Home » Uncategorized » आईएफएस पंकज राजपूत, 2014–16 बैच, छत्तीसगढ़ कैडर की माता श्रीमती निर्मला देवी,निवासी ग्राम गोहावर हल्लू, जिला बिजनौर, द्वारा अपनी बहू डॉ. अदिति सिंह, उनके पिता श्री जितेंद्र बहादुर सिंह, भाई श्री राजविक्रम सिंह तथा अन्य के विरुद्ध शुरू की गई आपराधिक न्यायालयीन कार्यवाही अंततः खारिज हो गई।

आईएफएस पंकज राजपूत, 2014–16 बैच, छत्तीसगढ़ कैडर की माता श्रीमती निर्मला देवी,निवासी ग्राम गोहावर हल्लू, जिला बिजनौर, द्वारा अपनी बहू डॉ. अदिति सिंह, उनके पिता श्री जितेंद्र बहादुर सिंह, भाई श्री राजविक्रम सिंह तथा अन्य के विरुद्ध शुरू की गई आपराधिक न्यायालयीन कार्यवाही अंततः खारिज हो गई।

रायपुर 21.10.2026। आईएफएस पंकज राजपूत, 2014–16 बैच, छत्तीसगढ़ कैडर की माता श्रीमती निर्मला देवी, निवासी ग्राम गोहावर हल्लू, जिला बिजनौर उ.प्र, द्वारा अपनी बहू डॉ. अदिति सिंह, उनके परीजनों के विरुद्ध शुरू की गई आपराधिक न्यायालयीन कार्यवाही अंततः खारिज हो गई। 9 सितंबर 2026 के आदेश में उ.प्र.के बिजनौर न्यायालय ने परिवाद को धारा 226 BNSS के अंतर्गत निरस्त करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के कथनों का परीक्षण किया तथा स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि “समस्त घटना मनगढ़ंत व कपोलकल्पित प्रतीत होती है।”
29 सितंबर 2024 की कथित घटना—गोली चलाने का आरोपी बनाया गया भाई उसी समय लखनऊ में, Google Location, Timeline और वीडियो के डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध
न्यायालयीन अभिलेख के अनुसार निर्मला देवी ने घटना की तारीख 29 सितंबर 2024 बताते हुए डॉ. अदिति सिंह और उनके मायके पक्ष पर डकैती, मारपीट तथा जान से मारने के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस कथित घटना में डॉ. अदिति सिंह परिवार के सदस्यों को अभियुक्त बनाते हुए उन पर गोली चलाने का आरोप लगाया गया।
जबकि 29 सितंबर 2024 को अदिती के कथित परिजन की Google Location और Google Timeline उन्हें लखनऊ में दर्शाती है। उसी तारीख और समयावधि के वीडियो भी उनकी लखनऊ में मौजूदगी के डिजिटल साक्ष्य के रूप में उपलब्ध हैं। उस दौरान उनका एक मित्र लखनऊ दौरे पर आया हुआ था और राजविक्रम सिंह उसके साथ भी कई वीडियो में मौजूद दिखाई देते हैं। इस प्रकार कथित घटनास्थल से अलग शहर में उनकी उपस्थिति से संबंधित Google Location, Google Timeline और वीडियो रिकॉर्ड जैसे डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं।
इन डिजिटल साक्ष्यों—विशेष रूप से Google Timeline/Location के स्क्रीनशॉट और संबंधित तारीख के वीडियो—को समाचार के साथ दस्तावेजी सामग्री के रूप में भी प्रकाशित किया जा सकता है।
विवेचना में घटना के समर्थन में कुछ नहीं मिला, फिर भी 10 मार्च 2025 को एसपी बिजनौर को भेजा प्रार्थना-पत्र
इस मामले की विवेचना संबंधित विवेचना अधिकारी द्वारा की जा चुकी थी और निर्मला देवी द्वारा बताई गई घटना के समर्थन में कोई तथ्य अथवा साक्ष्य नहीं पाए जाने संबंधी रिपोर्ट लगाई जा चुकी थी।
