला है। यह सहायता उनके लिए आर्थिक संबल बनेगी।
टिकेश्वर एवं गंगाबाई ने शासन और विभाग के प्रति आभार जताते हुए कहा कि “सुशासन तिहार“ जैसे अभियान न केवल योजनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि आमजन को उनमें भागीदार बनाकर सशक्त भी करते हैं। मत्स्य विभाग का उद्देश्य भी यही है, गांवों में स्वरोजगार को बढ़ावा देकर ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।

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