
पिथौरा।(छ.ग.सृजन)हजारों एकड जमीनों का हेरफेर करके धोखाधड़ी और दलाली के साम्राज्य में अपना वर्चस्व स्थापित करने वाले मास्टर माइंड लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ऊर्फ ” फन्नू सेठ ” को जिला न्यायालय महासमुंद से 2 दिन की पुलिस रिमांड में थाना लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई। लुका-छिपी का खेल कर फरार होने में माहिर लक्ष्मीनारायण को 70वें वर्ष मे पहली बार गिरफ्तार करके जेल दाखिल करवाने के कारण – चर्चाओं के शीर्ष स्थान पर रेटिंग के चलते थाना प्रभारी विनोद कश्यप ने वो सभी बातें उगलवाने में सफल हो गये जिसके आधार पर बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कर चालान पेश किया जा सके। एस पी आशुतोष सिंह के निर्देश पर की गई सभी कार्यवाहियों का राज यह है कि शासकीय और आदिवासियों की जमीनों में कलेक्टर का फर्जी मंंजूरी आदेश लगाकर ठगी और धोखाधड़ी के माध्यम से कानून के साथ दुस्साहसपूर्ण खिलवाड़ करना और रुपया कमाना है।
1st क्लास एसी में रहने वाले का जेल और कस्टडी में हुआ बुरा हाल

.मुझे मालूम नहीं था कि जिला जेल से लक्ष्मीनारायण अग्रवाल एवं मुकेश अग्रवाल दोनों को दो दिन की पुलिस रिमांड में पटेवा थाना लाया गया है।गत 5 फरवरी को दोप 4 बजा था। महासमुंद एस पी से मुलाक़ात कर वापसी मे मैं श्री कश्यप जी से कुछ बातें करते हुए जैसे ही पटेवा थाना पहुंचा ????️
देखता हूं – लक्ष्मीनारायण और मुकेश दोनों बैठे हैं .. मैं थोड़ा ठिठका और अपने को अंदर जाने से रोक लिया .. तभी .. £ ..
फन्नू ने कहा – और लाल ????
मैंने कहा – सेठ जी नमस्कार ???? कैसे हो ?
फन्नू – देख तो रहा है बुरा हाल ????
थाना – ये कस्टडी है ..⛓️.. जी सर !
(अचानक 1मिनट के भेंट के बाद मैं पिथौरा आ गया)
रीडर भगतराम रात्रे ने हालांकि जेल जाने से पहले आत्महत्या कर ली थी,परंतु उसकी जालसाजी का पता तब चला जब उसने स्वयं अनुसूचित जाति का होकर अपने शिक्षक पुत्र मिथिलेश रात्रे को गोंड आदिवासी(अनुसूचित जनजाति )का बनाकर जमीन रजिस्टी कराई और वही हाल पत्नी गणेशिया बाई का था , दोनों जेल गए थे केरामुड़ा झलप की जमीन मामले में । एक मुलाक़ात में उसके पुत्र ने कहा था कि इस रजिस्टी में लक्ष्मीनारायण आदमी लाया था , नाम अलग था और फोटो अलग था
आदिवासी फर्जी मंजूरी / डायवर्सन
फून्नू के बांये हाथ का खेल है …

कलेक्टर फर्जी मंजूरी आदेश दि 10.05.2006
लक्ष्मीनारायण ने खरीद कर बेच दी

राजस्व विभाग के समानांतर सरकार चलाने में माहिर लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने 40 साल तक पूरे जोर से जमीन का गोरखधंधा किया। सिर्फ कलेक्टर को छोड़कर एसडीएम,तहसीलदार,आरआई, पटवारीगण चपरासी और ड्रायवर उसके एक इशारे पर हाजरी लगाते थे ,वो इतना विश्वासनीय हो गया था कि बाबू लोग मंंजूरी की फाइल को ” फून्नू ” के माध्यम से कलेक्ट्रेट पहुंच वाते थे .. रजिस्ट्रार उसके घर रजिस्टी करने आते थे .. फोरलेन का मुआवजा उसकी मर्जी से बनता था .. तभी तो फर्जी मंजूरी का ” फन्नू ” सुपर स्टार बन सका और बदले में रिश्तेदार,नेता,व्यापारी,पत्रकार,कर्मचारी,किसान,मजदूर,गरीब,धनवान सभी की आंखो का किरकिरी बन गया।
अभी जो जांच नहीं हुआ है वैसा कलेक्टर का फर्जी मंजूरी से 73 आदेश और 215 एकड जमीन के साक्ष्य दस्तावेज,आदिवासी के फर्जी डायवर्शन के 390 प्लाट ,शासकीय जमीनों को सीधे रजिस्टी मालिक बनकर खरीदी बिक्री के रिकार्ड छत्तीसगढ सृजन के पास मौजूद हैं जिसको समय ⌚ पर प्रकाशित किया जायेगा जिनकी लाभ के हिसाब से बाज़ार दर 50 करोड के पार हैं।






