
रायपुर / 19.10.2026 छ.ग.के बारनवापारा अभ्यारण्य को टाईगर रिजर्व बनाने की मांग वन्य जीव और पर्यावरण प्रेमी लगातार कर रहे हैं वहीं,छ.ग.शासन की उदासीनता के कारण टाईगर रिजर्व नही बन पा रहा है लेकिन टाईगर/बाघ ने बारनवापारा अभ्यारण के जंगलों को अपने रहवास क्षेत्र बनाने के लिए मानो ठान ही लिया है इन दिनों उनके पुन: दस्तखत से वन विभागीय महकमा एवं क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
दरअसल मामला यह है कि छ.ग.शासन का बारनवापारा अभ्यारण्य को टाईगर रिजर्व घोषित किये जाने का प्लान बहुत पहले से ही चल रहा है। लेकिन अब तक टाईगर रिजर्व घोषित करने का कार्य विभागीय स्तर में भी अधर में लटकी हुई है,लगभग विगत दो वर्षों से बारनवापारा अभ्यारण्य व महासमुंद वनमंडल के सिरपुर क्षेत्र के जंगलों में बाघ देखने को मिला था। महासमुंद वनमंडल और बलौदाबाजार वनमंडल दोनो के बॉर्डर लाईन के विशाल भू-भाग सघन घनत्व वाले जंगल बाघों के रहवास के अनुकूल है जो बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र से घिरा हुआ है!जो वर्तमान में तेन्दुआ और हांथियों की भारी तादात में एक स्थायी बसाहट बन चुकी है,इसी बीच में बाघ ने भी बारनवापारा अभ्यारण के जंगलों को अपनी बसाहट बनाने का मन बना लिया है ऐसा लगता है। महिने दिन पहले कुछ ग्रामीणों ने भी बाघ देखने की बाते कही थी किन्तु हवा हवाई बाते है करके टाल दिया गया था!

लेकिन पुन: बाघों की पग चिन्हों ने साबित कर दिया है कि बाघ वर्तमान में बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्रों में विचरण कर रहा हैं। जिससे वन विभाग को अलर्ट हो जाना चाहिये साथ में आस पास के वन क्षेत्र में बसे गांवों में मुनादी कराया जाना चाहिए, ताकि समय रहते बाघ से होने वाले संभावित खतरे से निपटा जा सके एवं सावधानियां बरती जा सके।
छ.ग.मे बारनवापारा अभ्यारण बाघ के रहवास के अनुकूल
छ.ग. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने तो इसे बाघों के रहवास और स्थायी पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त माना है। और अंदरुनी कुछ गांवों को करोड़ों रुपए की धनराशि खर्च कर कुछ ग्रामीण आबादी को भी उनके पुनर्वास का योजना बनाकर कुछ वर्ष पहले स्थानांतरित किया जा चुका है

बारनवापारा अभ्यारण बाघ के रहवास के अनूकुल होने का मुख्य कारण
1.ऐतिहासिक रूप से बारनवापारा अभ्यारण बाघों के रहवास के लिए अनुकूल रही है
2.विभागीय एवं बाघ के विषय में शोध कर्ताओं और कुछ वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार 40 साल पहले तक बारनवापारा अभ्यारण के जंगलों में अच्छी संख्या में बाघों का रहवास विचरण के बाद एक स्थायी ठीकाना रहा परंतु बाद में अवैध शिकार और लगातार बढ़ रही मानवीय चहल कदमी एवं मानवीय दबाव से बाघ यहां से धीरे-धीरे विलुप्त होते गए। विभागीय कुछ ग्रामीण जानकारों के अनुसार मार्च 2024 में 40 साल बाद एक 4 साल का युवा नर बाघ खुद चलकर यहाँ आया और 8 महीने तक बारनवापारा अभ्यारण के जंगलों में विचरण करता रहा जो इस अभ्यारण के बाघों के अनुकूल रहवास के लिए किए गए दावों की पुष्टि करता है

2. हेबिटेट और पानी पर्याप्त है
-क्षेत्रफल – 244.66 वर्ग किमी, समतल + पठारी, सागौन, साल, बांस का घना जंगल
3 नदियाँ – बालमदेही नदी पश्चिमी सीमा, जोंक उत्तर-पूर्वी सीमा और महानदी, साथ ही पूरे अभ्यारण्य में कृत्रिम वाटरहोल बने हैं
इसी कारण वन विभाग लिखता है – “The sanctuary’s ecosystem provides a suitable habitat for tigers, with an adequate prey base and sufficient water sources”
3. शिकार (Prey Base) भरपूर है
चितल, सांभर, जंगली सूअर, चौसिंगा, भौंकने वाला हिरण, गौर, नीलगाय की अच्छी संख्या है। पन्ना टाइगर रिजर्व को 0 से 90 बाघों तक पहुंचाने वाले विशेषज्ञ आर. श्रीनिवास मूर्ति ने खुद जून 2024 में सर्वे कर कहा था कि यहाँ “ample prey base and water sources conducive to tiger survival” है।
4. सरकारी रिपोर्ट में सबसे उपयुक्त
2024 की राज्य वन्यजीव बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार –
> “Among these reserves, Barnawapara Sanctuary is deemed the most suitable habitat for tiger relocation”
कुछ विभागीय एवं वन्य जीव प्रेमी जानकार बताते हैं की 2025 की वर्तमान स्थिति में वन विभाग ने बारनवापारा अभ्यारण में 2 बाघ होना माना है।
फिर भी स्थायी बसाहट रहवास में क्या अड़चन है?
1.आकार छोटा है – केवल 245 वर्ग किमी,एक बाघ को 20-30 वर्ग किमी चाहिए, इसलिए 4-5 से ज्यादा बाघ नहीं रह सकते।
2. कॉरिडोर -सीतानदी-उदंती और अचानकमार से जुड़ा नहीं है, अकेला पैच है।
3. मानवीय दबाव -चारों तरफ दर्जनों गांवों,मवेशी चराई, इसीलिए 2024 वाला बाघ कसडोल शहर के एक आबादी क्षेत्र में में घुस गया था और उसे गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करना पड़ा।
निष्कर्ष:-बारनवापारा अभ्यारण के जंगल बाघों के रहवास के लिए अनुकूल तो है ही, बल्कि यदि 2 मादा बाघ यहाँ लाकर छोड़ी जाएं तो बाघों के बीच प्रजनन प्रतिशत बढ़ने से (जिसका प्रस्ताव NTCA को भेजा गया था) यहाँ छोटा लेकिन स्थायी तौर पर टाइगर पॉपुलेशन बस सकता है।
























