Post: वन परिक्षेत्र पिथौरा के कोटादादर में हुई एक “हिरण की संदेहास्पद मौत”।

वन परिक्षेत्र पिथौरा के कोटादादर में हुई एक “हिरण की संदेहास्पद मौत”।

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गंभीर रुप से घायल हिरण के पिछले टांग पर चोंट के निशान

पिथौरा-लोचन चौहान/छत्तीसगढ़ सृजन 9/04/2024 -महासमुंद वनमंडल क्षेत्र के वनों मे आए दिन वन्य प्राणियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है वैसे प्रकृति ने महासमुंद वन मंडल को विभिन्न मिश्रित प्रजाति के बहुमूल्य वनस्पतियों एवं जीव जन्तुओं से अच्छादित किया है लेकिन वन मंडल महासमुंद की लचर व भक्षकीय सिस्टम ने वनों व वन्य प्राणियों को निगलते जा रहा है कहे तो ग़लत नहीं होगा, ऐसे ही एक घटना आज वन परिक्षेत्र पिथौरा में घटी जोकि आज शाम एक गंभीर रुप से घायल हिरण दर्द से बिलखते हुए कक्ष क्रं.218 से निकल कर ग्राम कोटादादर के रिहायशी बस्ती के समीप आकर गिर पड़ी,ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची परंतु गंभीर रूप से घायल हिरण को बचाने में असफल रहा।

गंभीर रुप से घायल पड़ी हिरण के गर्दन पर चोंट के निशान

प्राप्त जानकारी अनुसार वन विभाग की टीम काफी विलंब से मौके पर पहुंची और आनन फानन में घायल हिरण को घटनास्थल से 10 किलोमीटर दूर पिथौरा इलाज हेतू ले जाने की जुगत में लगी थी वन विभाग के काफी विलंब से पहुंचने व समय पर इलाज नहीं होने के कारण गंभीर रुप से घायल हिरण मौके पर ही असमय मृत्यु के गाल में समा गई। सूचना मिलने पर इस पूरे घटना क्रम के संबंध में जब “छत्तीसगढ़ सृजन” समाचार पत्र की टीम ने फोन पर रेंजर मोतीराम साहू व डीप्टी रेंजर छबिराम साहू से जानकारी मांगी तो उन्होंने जवाब में बताया की हिरण के गर्दन और पीछे की टांग पर लगी गंभीर चोंट जंगल में दो हिरण आपस में लड़ने से होना बताया गया, परंतु ग्रामीण और प्रत्यक्ष दर्शियों में यह चर्चा का विषय बना रहा की गंभीर रुप से घायल हिरण की गर्दन और पीछे की टांग पर लगी गंभीर चोंट के निशान को देखने से सामान्य तीर कमान या विद्युत करंट की चपेट में आने से घायल होने जैसे प्रतित व दर्शित है गंभीर रुप से घायल हालत में संदेहास्पद हुई मौत की जानकारी चाही गई तो उन्होंने जवाब में वही जवाब बताया की जंगल में दो हिरण आपस में लड़ने से उनके सिंग से गंभीर चोंट लगने की बात कही जैसे विभाग के अधिकारी कर्मचारी खुद जंगल में लड़ रहे हिरण को प्रत्यक्ष आंखों से देखे हों और खुद ही पोस्टमार्टम करने वाले फॉरेंसिक अधिकारी बन गए हो। अब सवाल यह उठता है की क्या प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों की धनराशि वन विभाग के बजट में से वन्य प्राणियों की सुरक्षा और संवर्धन के नाम पर खर्च की जाती है क्या अलग-अलग वन परीक्षेत्रों में हर वर्ष खर्च किए जाने वाले लाखों करोड़ों की धनराशि का पर्याप्त लाभ वन्य प्राणियों मिलता है या वन विभाग के बड़े बड़े अफसर जो एयरकंडीशन से युक्त वातानुकूलित गद्दी पर बैठे दो पैरों के अराम फरामोस प्राणियों को ज्यादा लाभ मिलने की बू आ रही है।

मृत हिरण का डाक्टरों से पोस्टमार्टम करवाते वन अधिकारी
मृत हिरण को जलाते वन अधिकारी गण
भूषण लाल साहू
संचालक- BK फैमिली रेस्टोरेंट पिथौरा
कमलेश बारीक
संचालक- BK फैमिली रेस्टोरेंट पिथौरा

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