
महासमुंद।लोचन चौहान(छ.ग.सृजन) शासन और आदिवासियों के हजारों एकड़ जमीन की हेराफेरी कर अकूत सम्पति इकट्ठा करने वाला मास्टर माइंड दलाल ‘ फून्नू ‘ की ???? ????
रुपया फेक और लाटरी जीत वाली रणनीति जिले के कप्तान के सामने नहीं चली।अपने मिजाज से सख्त और कानून के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के चलते ????
आशुतोष सिंह-जिला के पहले चर्चित SP और प्रदेश के पहले IPS बन गये हैं जिनके कुशल रणनीति के चलते मोस्ट वांटेड 70 वर्षीय आरोपी ⛓️ लक्ष्मीनारायण अग्रवाल को पहली बार गिरफ्तारी करवा कर 22फरवरी को शनिवार के दिन जिला जेल में दाखिल कराया गया।
अपनी करनी अपनी भुगतनी– उक्त गिरफ्तारी की चर्चा पूरे प्रदेश में है और इस दलाल के सहयोगी बीजेपी सरकार का फायदा उठाते हुए ????फोन की घंटी बजाते रह गये पर भाजपा के ही दिल्ली दरबार तथा शासन एवं प्रदेश पुलिस हेड से निर्देशित कप्तान जी का कोई बाल भी बांका नहीं कर सका।

खपरैल से शिश महल तक का सफर-पिथौरा शहर के करीब अपने निज निवास ग्राम बरेकेल खुर्द में 40 वर्ष पहले लक्ष्मीनारायण के परिवार की एक छोटी-सी किराने की दुकान थी। वर्ष 83 में यहां राजस्व विभाग???? के बंदोबस्त विभाग ने जब यहां डेरा डाला तो फून्नू अपने नजर के सामने रिकार्ड में हेरफेरी होते हए देखा ????️ तो रुपया बनाने की चाहत ने कई उल्टे-सीधे काम करवाये और करोड़ों के शीशमहल तक जा पंहुचने वाले को बुढ़ापे में शेष दिन बिताने के लिए जेल दाखिल करवा दिया गया हैं जिसमें थाना प्रभारी विनोद कश्यप हीरो साबित हुए हैं।

फून्नू की उल्टी गिनती शुरु – अभी तक की फरारी में धनबल,नेतागिरी और जमानत के चलते फून्नू ????????बचा हुआ था । इसके खिलाफ शिकायतों का अंबार है ,7 प्राथमिकी

ईडी,बेनामी,ऐसीबी की कातिल दृष्टि,उच्च न्यायालय में झूठ बोलकर जमानत लेने का अपराध - ये सब इसके लिए प्राणघातक सिध्द होंगे और इसकी आग ???? में कई गरीब तो मर चुके है लेकिन बचे खुचे हर समय झुलसते हुए मरेगें जबकि अब पुलिस और प्रशासन सख्त हो चुकी है।आदिवासी मुख्यमंत्री साय सब में नजर रखे हुए हैं और जनता कह रही है लक्ष्मीनारायण की अब उल्टी गिनती शुरु हो गई है।
2 करोड़ की शासकीय जमीन ज्ञात हो पटेवा के ग्राम चिरको के 7 एकड़ जमीन की धोखाधड़ी में 36 लाख की रजिस्टी है और दस आरोपी हैं , मुकेश अग्रवाल भी गिरफ्तार हो चुका है,बाकी फरार ⛹????♂️ हो चुके हैं।शिकायतकर्ता लाखेनगर के पीड़ित रामअवतार अग्रवाल है जिनके जमीन की कीमत करोडों की थी पर अब फर्जीवाड़ा में शासकीय हो गई है।





















