
महासमुंद/ जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक -353 से सिर्फ साढ़े 3 किलोमीटर अंदर बसा खल्लारी विधानसभा का ग्राम पंचायत मरार कसहीबाहरा का आश्रित गांव पड़कीपाली आज भी विकास को तरस रहा है। छत्तीसगढ़ बने 25 साल हो गए। प्रदेश ने अब तक जनता के विकास के लिए 4 मुख्यमंत्री दे चुके हैं। लेकिन यहां 90 प्रतिशत वाली आदिवासी गांव तक एक पक्की सड़क नहीं बन पाई। वहीं इस गांव के लिए सबसे बड़ा संकट है तो कमरौद और पड़कीपाली के बीच नंदी नाला में पुल नहीं होने से बारिश में पूरा गांव टापू बन जाता है। 400 की आबादी वाले इस गांव में 5वीं तक ही स्कूल है। 141 से ज्यादा बच्चे रोज जान हथेली पर लेकर उफनता नाला पार कर कमरौद पढ़ने जाते हैं। कई बार पानी बढ़ने से स्कूल ही बंद हो जाता है। बीमार पड़ने पर हालत और भयावह है। सड़क नहीं होने से 108, 102 और 112 जैसी आपात सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं। मरीजों को चारपाई पर 3 किलोमीटर तक ढोकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।
ग्राम पंचायत मुख्यालय मरार कसहीबाहरा में विधानसभा स्तरीय भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान चुनावी वर्ष में तात्कालीन सीएम भूपेश बघेल ने सड़क और पुल की घोषणा की थी। किन्तु सरकार बदली तो घोषणा भी कागजों में रह गई। आज आलम ये है कि राशन लेने मरार कसहीबाहरा, धान बेचने चरौदा और वोट डालने ओकारबंद जाने के लिए भी ग्रामीणों को कीचड़ भरी पगडंडी और खराब सड़क पार करनी पड़ती है। नाराज युवाओं ने इंस्टाग्राम पर “पड़कीपाली सड़क बनाओ” नाम से अभियान भी शुरू किया है। गांव में अब तक पक्की सड़क व नालों में पुल नहीं होने से ग्रामीण व यहां के युवाओं ने क्षेत्रीय विधायक और सांसद से काफी नाराज़ चल रहे हैं। वहीं समस्याओं पर युवाओं के इंस्टाग्राम आईडी प्लेटफॉर्म में अपलोड विडियों से जनआक्रोश के रूप में नाराजगी देख जा सकता है।
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ग्रामीणों ने यहां एक समय में खुद बनाया था, लकड़ी का पुल
छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद ग्रामीणों में उम्मीद तो बनी लेकिन गांव तक पक्की सड़क और मार्ग के नाले में पुल का भी निर्माण नहीं हुआ। तब ग्रामीणों ने पहले लकड़ी का जुगाड़ू पुल बनाया। जिससे बरसात में उसका उपयोग हो जाता था। किन्तु वह भी अस्थाई व्यवस्था कुछ समय के लिए ही रहा है। फिर शासन प्रशासन से कुछ नहीं हुआ तब स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणजन ने सन् 2015 में श्रमदान कर 40 फीट का छोटा पुल बनाया, जिससे बाइक व सायंकाल निकलने लगी। वहीं फिर सन् 2025 में ग्रामीणजनों की भारी तत्कालिफ व समस्या को करीब से महसूस कर स्वपेश्वरी वन दुर्गा वेलफेयर फाउंडेशन ने वहीं उसी दुहानी नाले पर बड़ा पुल बनाया, तब जाकर थोड़ी राहत मिली। लेकिन मुख्य नंदी नाले और मुख्य मार्ग आज भी जस के तस हैं। इस लिए तो ग्रामीणों का कहना है – “जहां कार नहीं पहुंचती, वहां सरकार भी नहीं पहुंचती।चेतावनी – सड़क नहीं तो वोट नहीं
पड़कीपाली के ग्रामीण भागवत प्रसाद ध्रुव, थानसिंग यादव, भुनेश निषाद, एवन ध्रुव सहित आदि ग्रामीणजनों ने बताया कि भविष्य में अगर जल्द सड़क और नंदी नाले में पुल नहीं बना, तो आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की रणनीति बनाई जाएगी। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव के समय चुनाव बहिष्कार की पुरी तैयारी थी। किन्तु प्रशासनिक अधिकारीयों के समझाईस और आश्वासन पर गांव में चुनाव बहिष्कार निरस्त हो गये थे। इसके बाद भी गांव के मतदाताओं ने पुरी ईमानदार से चुनाव में वोट डाले, लेकिन सड़क और पुल निर्माण की आश्वासन फिर एक बार झुठी साबित हो गई। इस तरह से हर बार गांव के लोग छले जाते हैं।
यहां आंगनबाड़ी भवन भी पिछले कुछ वर्षों से जर्जर हो चुकी है। जिसके चलते आंगनबाड़ी अन्य दुसरे भवन में संचालित हो रही है। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए ग्रामीणों को दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और पुल बन जाए तो न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास की राह भी खुलेगी। वहीं ग्रामीणजनों का मानना है कि साढ़े तीन किलोमीटर सड़क और पुल का निर्माण केवल सुविधा का नहीं, बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी सवाल है।



























