Post: धान गेहूं ही नहीं इन 5 फसलों की करें खेती…किसानों पर होगी धन की वर्षा।

धान गेहूं ही नहीं इन 5 फसलों की करें खेती…किसानों पर होगी धन की वर्षा।

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छत्तीसगढ़ सृजन/कृषि दुनिया-धान, गेहूं जैसे पारंपरिक फसलों की खेती भारत में अब किसानों के लिए फायदे का सौदा नहीं है. इसी कारण किसानों का खेती से मोहभंग भी हो रहा है.आज हम 5 ऐसी फसलों और सब्जियों की बात कर रहे हैं जिनकी खेती से किसान मालामाल हो सकते हैं.


बलुई और दोमट मिट्टी में होने वाली हल्दी की फसल किसानों को निश्चित रूप से मालामाल बना सकती है. हल्दी की फसल के लिए नरेंद्र 01 का बीज अच्छा माना जाता है. बड़े आसानी से 7 महीने में हल्दी की फसल तैयार होती है. एक बीघा में कम से कम 70 से 80 क्विंटल हल्दी की उपज हो जाती है. अग रहल्दी का मूल्य ₹100 के हिसाब से भी देखें तो किसान 8 लाख का मुनाफा कमा सकते हैं.

पर्याप्त नमी के बीच खेत को उपजाऊ बनाकर अगर लौकी की खेती किसान करें तो पैसों की बारिश हो सकती है. लौकी की अच्छी प्रजातियों में काशी बहार, काशी कुंडल, नरेन्द्र रश्मि और माधुरी शामिल है. ये ज्यादा उत्पादन देने वाली प्रजातियां हैं . लौकी की हाईब्रिड किस्म के बीजों से 1 बीघा में 400 क्विंटल और उन्नत किस्मों के बीजों से 250 क्विंटल उपज प्राप्त हो सकता है.


परवल के नाम से मशहूर इस सब्जी का कोई जवाब ही नहीं है. इसमें नर और मादा पौधे अलग-अलग होते हैं, इसलिए 9 नर पौधे के साथ एक मादा पौधे का रोपण जरुर करें, तभी शानदार उपज मिलेगा. किसान अगर परवल की खेती अच्छे से करें तो एक एकड़ में लगभग 50 से 60 क्विंटल उपज मिल सकता है. बाजार में अभी इसकी कीमत 100 रुपए किलो चल रही है. अगर 80 रुपए के हिसाब से भी देखें, तो एक एकड़ में 4,80,000 रुपया किसान कमा सकते हैं. हालांकि सीजन के साथ इसका दाम कम होना शुरू हो जाएगा.

टमाटर को अगर नोट छापने की मशीन कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा. टमाटर की खेती में मुनाफा ही मुनाफा है. सही तकनीक और हाईब्रिड बीज के साथ टमाटर की खेती से बएक एकड़ में कम से कम 250 क्विंटल उत्पादन मिल जाता है. इस आधार पर 4 लाख का मुनाफा तय है.

सूरन की गजेंद्र 01 प्रजाति का कोई जवाब नहीं है. कृषि विभाग के शोध में पाया गया है कि बिना खाद उर्वरक इसका उत्पादन बहुत अच्छा होता है. बवासीर के लिए तो यह रामबाण है. 1 बीघा में 100 क्विंटल सूरन का उपज होता है. जिसकी कीमत कम से कम 4 लाख रुपए तक होगी. ये जानकारी मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विज्ञान के एक एचओडी प्रोफेसर ने दी है.

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