
संपादक-लोचन कुमार चौहान
सुकमा।(छ.ग.सृजन) छत्तीसगढ़ के सुदूर एवं आदिवासी बहुलता वाले सुकमा वनमंडल में तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरण में भारी आर्थिक गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जिसमें वर्ष 2021 और 2022 में तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले संग्राहकों को दिए जाने वाले बोनस की राशि में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगा है। जांच में प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाए जाने पर सुकमा के वन मंडलाधिकारी (DFO) एवं लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अशोक कुमार पटेल को निलंबित कर दिया गया है।
किस तरह दिया गया घोटाला को अंजाम
सुकमा वनमंडल के तहत वर्ष 2021 और 2022 के कालखंड में तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले गरीब आदिवासी संग्राहकों को बोनस राशि के रूप में शासन द्वारा 6 करोड़ 54 लाख 71 हजार रुपये वितरित किए जाने थे। लेकिन विभाग के प्रारंभिक जांच में पता चला कि इस बोनस राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।
छ.ग.शासन के आंखों में धुल झोंकने के लिए बोनस वितरण करते हुए फोटो खिंचवाकर फोटोबाजी का खेल खेली गई।
जांच में यह भी सामने आया कि जब उच्च स्तरीय टीम सत्यापन के लिए पहुंची, तो गड़बड़ी को छिपाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में बोनस राशि का वितरण शुरू कर दिया और फोटो खिंचवाकर जांच दल को गुमराह करने का प्रयास किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार अप्रैल 2024 में नगद खाते के माध्यम से संग्राहकों को बोनस राशि वितरित की जानी थी। लेकिन वास्तविक वितरण संदेह के घेरे में आ गया। बताया जा रहा है कि कई संग्राहकों को उनकी वास्तविक राशि नहीं मिली, जबकि कागजों में उनके नाम पर वितरण दर्शा दिया गया।


स्थानीय स्तर पर भी यह शिकायतें थीं कि कई इलाकों में तेंदूपत्ता बोनस का भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन कागजों में सब कुछ सही दिखाया गया। संग्राहकों से संपर्क करने पर सामने आया कि उन्हें उनकी मेहनत की पूरी राशि नहीं मिली।