इसके बावजूद न्यायालयीन अभिलेख के अनुसार निर्मला देवी ने 10 मार्च 2025 को पुलिस अधीक्षक, बिजनौर को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से प्रार्थना-पत्र भेजा। पुलिस अधीक्षक को भेजे गए इस प्रार्थना-पत्र में पूर्व में हो चुकी विवेचना और उसमें उनके कथनों के समर्थन में कुछ न पाए जाने की रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी गई।
इसके बाद 15 अप्रैल 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बिजनौर ने धारा 173(4) BNSS के अंतर्गत प्रस्तुत आवेदन को निरस्त करते हुए प्रार्थना-पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
फर्जी तथ्यों और दस्तावेजों का किया प्रयोग, फर्जी मेडिकल भी लगाया
इस पूरे प्रकरण में निर्मला देवी ने अपनी बहू डॉ. अदिति सिंह और उनके परिवार को प्रताड़ित करने के लिए कई फर्जी तथ्य और दस्तावेज बनाए तथा उनका प्रयोग किया। अपने कथनों को सही साबित करने और मामले को बल देने के लिए एक फर्जी मेडिकल दस्तावेज का भी प्रयोग किया गया।
एक ओर पूर्व विवेचना में कथित घटना के समर्थन में कुछ नहीं पाया गया था, वहीं दूसरी ओर इस तथ्य को पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र में सामने नहीं रखा गया। इसके बाद न्यायालयीन कार्यवाही में भी अपने कथनों के समर्थन में उक्त मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
अंतिम आदेश में न्यायालय ने मेडिकल प्रपत्र से संबंधित साक्ष्य पर भी विचार किया और दर्ज किया कि संबंधित डॉक्टर को न्यायालय के समक्ष परीक्षित नहीं कराया गया था। गवाहों के कथनों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। न्यायालय ने अंततः कथित घटना के समर्थन में पर्याप्त चश्मदीद एवं दस्तावेजी साक्ष्य का अभाव पाया।
मई 2025 का न्यायालयीन नोटिस भी दस्तावेजी रिकॉर्ड में
मामले से संबंधित एक अन्य न्यायालयीन दस्तावेज ‘निर्मला देवी बनाम अदिति सिंह आदि’, वाद संख्या 697/2025 का नोटिस भी उपलब्ध है। इस नोटिस पर 22 मई 2025 की न्यायालयीन मुहर दिखाई देती है तथा डॉ. अदिति सिंह को 28 मई 2025 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए सूचित किया गया था।यह नोटिस भी समाचार के साथ Exhibit के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है, जिससे निर्मला देवी द्वारा डॉ. अदिति सिंह के विरुद्ध शुरू की गई न्यायालयीन कार्यवाही का दस्तावेजी क्रम सामने आता है।निर्मला देवी के फर्जी और षड्यंत्रकारी मुकदमों से प्रताड़ित होकर डॉ. अदिति सिंह को दर्ज करानी पड़ी FIR
इस पूरे मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य इसकी chronology है। डॉ. अदिति सिंह द्वारा FIR दर्ज कराना इस विवाद की शुरुआत नहीं थी। निर्मला देवी द्वारा उनके और उनके परिवार के विरुद्ध फर्जी और षड्यंत्रकारी मुकदमे किए जाने तथा उन्हें गंभीर आपराधिक मामलों में घसीटे जाने के बाद प्रताड़ित होकर डॉ. अदिति सिंह को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए FIR दर्ज करानी पड़ी।
डॉ. अदिति सिंह की FIR में दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा एवं अन्य प्रकार की प्रताड़ना के साथ उनके और उनके परिवार के विरुद्ध की गई दुर्भावनापूर्ण कानूनी कार्यवाहियों का भी उल्लेख किया गया है।
