
मनेंद्रगढ़ (MCB) (छ.ग.सृजन)। जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत लालपुर के सरपंच महेंद्र सिंह की शिकायत पर अम्बिकापुर एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने जनपद के बाबू सत्येंद्र सिन्हा को 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई दोपहर करीब 1 बजे की गई, जब एसीबी की टीम ने कार्यालय में दबिश दी। तीन घंटे की पूछताछ के बाद बाबू को हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी की जा रही है। इस खबर ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया और जनपद पंचायत के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय पुलिस बल भी बुलाना पड़ा।

निर्माण कार्य के बाद मांगी थी रिश्वत
ग्राम पंचायत लालपुर में हुए निर्माण कार्य के बाद शेष राशि की अदायगी के लिए बाबू ने सरपंच से 19 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। सरपंच महेंद्र सिंह इस भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हो गए और रिश्वत देने के बजाय एसीबी से संपर्क किया। सरपंच ने 2 सितंबर को एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
एसीबी का बयान
एसीबी के उप पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार खेस ने बताया कि 2019-20 में ग्राम पंचायत लालपुर में सीसी रोड और निर्मला घाट निर्माण योजना के तहत 5 लाख रुपये जनपद पंचायत और 2 लाख 60 हजार रुपये जिला पंचायत से स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद शेष राशि 3 लाख 30 हजार रुपये जनपद पंचायत से और 1 लाख 44 हजार रुपये जिला पंचायत से मिलना बाकी था। बाबू सत्येंद्र सिन्हा ने इसी राशि में से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सरपंच ने इसे देने से इनकार करते हुए एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद, 19 हजार रुपये की रिश्वत की सहमति मिलने पर एसीबी ने जाल बिछाकर बाबू को रंगे हाथ पकड़ लिया।
पूर्व में निर्वाचन आयोग में भी हो चुकी शिकायत
रिश्वत के सबूत हुए पुख्ता
एसीबी टीम ने बताया कि जांच के दौरान रिश्वत की रकम और सत्येंद्र सिन्हा के हाथों में गुलाबी रंग आने से पुष्टि हो गई कि उसने रिश्वत ली थी। कुल 12,480 रुपये भी बरामद किए गए और आरोपी का पैंट भी जब्त कर लिया गया है। यह रिश्वत निर्माण कार्य के कमीशन के रूप में मांगी गई थी।
प्रमोद कुमार खेस, उप पुलिस अधीक्षक (एसीबी)
सतेंद्र सिन्हा वही मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के वही कर्मचारी है जिनकी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के पहले इनकी मुख्य निर्वाचन आयोग को इनको हटाने के लिये शिकायत की जा चुकी थी लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा इनको नही हटाया गया जिसका परिणाम सामने आया सतेंद्र सिन्हा लगातार 15 वर्षो से ज्यादा एक ही जगह और एक ही विभाग में खूटा गाड़ के बैठे हुये थे सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला है कि इनके द्वारा लगातार सरपंच और सचिवों द्वारा पैसे की मांग की जा रही थी इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग के संज्ञान में डाली जा चुकी थी!













