Post: बगैर मान्यता पाए निजी स्कूल संचालित,जांच के बजाए लुका-छिपी खेल रहे हैं अधिकारी।

बगैर मान्यता पाए निजी स्कूल संचालित,जांच के बजाए लुका-छिपी खेल रहे हैं अधिकारी।

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महासमुंद(छ.ग.सृजन)।शिक्षा विभाग से बगैर मान्यता पाये बकायदा निजी स्कूल संचालित है। जिसकी पूर्ण जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को भी है। लेकिन इन्होने इस अवैध स्कूल को बंद कराने का पुख्ता कोशिश नही किया है। बल्कि बच्चो का सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड करने में मूक समर्थक बने है। इस निजी स्कूल की शिकायत होने व जांच का आदेश पाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियो के हाथ कांप रहे है। संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग रायपुर से इस मामले में 03 बार नोटिस भी जारी हो चुका है। लेकिन इनकें कान में अभी तक जूं नही रेंग रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरा ब्लाक में ए.के.स्मार्ट इंग्लिश मिडियम स्कूल बिजेमाल में संचालित है। जिसको शिक्षा विभाग से स्कूल संचालित करने के लिए विधिसम्मत मान्यता प्राप्त नही हुआ है। जिसका आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने 19 मार्च 2024 को आयुक्त रायपुर संभाग रायपुर एवं संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग रायपुर को सप्रमाण लिखित शिकायत किया। जिस पर संभागीय संयुक्त संचालक ने 26 मार्च 2024 को एम.आर.सावंत जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द एवं एम.जी.सतीश नायर सहायक संचालक को जांचकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है। इन दोनो को 07 दिवस में जांच प्रतिवेदन अभिमत सहित प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

जांचकर्ता अधिकारियो ने जांच नही करके टाइम पास किये। शिकायतकर्ता ने दोबारा शिकायत किया। जिससे इन दोनो जांचकर्ता अधिकरियो को संभागीय संयुक्त संचालक ने 27 जुलाई 2024 को फिर से नोटिस जारी किया। इन दोनो जांचकर्ता अधिकारियो ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन नही किये। जिससे नाराज होकर संभागीय संयुक्त संचालक ने 09 सितम्बर 2024 को इन्हे तीसरी बार नोटिस जारी करके तत्काल जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यहां बताना जरूरी है कि बगैर मान्यता के स्कूल संचालन करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के घोर विपरीत है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द की उदासीनता एवं मिलीभगत से बिना मान्यता पाये भी निजी स्कूल चला रहे है। आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने इन दोनो जांचकर्ता अधिकारियो के विरूद्व भी दण्डात्मक कार्यवाही के लिए प्रस्ताव बनाकर शिक्षा संचिव स्कूल शिक्षा विभाग को भेजने की मांग किया है। चर्चा है कि जिले में ऐसे और कितने स्कूल संचालित होंगे। जिनके पास मान्यता नही है।

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