अतः इस घटनाक्रम में यह बात पुरजोर तरीके से सामने आती है कि डॉ. अदिति सिंह की FIR निर्मला देवी द्वारा उनके और उनके परिवार के विरुद्ध शुरू की गई कानूनी कार्यवाहियों के बाद दर्ज हुई, न कि उससे पहले। FIR का प्रथम पृष्ठ और उस पर अंकित तारीख इस chronology के महत्वपूर्ण दस्तावेजी प्रमाण के रूप में समाचार के साथ प्रकाशित की जानी चाहिए।अधिवक्ता ए. के. शुक्ला ने न्यायालय के समक्ष दिए अकाट्य तर्कप्रकरण में डॉ. अदिति सिंह एवं अन्य विपक्षीगण की ओर से अधिवक्ता ए. के. शुक्ला ने न्यायालय के समक्ष अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए। मामले से जुड़े तथ्यों, उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के कथनों में मौजूद विरोधाभासों को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
अंततः 9 सितंबर 2026 को अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/एसीजेएम, कोर्ट संख्या-3, बिजनौर ने परिवाद को धारा 226 BNSS के अंतर्गत निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कथित घटना के समर्थन में पर्याप्त आधार न पाते हुए आदेश में दर्ज किया कि— “समस्त घटना मनगढ़ंत व कपोलकल्पित प्रतीत होती है।”
परिवार जोड़ने के बजाय बहू को गंभीर फर्जी आपराधिक मुकदमों में घसीटा
जहाँ एक ओर परिवार में बड़े-बुजुर्गों की भूमिका आपसी सामंजस्य स्थापित करने, मतभेदों को दूर करने और अपने से छोटों के परिवार को संवारने की होती है, वहीं श्रीमती निर्मला देवी ने पारिवारिक विवाद को सुलझाने के स्थान पर अपनी बहू डॉ. अदिति सिंह और उनके मायके पक्ष को गंभीर फर्जी आपराधिक मुकदमों में घसीटा, जिससे वे अपने बेटे के परिवार को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
परिवार को जोड़ने और बेटा-बहू के बीच सामंजस्य स्थापित करने के बजाय बहू और उसके मायके पक्ष को गंभीर आपराधिक मामलों में उलझाने की यह पूरी प्रक्रिया पारिवारिक विवाद को और अधिक बढ़ाने वाली बनी।
समस्त षड्यंत्रों के बावजूद अदिति ने नहीं टेके घुटने, आज भी परिणय-सूत्र कायम
श्रीमती निर्मला देवी के समस्त प्रयासों और षड्यंत्रों के बावजूद डॉ. अदिति सिंह ने अभी तक घुटने नहीं टेके हैं। उन्होंने अपने परिणय-सूत्र को नहीं तोड़ा है और अपने आठ वर्षीय नाबालिग पुत्र के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष कर रही हैं।
अपनी सास द्वारा किए गए तमाम मुकदमों और षड्यंत्रों के बाद भी डॉ. अदिति सिंह ने अपने पति श्री पंकज राजपूत से अभी तक विवाह-विच्छेद नहीं किया है। एक हिंदू विवाहिता होने के नाते वह आज भी अपने वैवाहिक संबंध और अपनी मांग के सिंदूर को बचाने के लिए निरंतर संघर्ष कर रही हैं। इसके साथ ही अपने नाबालिग पुत्र के अधिकारों और उसके न्यायोचित भरण-पोषण के लिए उनकी लड़ाई लगातार जारी है।

दस्तावेजों से सामने आती घटनाओं की समयरेखा
तारीख

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 173(4) BNSS का आवेदन निरस्त कर प्रार्थना-पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश।
22.05.2025 / 28.05.2025
वाद संख्या 697/2025 से संबंधित न्यायालयीन नोटिस पर मुहर/उपस्थिति की तारीख।[FIR की तारीख]
निर्मला देवी की उक्त कानूनी कार्यवाहियों के बाद डॉ. अदिति सिंह द्वारा FIR दर्ज।
09.09.2026
परिवाद निरस्त; न्यायालय ने दर्ज किया—“समस्त घटना मनगढ़ंत व कपोलकल्पित प्रतीत होती है।”

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