
पिथौरा/(छ.ग.सृजन) वैसे तो महासमुंद वन मंडल मे डीएफओ पंकज सिंह राजपूत के पद स्थापना के बाद महासमुंद वनमंडल में सहज प्राकृतिक पुनर्जनन कार्य,नरवा विकास योजना,वृक्ष संपदा योजना,लैंटना उन्मूलन योजना,कूप कटाई,प्लांटेशन में, केंद्रीय रोपणीयों में,अस्थाई सिंचित एवं असिंचित रोपणीयों में,शासकीय योजनाओं में अपरिमित अनियमिता कर वनों की जमकर दुर्दशा किया गया हैं।बात वनों की अवैध कटाई की करें तो एक लंबी फेहरिस्त है जिसमें पिथौरा वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई के अनेक चर्चित मामले हैं जिसमें लोहरिन डोंगरी, बुंदेली गिरना,सुखीपाली,जम्हर,खपराखोल, किशनपुर,में वन संपदा के अंधाधुंध दोहन से वन्य प्राणी एवं वनों के अस्तित्व पर संकट खड़ी हो गई है,
बागबाहरा वन अमले को काफी इंतजार करना पड़ा था काफी विलंब से पहुंचे थे डीएफओ पंकज राजपूत

बीते दिनों खल्लारी के कक्ष क्रं 182 में शिकारीयों द्वारा बिछाए विद्युत तार की चपेट से मृत पड़े बायसन
बागबाहरा व पिथौरा वन परिक्षेत्र के वनों में वन्य प्राणियों के लगातार हो रहे शिकार से डीएफओ पंकज सिंह राजपूत के कार्यशैली और उनके कार्य क्षमता की पोल पट्टी खुल गई हैं

बीते दिनों खल्लारी के कक्ष क्रं.182 में शिकारियों द्वारा बिछाए गए हाइटेंशन विद्युत तार की चपेट से मृत तेंदुआ,

पिथौरा वन परिक्षेत्र के बुंदेली के वन कक्ष 221 में मृत पड़े हिरण
जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र क्षेत्र पिथौरा के बुंदेली कक्ष क्रं.221 में शिकारियों द्वारा जहर देकर जहर खुरानी से वन्य प्राणियों को मारा गया है जिसके चपेट से एक मवेशी भी मारा गया।
पर्याप्त रात्रि गस्त नहीं होने से वन्य अपराधियों के कब्जे में रहता है पूरा जंगल।
रात्रि गस्त के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
शिकारी को अवैध शिकार के लिए सैकड़ो मीटर के हाई टेंशन विद्युत तार को बिछाने में खुद के जान को खतरा होता है बावजूद सावधानी से वे घंटों तक विद्युत तार बिछाने में सफल हो जाते हैं .? वन विभाग का गश्ती दल कहां रहता है संबंधित क्षेत्र के वनरक्षक डीप्टीरेंजर की भूमिका संदेहास्पद
रात्रि में वन विभाग की नाइट गस्ती दल चीर निद्रा में रहता है और शिकारी जंगल में शिकार के लिए जागता है

पिथौरा वन परिक्षेत्र के बुंदेली के वन कक्ष 220 में मृत पड़े मवेशी
सर्व विदित है कि महासमुंद वनमंडल के छोटे कर्मचारी डीएफओ के तानाशाही व पक्षपात पूर्ण रवैया से पीड़ित हैं महासमुंद मंडल में वन संरक्षण संवर्धन और वन प्राणियों की सुरक्षा नहीं के बराबर है बीते दो तीन दिन में बागबाहरा के खल्लारी के कक्ष 182 मे शिकारियों के बिछाए हाई टेंशनविद्युत तार की चपेट से एक वयस्क बायसन एवं एक तेंदुआ(बुंदी बाघ) की मौत हो गई दूसरे दिन पिथौरा वन परिक्षेत्र के बुंदेली वन कक्ष 221 में शिकारीयों द्वारा दिए गए जहर खुरानी से एक हिरण और एक मवेशी के मौत ने पूरे वनमंडल में वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा की बड़े-बड़े दावे करने वाले डीएफओ की घटिया कार्यशैली का प्रत्यक्ष प्रमाण है महासमुंद वनमंडल में अवैध कटाई अवैध शिकार के साथ शासन की वन संरक्षण संवर्धन की अनेक योजनाए संचालित है जिनमें जमकर अनियमितता एवं बिना निर्माण कार्य के शासकीय धनराशियों का फर्जी आहरण कर पूरे महासमुंद वनमंडल को लूटा जा रहा है

डीएफओ पंकज सिंह राजपूत की इस कार्यशैली को पूरा छत्तीसगढ़ जानता है। बीते कुछ वर्षों में जिले में अनेक कलेक्टर एसपी बदल दिए गए परंतु डीएफओ पंकज राजपूत में ऐसा क्या है की वन मुख्यालय अरण्य भवन में बैठे प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही श्रीनिवास राव को इनका पद स्थापना वर्ष नहीं दिखता है ना ही राज्य सरकार को दिखता है ऐसा लगता पंकज राजपूत को महासमुंद वनमंडल को वर्षों तक लूटते रहने के लिए ही भेजा गया है और यह बात ग़लत नहीं होगा की आज महासमुंद वनमंडल में वनों एवं वन्य प्राणियों की जो दुर्दशा हो रहा है उनका मुख्य जिम्मेदार अगर कोई है तो वह डीएफओ पंकज सिंह राजपूत हैं।
सत्यमेव जयते







