
पिथौरा5.05.2026 पिथौरा विकासखंड के प्राथमिक शाला कोटादादर के सहायक शिक्षक श्याम कुमार पटेल द्वारा दूसरी तीसरी के बच्चों से वार्षिक परीक्षा नहीं लिए जाने के मामले ने एक बार फिर बड़ी दिलचस्प मोड़ ले लिया है जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद का अजीबो गरीब तरीके से अचानक निलंबन बहाली के आदेश जारी किए जाने से महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग के विभागीय घूसखोरीपन का दोहरी नीति प्रदर्शित हो गई है

वाह रे शिक्षा विभाग वार्षिक परीक्षा मे लापरवाही बरतने वाले सहायक शिक्षक श्याम कुमार पटेल को पारितोषिक में निलंबन से बहाली मिली।

बच्चों के परीक्षा जैसे गंभीर विषय पर लापरवाही बरतने वाले कोंटादादर के सहायक शिक्षक श्याम कुमार पटेल एक बार फिर सुर्खियों में है इस बार सुर्खियां निलंबन की नहीं बल्कि निलंबन से बहाली होने की है जानकारी अनुसार अब स्वयं को शिक्षकों की महाज्ञानी नेता समझने वाले लापरवाह शिक्षक के खिलाफ स्कूल के साथ कोटादादर के बच्चों के पालक और जनप्रतिनिधी स्तर के लोगों में भी इस मामले पर आक्रोश साफ साफ दिखाई पड़ रही है अब लोग खुलकर सामने आने लगे है और सहायक शिक्षक श्याम कुमार पटेल को कोटादादर से हटाकर बच्चों के भविष्य को बचाने उनके जगह पर दूसरे शिक्षक की मांग करने की तैयारी में है ग्रामीण और स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों में शिक्षा विभाग के द्वारा परीक्षा में लापरवाही बरतने पर किए गए निलंबन आदेश को समय के पूर्व बहाली में परिवर्तित किए जाने को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी डीईओ कार्यालय में बैठने वाले एक बाबू के द्वारा बिना सोचे समझे नव पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी को मामले की पूरी विस्तृत जानकारी दिए बगैर एवं प्रकरण की गंभीरता को बताएं बिना गुपचुप तरीके से निलंबन बहाली के आदेश जारी किए जाने को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च कार्यालयों को शिकायत करने की तैयारी में हैं

बताया जाता है की ये शिक्षक बहुत ही अकड़ु किस्म का है और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी राजनीतिक पहुंच होने का धौंस दिखाकर गुमराह करते रहता है साथ साथ शिक्षण कार्य के अलावा अन्य अनावश्यक गतिविधियों में भी संलिप्त रहता है जिससे बच्चों की शिक्षण कार्य प्रभावित होती है..
बताया जा रहा है कि उनके द्वारा पिछले महीने ग्रामीणों को गलत तरीके से गुमराह कर राजनीतिक खेला कर दिया गया था जिसका एहसास स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बाद में होने से उनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की भावनाएं प्रबल होने लगी है अब देखना होगा की देश के भविष्य गढ़े जाने वाले शिक्षा विभाग में विभागीय नियम कायदों को ताक में रखकर मनमर्जी तरीके से कार्य करने वाले ऐसे शिक्षक पर स्थानीय ग्रामीण लामबंद होते हैं या फिर ये शिक्षक हमेशा की तरह वे मनमर्जी कार्य प्रणाली से कोटा दादर स्कूल को अपनी मनोरंजन का साधन के रुप में उपयोग करते रहेंगे ये शिक्षक बच्चों के भविष्य को क्या सवारेंगे यह शिक्षक तो सिर्फ वेतन लेने के लिए ही अपनी कोटादादर संकुल जैसे आरामगाह को ढूंढते रहते हैं।
बच्चों की परीक्षा मे लापरवाही के मामले को छत्तीसगढ़ सृजन ने प्रमुखता से उठाया था जिसे विभाग ने संज्ञान में लेकर इस शिक्षक के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही किए थे और जब इस पूरे मामले पर समय पूर्व निलंबन से बहाली की खबर मिली तो इस मामले पर लीपापोती करने वाले बाबू से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु संयुक्त संचालक और संचालनालय लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ शासन को भी इस पूरे प्रकरण से अवगत कराया जाएगा जिससे दूध का दूध पानी का पानी सामने हो जाएगा आखिर निलंबन से बहाली किए गए आदेश में संतोष जनक जवाब पाए जाने जैसे शब्दों का उल्लेख है आखिर ऐसी कौन से संतोष जनक तथ्य के आधार पर समय के पूर्व विभागीय नियमों को कुचलकर बच्चों के वार्षिक परीक्षा जैसे गंभीर मामले में लापरवाही बरतने पर किए गए निलंबन की कार्यवाही को शिथिल कर समय से पूर्व लापरवाह शिक्षक को निलंबन से बहाल करने की मजबूरी थी यह जवाब तो जिला शिक्षा अधिकारी और स्थानीय बाबू लोगो को देना ही पड़ेगा…








