Post: हमें मौत देदो या हक की जमीन में अधिकार-कलेक्टर साहब। कैलाश कामिनी की जुबानी।

हमें मौत देदो या हक की जमीन में अधिकार-कलेक्टर साहब। कैलाश कामिनी की जुबानी।

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पिथौरा। 24/06/2025। छ.ग.में सरकार जन समस्याओं को सुलझाने सुशासन समाधान शिविर लगाकर लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करती है लेकिन सरकार और उनके प्रशासनिक सिस्टम महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील के ग्राम रिखादादर में सुशासन व समस्या समाधान का कोई मतलब नहीं है क्योंकि यहां के निवासी कैलाश पिता विपिन प्रधान एवं उनकी पत्नी कामिनी प्रधान वर्षों से अपने हक की लड़ाई के लिए भटक रहे हैं वे अपने दो छोटे छोटे बच्चों के साथ अपने हक की जमीन में वर्षों से बेदखली का दंश झेल रहे हैं बीते वर्ष राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार ने रिखादादर पहुंच कर पटवारी आरआई व स्थानीय लोगों के बीच पहुंचकर उनकी हक की जमीन का सिमांकन कर चिन्हांकित कर उन्हें कब्जा दिलाया गया था। बावजूद कुछ लोग द्वेषवश उनके जमीन को हड़पने और उन्हें बेदखल करने के लिए जमीन मे काबीज होने नहीं दिया जा रहा है वर्षों से विपिन और कामिनी प्रधान तहसीलदार, एसडीएम,कलेक्टर कार्यालय का चक्कर लगाते अब थक चुके‌ है

दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ दर दर की ठोकर खा खाकर कर कैलाश प्रधान व उनकी पत्नी दामिनी प्रधान व दोनों बच्चों का बुरा हाल है वे अब न्याय की तलाश में भटक रहे हैं लेकिन स्वतंत्र भारत मे सबके लिए समान कानून व्यवस्था हक व अधिकार देने वाले संवैधानिक स्वतंत्र भारत की सरकारी तंत्र व यहां के नेता नारायण नीती पार्टी इस गरीब परिवार के लिए आखिर खड़ा क्यों नहीं हो रहें है क्या बिगाड़ा है इस गरीब परिवार ने अपने हक अधिकार को मांगकर क्या गुंडागर्दी और दादागिरी कानून से बड़ा है।

  पिथौरा एसडीएम के चक्कर लगाते विपिन व कामिनी प्रधान।

खुद को समाज के हितैषी और गरीबों के हमदर्द समझने वाले बड़े-बड़े नेता ऐसे मामले पर सामने आकर गरीबों को न्याय दिलाने में सहयोग नहीं करते हैं क्या सरकारी तंत्र और राजनेताओं की जमीर इंसानियत मर चुकी है गरीब दबे कुचले और असहाय का सहारा सेवा और परोपकार के नाम से विश्व में जाने जाने वाले ये भारत देश के बसना विधानसभा व रिखादादर में कोई ऐसे नेता नहीं है जो इन गरीब का भला कर सके इन्हें उनके ही गांव में ससम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार व न्याय दिला सके। आज रिखादादर के कैलाश पिता विपिन प्रधान अपनी पत्नी कामिनी प्रधान के साथ महासमुंद कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से दबंगों द्वारा हक की जमीन पर वर्षों से दाखिल काबिज नहीं होने देने की दंश झेलते हुए परेशान होकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इच्छा मृत्यु की मांग करने पहुंचे अब देखना होगा कि रिखादादर के कैलाश उनकी पत्नी कामिनी प्रधान को न्याय मिल पाता है कि नहीं। कैलाश व कामिनी प्रधान ने बताया की उन्हें महासमुंद कलेक्टर से मिलने के बाद अपनी हक न्याय मिलने की उम्मीद है

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