
महासमुंद।लोचन कुमार चौहान (छ.ग.सृजन) बीजापुर बस्तर के युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या ने बस्तर के साथ समूचे छ.ग.सहित देश भर के पत्रकार जगत को झकझोर कर रख दिया है। एक निर्भीक निडर सच्चाई को दिखाने वाले पत्रकार की इस तरह से निर्मम हत्या से पूरे देश के पत्रकारों में भारी आक्रोश है और पूरा पत्रकार जगत में पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर से एक बार उठने लगी है। अघोषित रूप से संविधान के इस चौथे स्तंभ की जो दुर्दसा आज बस्तर में देखने मिल रही है। इससे सभी पत्रकार आशंकित है कि यह पत्रकारों के साथ होने वाली जानलेवा घटना अब और कितने पत्रकारों के साथ घटित होगी। पत्रकार कभी किसी व्यक्ति विशेष का विरोधी नहीं होता है पत्रकार समाज के निचले स्तर तक सामाजिक सरोकार और जनकल्याण के कार्यों को सही सही पहुंचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करते हुए सरकार सत्ता और प्रशासनिक सिस्टम को सही दिशा की तरफ आईना दिखाने कार्य करते है पत्रकार मुकेश चंद्राकर भी ऐसे ही थे जिनके निर्मम हत्या ने पत्रकारों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले सत्ताधीशों व सच्चे पत्रकारों के दुश्मन प्रशासनिक सिस्टम में बैठे सरकारी दलालों की वास्तविक वस्तु स्थिति को प्रदर्शित करता है छ.ग.प्रदेश में सच्चे पत्रकार आखिर कब तक भ्रष्ट सरकारी सिस्टम के साजिशों कर शिकार होते रहेंगें एक के बाद एक भ्रष्ट प्रशासनिक सिस्टम में बैठे सरकारी खजाने को लुटने प्रशासनिक सरकारी दलाल सच्चे पत्रकारिता को लगातार निगल रहे है। छ.ग.मे ग्राम पंचायत से लेकर जनपद जिला प्रदेश भर में लगातार भ्रष्टाचार भ्रष्टाचारियों का पोल खोलने वाले सच्चे पत्रकारिता को खत्म करने का यह षड्यंत्र कभी सफल नहीं हो सकता है। भले ही मुकेश चंद्राकर षड्यंत्र का शिकार होकर आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा किए गए जनहित के मुद्दे समस्या और उनके संघर्ष हमेशा याद रहेंगे क्योंकि बीजापुर बस्तर के मुकेश चंद्राकर द्वारा किए गए कार्य सच्चे पत्रकारिता के साथ एक विचारधारा भी है।

कलंकित करने वाले 3 दोगले राक्षस
बस्तर के दबंग पत्रकार मुकेश चंद्राकर की बस इतनी सी गलती है कि उसने करोड़ों अरबों के एक घोटाले बाज के खिलाफ मुखर होकर घोटाले बाज के कारनामों को बड़े ही बेबाकी के साथ आम जनता तक पहुंचने का काम किया। जिसका नतीजा एक पत्रकार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और विपक्ष के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर राजनीतिक रोटी सेकने के लिए फेस बुक, ट्यूटर और इंस्टाग्राम पर बैठ कर सिर्फ आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पत्रकार आज राज्यपाल महोदय के दरवाजे पर पत्रकार सुरक्षा की मांग को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे थे। जहां पत्रकारों को पुलिस वाले दरवाजे पर रोक लिए। पत्रकारों के लाख कोशिश के बाद भी राज्यपाल महोदय से ना तो मिलने दिया गया और ना ही पत्रकारों से ज्ञापन लिया गया।
इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कितने संवेदनशील है।
गौरतलब है कि शासन प्रशासन के सहयोग से जनता की गाढ़ी कमाई पर रसोइए से अरबपति बने एक ठेकेदार ने सिर्फ पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या नहीं की है। उसने 140 करोड़ आबादी वाले लोकतांत्रिक देश के संविधान की हत्या की है। जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों की निर्मम हत्या कर उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंक दिया जाता है फिर किसी झूठे ब्लैक मेलिंग के आरोप में थाने में केश दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया जाता है।

निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के बाद आज फिर से देश के पत्रकारों को एक मंच पर एक सूत्र में पत्रकार सुरक्षा की मांग को लेकर आवाज उठाते देखा जा रहा है। क्या ये आवाज सरकार की कान तक पहुंचेगी? क्या छत्तीसगढ़ राज्य के मुखिया अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए पत्रकारों की सुरक्षा की जवाबदेही तय करेंगे? कि हत्यारों पर कार्यवाही और उनके द्वारा किए गए बेजा कब्जा हटा कर स्वयं अपनी पीठ थपथपाने लगेंगे।
लोचन कुमार चौहान
संपादक- छत्तीसगढ़ सृजन
मो.7441148115




