
बलौदाबाजार 29.09.2026 वैसे तो बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में वन्य प्राणियों के अवैध शिकार कर उनके मांस की अवैध कारोबार की खबरें हमेशा सुर्खियां बटोरती रही है हाल ही में बलौदाबाजार वनमंडल के देवपुर परीक्षेत्र से ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जहां ग्रामीण सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते दिनों बुधवार 23.09.2026 को देवपुर वन परिक्षेत्र के मेटकुला के उपेन्द्र साहू नाम के एक किसान के खेत में विद्युत तार बिछाकर दो जंगली सूवरों का अवैध शिकार किया गया था जिसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दिए गए जिससे स्थानीय वन अमले द्वारा मौका जांच निरीक्षण कर मृत जंगली सूअर का पोस्ट मार्टम कर कार्यवाही की गई कुछ लोग दावा कर रहै है की इस मामले के मुख्य दो आरोपीयों को बचाने एवं मामले को रफा दफा करने के लिए एक सोची समझी रणनीति के तहत वन विभाग के स्थानीय जमीनी वन अमला द्वारा आरोपियों को बचाने के चक्कर में जान बूझकर फरार करवा दिया गया है वहीं कुछ समीप के स्थानीय ग्रामीण सूत्रों से यह बात भी निकल कर सामने आ रही है की स्थानीय वनरक्षक और डिप्टी रेंजर के द्वारा अपने कार्यक्षेत्र मे पर्याप्त गस्त नहीं करने कारण इन दिनों क्षेत्र के जंगल से आए दिन वन्य प्राणियों के अवैध शिकार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है कुछ ग्रामीण अपनी नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताते हैं की इन दिनों देवपुर वन परिक्षेत्र में वन्य प्राणियों के अवैध शिकार के लिए हाई टेंशन विद्युत तार,जहर खुरानी,जेआई तार के फंदे से वन्य प्राणियों का अवैध शिकार किया जा रहा है
और उनके मांस के व्यापार करने का एक सिक्रेट सिंडिकेट चलाई जा रही है जिसमें कुछ वनों के भक्षक वन रक्षकों की मिली भगत होने की बात भी लोग दबे जुबान से कहने लगे है लोग तो यहां तक दावा करने लगे हैं की उनकी इतनी चतुर बुद्धि होती है की शिकारी के द्वारा शिकार किए गए वन्य प्राणियों के मांस का कुछ हिस्सा वे स्वयं खाने के लिए ले जाते हैं ऐसे वन कर्मियों को चुल्लू भर पानी में डूब के मर जाना चाहिए क्योंकि जिस वन कर्मियों को शासन ने वन विभाग ने वन एवं वन्य प्राणियों के रक्षा करने के लिए उन्हें शपथ दिलाई है और उन्हें उस पद नाम से जाना व पहचाना जाता है और एक नाम पहचान और परिवार का लालन पालन करने एक व्यवस्थित स्वरोजगार दिया जाता है वहीं उन्हीं में से कुछ लोग चंद पैसों और मांस खाने के लालच में अपने पदीय कर्तव्यों को भूलाकर वन एवं वन्य प्राणियों के विनाश में संलिप्त रहकर वन्य अपराध करने वाले आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
बीते दिनों मेंटकुला के जंगल से सटे एक किसान के खेत में भी दो जंगली सूवरों के विद्युत तार से अवैध शिकार करने के मामले सामने आए हैं घटना की सूचना पर आनन-फानन में देवपुर परीक्षेत्र के मेटकूला वन अमले द्वारा मृत जंगली सूअरों को जंगल में ही आनन फानन में जलाया गया है लेकिन आरोपियों को दबोचने में वन अमले ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और गिरफ्तार करने में नाकाम रही जिससे जमीनी वन अमले की कार्यशाली संदेहास्पद प्रतीत हो रही है अब देखना होगा की वन अमला आरोपियों को पकड़ पाती है या मामला ऐसे ही ठंडे बस्ते में चली जाती है ये तो वक्त पर ही पता चलेगा। सवाल ये भी खड़ा होता है की आखिर जब वन अमले को घटना की जानकारी पहले से मिल चुकी थी तो आखिर आरोपियों के फरार हो जाने से अगर इस तरह के वन्य प्राणीयों के शिकार के कारणों का पता चल जाने के बाद भी अगर आरोपियों को पकड़ने में वन विभाग विफल होती है तो कहीं ना कहीं वन विभाग की वनरक्षक और जमीनी वन अमले की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है जिससे यह स्पष्ट परिलक्षित होती है की वन एवं वन्य प्राणियों के विनाश के मुख्य कारण वन विभाग ही है मेटकुला के जंगल में जंगली सूअर के अवैध शिकार हाई टेंशन विद्युत तार की जाल बिछाकर जंगली सूअर के शिकार किए गए हैं जिसके आरोपी अभी फरार है अब दिखने वाली बात होगी की वन अमले इन दोनों आरोपियों को पकड़ पाती है या इन्हें जान बूझकर फरार कर दिया गया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के पूर्व ही उन्हें न्यायालय से जमानत कराने के लिए अपनी गुप्त चतुर बुद्धि से बैक ग्राउंड सहयोग किया जाता है चूंकि हाल ही में चंद दिनों पहले मेंटकुला जंगल मे जंगली सूवरों के अवैध शिकार वाले प्रकरण में अभी तक मुख्य आरोपी पकड़े नहीं गए हैं घटनास्थल में स्पष्ट रूप से जंगली सूअर को जलाए जाने के अवशेष स्पष्ट परिलक्षित हो रहे है।अगर वन अमला चाहे तो वन्य अपराध में संलिप्त किसी भी अपराधी को तत्काल गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है लेकिन इन दिनों वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के बीच वन्य अपराध मे संलिप्त आरोपीयों की गिरफ्तारी के पहले उन्हे जानबुझकर फरार करवा दिए जाते हैं और न्यायालय में चालान पेश करने के समय न्यायालय में सरेंडर करवाया जाता है खबर लिखे जाने तक फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की कोई सूचना हमें प्राप्त नहीं हुई है अब देखते हैं कि फरार आरोपीयो को वन विभाग के स्थानीय वन अमला पकड़ पाती है या न्यायालय से जमानत करवाने में अपनी गोपनीय भूमिका निभाती है। ये तो वक्त पर ही पता चलेगा


























