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बारनवापारा अभ्यारण में काले हिरणों की मौत के आंकड़ो में वृद्धि..बारनवापारा अभ्यारण में वन्य जीव संरक्षण की खुली पोल।

बलौदाबाजार 7.10.2026 छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत रामपुर बीट के कक्ष क्रमांक 127 स्थित पकरीद परिसर में एक नर काले हिरण का शव बरामद किया गया है। संरक्षित वन्यजीव की इस तरह मौत होने की खबर मिलते ही वन अमले में हड़कंप मच गया है। काले हिरण भारत में एक उच्च संरक्षित प्रजाति है और इस प्रकार की घटना वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों के लिए चिंता का विषय है।
तेंदुए या कुत्तों के हमले का अंदेशा
शुरुआती जांच और घटनास्थल की स्थिति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि हिरण का शिकार किसी शिकारी वन्यजीव या आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा किया गया हो सकता है। इलाके में तेंदुए की सक्रियता और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भटककर आने वाले आवारा कुत्तों के हमलों को मौत का प्राथमिक कारण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हिरण के शरीर पर मिले चोट के निशान हमले की पुष्टि करते प्रतीत होते हैं।पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होगा कारण
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया। वन अधिकारियों के अनुसार, मौत की वास्तविक वजह घातक चोट, दम घुटना या कोई बीमारी पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई जहर देने या अन्य कोई बाहरी कारण तो नहीं था, विस्तृत विसरा रिपोर्ट की भी प्रतीक्षा की जा सकती है।
विभाग ने शुरू की निगरानी
वन विभाग ने मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं इस घटना के पीछे किसी प्रकार की अवैध शिकार की गतिविधि तो शामिल नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह घटना वन्यजीव सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देती है, खासकर अभयारण्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां इंसानी और पालतू जानवरों की आवाजाही अधिक हो सकती है।बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों ब्लैक बक के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रामपुर स्थित संरक्षित क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती घुसपैठ और हमलों के कारण इन दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।लापरवाही और निष्क्रियता का आरोप-: स्थानीय वन अमले की कथित लापरवाही और ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण आए दिन काले हिरणों की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे केंद्र व राज्य सरकार के संरक्षण अभियानों को झटका लग रहा है।
बजट के उपयोग पर सवाल: अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन के नाम पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
आवारा कुत्तों का आतंक: संरक्षित रहवास क्षेत्रों में घूम रहे आवारा कुत्ते काले हिरणों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, जिसके कारण इस दुर्लभ प्रजाति के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है।
वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अभयारण्य की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि काले हिरणों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।बारनवापारा अभ्यारण्य के रामपुर स्थित संरक्षित क्षेत्र में आवारा कुत्तों की घुसपैठ और काले हिरणों की लगातार हो रही मौतें सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर बहुत गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। स्थानीय अमले की लापरवाही, ढीली गश्त और कमजोर बाड़/घेराबंदी के कारण आवारा कुत्ते आसानी से इन संरक्षित रहवासों में दाखिल हो जाते हैं, जिससे इस दुर्लभ प्रजाति के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, काले हिरणों के बेहतर संरक्षण और सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए:
मजबूत फेंसिंग और फिजिकल बैरियर: रामपुर बीट और काले हिरणों के मुख्य रहवास क्षेत्र (एनक्लोजर) के चारों ओर चेन-लिंक या सोलर फेंसिंग की दोहरी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे आवारा कुत्ते अंदर न आ सकें।
आवारा कुत्तों का प्रबंधन: अभयारण्य के आसपास के गांवों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के लिए पशुपालन और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।
सीसीटीवी और 24 घंटे मॉनिटरिंग: पूरे रहवास क्षेत्र में नाइट-विज़न सीसीटीवी कैमरे और थर्मल ड्रोन से निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसी भी घुसपैठ या खतरे का तुरंत पता चल सके।
सख्त गश्त और जवाबदेही तय करना: वन विभाग के कर्मचारियों की रोस्टर आधारित गश्त अनिवार्य की जाए। ड्युटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
त्वरित प्रतिक्रिया दल:- अभयारण्य में 24 घंटे तैनात रहने वाली एक समर्पित टीम हो,जो कुत्तों या वन्यजीवों पर किसी भी हमले की सूचना मिलते ही मौके पर तुरंत पहुँच सके।
समुदाय आधारित सुरक्षा-: आसपास के ग्रामीणों और चरवाहों को जागरूक किया जाए कि वे अपने पालतू या गांव के कुत्तों को संरक्षित वन क्षेत्र में न आने दें।
यदि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी फंड और संसाधनों का पारदर्शी व कड़ाई से उपयोग कर इन उपायों को लागू किया जाए, तो काले हिरणों को उनके ही घर में सुरक्षित माहौल दिया जा सकता है।

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