Post: बुधराम की दिव्यांगता से नहीं, आत्मनिर्भरता से बनी पहचान।

बुधराम की दिव्यांगता से नहीं, आत्मनिर्भरता से बनी पहचान।

163 Views

महासमुंद(छ.ग.सृजन) 21 अक्टूबर 2024/ महासमुंद ज़िले के लखनपुर, झलप निवासी श्री बुधराम साहू, जो 70 प्रतिशत अस्थि बाधित हैं। उन्होंने अपनी दिव्यांगता को कभी अपने सपनों की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया बल्कि एक सफल व्यवसायी के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।
श्री साहू की प्रेरणादायक यात्रा तब शुरू हुई जब समाज कल्याण विभाग ने उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की। इस ट्राइसाइकिल ने उनके जीवन में नया मोड़ लाया, जिससे उन्हें आस-पास के गांवों में साग-सब्जी, मशरूम, इमली चॉकलेट जैसी चीजें बेचकर अपनी आजीविका शुरू करने का अवसर मिला। यह ट्राइसाइकिल उनकी स्वतंत्रता का प्रतीक बन गई और उनके जीवन को गतिशील एवं आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया।
   वर्तमान में, श्री साहू 40 बत्तख और 80 देशी मुर्गियों का पालन कर रहे हैं। उनकी मुर्गियाँ प्रतिदिन अंडे देते हैं, चूजों में परिवर्तित उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। श्री बुधराम साहू ने यह साबित कर दिया है कि दिव्यांगता कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

बत्तख और मुर्गियों का पालन कर आमदनी कर रहें


 श्री बुधराम ने बताया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा, उन्हें मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए 95 हजार रुपए का ऋण प्रदान किया गया। उन्होंने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया और धीरे-धीरे अपने मुर्गी पालन व्यवसाय को सफलतापूर्वक विकसित किया। उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम यह रहा कि वे हर महीने लगभग 15 हजार रुपए की आमदनी करने लगे। उन्होंने अपने ऋण की पूरी राशि समय से पहले ब्याज सहित चुका दी, जिसके फलस्वरूप सरकार ने ब्याज की राशि उन्हें सब्सिडी के रूप में वापस कर दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Recent Post