
बया।छ.ग.सृजन 14/07/2025 बलौदाबाजार वनमंडल के वन परिक्षेत्र देवपुर से कसडोल मुख्य मार्ग के समीप प्राकृतिक रूप से जंगल व पर्वतों के बीच से धरती का सीना चीरकर बारहमासी बहने वाली देवधारा जलप्रपात क्षेत्रवासियों के लिए एक पवित्र जलधारा स्त्रोत का केंद्र बिंदु है। यहां प्रतिवर्ष श्रावण के महीने में क्षेत्र व दुरस्त अंचलों के शिव भक्त पहुंचते हैं और श्रद्धालु प्राकृतिक पवित्र शीतल जल भरकर अपने आस्था के अनुसार दूर-दूर तक पैदल चलकर अपने प्रमुख आस्था के केंद्र शिव मंदिरों में स्थापित महादेव पर यहां का पवित्र जल चढ़ाते हैं।

किंवदन्तियां है की यहां रामायण काल के घटना का कुछ अवशेष अभी भी मौजूद है आध्यात्मिक व पुरातात्विक शोध से जुड़े लोगों व ग्रामीण अंचल के लोग भी देवधारा के पर्वतों व जंगलों मे रामायण कालीन अवशेषों के होने का दावा करते हैं

जिसकी पुष्टि देवधारा के ऊपर पर्वतों पर अनेक जगह पत्थर चट्टानों के बीच रामायण काल में राम लक्ष्मण व उनकी सेना के तब वर्णन के अनुसार वनवास के कालखंड में प्राचीन महाकाव्यों में उल्लेखित दक्षिण कौशल दण्डकारण्य जो आज छत्तीसगढ़ की भू भाग में समाहित है जहां श्रीराम लक्ष्मण और सीता की अत्यधिक समय व्यतित करने का प्रमाण भी मिलता है


राम लक्ष्मण और सीता के वनवास के समय राम लक्ष्मण के हाथों युद्ध में मारे गए विशालकाय किसी राक्षसों के हड्डियों के टुकड़े होने का दावा करते हैं जिसे लोग रक्सा हाड़ा के नाम से जानते हैं। इन सभी आंचलिक लोकश्रुतियों से यह स्पष्ट होता है की बया से चंद कि.मी.मे स्थित देवधारा जलप्रपात रामायण कालीन साक्ष्य से प्रतिबिंबित है।


बरसात के मौसम व श्रावण के महीने में देवधारा में श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ जाती है लेकिन विडंबना है स्थानीय प्रशासन इन पुरातात्विक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थल में स्वच्छता साफ सफाई और श्रद्धालुओं के भावनाओं के अनुरूप कार्य करने में असफल है। यहां पहुंचने के लिए लोग दलदल से भरी कच्ची सड़क से होकर गुजरने को मजबूर हैं।

देवधारा जलप्रपात इतनी प्राचीनतम ऐतिहासिक साक्ष्यों और प्राकृतिक संपदा से अच्छादित होने के बावजूद भी प्रशासनिक उदासीनता के कारण सिर्फ पिकनिक स्पॉट और असमाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है। यहां की गंदगी व अव्यवस्था को देखते हुए भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन भले ही मौन व्रत लिए हुए है लेकिन जन आस्था का केंद्र बिंदु अदृश्य रुप से सबके जीवन के सांसों की डोरी को चलाने वाली प्रकृति रूपी वनदेवी जरुर रोती बिलखती प्रशासन और स्थानीय श्रद्धालुओं से गुहार लगाकर देवधारा जल प्रपात की स्वछता और सुव्यवस्था के लिए जरुर प्रलाप करती होगी।

देवधारा जलप्रपात के नाम से मशहूर प्राकृतिक पवित्र झरने के समीप इन दिनों स्थानीय प्रशासन की देखरेख के अभाव व उदासीनता एवं जागरूकता के अभाव के कारण असामाजिक तत्वों द्वारा पिकनिक स्पॉट के आड़ में शराब की धारा बहायी जा रही है।
देवधारा के जल प्रपात के मार्ग में असमाजिक तत्वों द्वारा जलधारा के आसपास अनेक ब्रांड के शराब के खाली बोतलों के फेंकने से खाली बोतलों का अंबार लगी है। जिससे जन आस्था की भावनाओं का अनादर हो रही है। स्थानीय प्रशासन को यहां की वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखने के लिए कोई ठोस पहल करने की जरूरत है।








