
पिथौरा। लोचन चौहान (छ.ग.सृजन) 1/2/2025 महासमुन्द वनमंडल अंतर्गत वन परिक्षेत्र पिथौरा के गिरना बीट के जंगलों की अवैध कटाई मामले का आग अभी बुझी ही नहीं है कि बीते 31जनवरी को वन विभाग को ग्रामीणों से मिली सूचना के आधार पर मामले की जांच में जुटें वन विभाग को गिरना बीट के जंगल में एक मादा जंगली सूअर के रहस्य मय तरीके से हुई मौत ने वन विभाग के वन्य प्राणियों के सुरक्षा के दावे पर सवालिया निशान लगा दिया है। वही महासमुंद वन मंडलाधिकारी द्वारा गिरना बीट के जंगल की अवैध कटाई मामले में तत्कालीन मुख्य जिम्मेदार प्रभारी फारेस्ट फॉरेस्ट गार्ड को सर में बैठाकर आशिर्वाद देकर हटा कर अब तक बचाया जा रहा है। जिसकी शिकायत पर सीसीएफ रायपुर द्वारा गठित बीट निरीक्षण जांच दल ने भी निष्पक्ष जांच करने के बजाए पूरे मामले की शिकायत पर वनमंडलाधिकारी महासमुंद के चहेते वन रक्षक एवं वन मंडलाधिकारी के शुभ आशीर्वाद से वन विभाग में उच्च आर्थिक तरक्की प्राप्त करने में महारत हासिल कर चुके वन रक्षक को लाभ पहुंचाने की नियत से उच्च कार्यालय को वास्तविक स्थिति से अलग एवं वनरक्षक की रक्षा करने वाला मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट उच्च कार्यालय को प्रेषित की गई है जिससे जिम्मेदार दोषी मजे में है नतिजतन उक्त अवैध कटाई के जिम्मेदार फारेस्ट गार्ड के ही निशान देही पर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर अवैध कटाई के वास्तविक आंकड़ों को छुपाने की कोशिश किया गया है

तैयार करते हुए पशु शैल्य चिकित्सक



जिसमे सिर्फ तत्कालीन डिप्टी रेंजर को गिरना बीट से दुसरे निम्न स्तर की जिम्मेदारी देकर एक डीप्टीरेंजर की पदीय गरीमा को कुचला गया। वही अवैध कटाई के वास्तविक जिम्मेदार प्रभारी फॉरेस्ट गार्ड को अभयदान प्रदान कर एक मलाईदार बीट का जिम्मेदारी देकर उपकृत किया गया है। लिहाजा अब उक्त गिरना बीट में अवैध शिकार अवैध कटाई और वन्य अपराधों पर नियंत्रण तो नहीं हो पा रहा है बल्कि लगातार वहां वन्य अपराध का सिलसिला जारी है। बता दें कि निरंकुश व मनमर्जी हरकतों एवं अपने अधिनस्थ निम्न स्तर के वन कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के आरोप का दंश झेल रहे वन मंडलाधिकारी महासमुंद ने अब अन्य वन परिक्षेत्र के वनरक्षक को गिरना बीट मे पोस्टिंग दिया गया है जो अभी तक अदृश्य है लिहाजा गिरना के वनों की आंतरिक भौगोलिक स्थिति के अनुभव शील डिप्टी रेंजर को द्वेष वश हटाकर एवं जिम्मेदार तत्कालीन वन रक्षक को हटाकर दोषमुक्त किया गया एवं उनके जगह भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ एक निम्न स्तर के भृत्य खेमगिरी को चार्ज दिया गया है जिसके कारण वन्य अपराध बढ़ रहे हैं। जिससे वन्य प्राणियों और वनों के आस्तित्व खतरे में पड़ते दिख रहे हैं। वही वन विभाग को बीते दिनों गिरना के उपरकांटा तालाब के पास एक मादा जंगली सूअर जिसकी मुंह और जबड़ा बुरी तरह क्षत-विक्षत स्थिति में मृत अवस्था में मिली जिसे देखने से स्वाभाविक ही ग्रामीण और वन्य कर्मचारी अंदेशा लगा रहे हैं की उक्त मृत जंगली सूअर की मौत शिकारियों द्वारा शिकार करने की नियत से रखे गए देसी विस्फोट गोले को जंगली सूअर द्वारा भोजन समझ कर खाने से होने की चर्चा के बीच यह मामला अब सुनियोजित तरीके से वन विभाग के ठंडे बस्ते में चली गई है।



