Post: विधी विरुद्ध पदोन्नति एवं बिना कार्य अनुभव के सहायक शिक्षक से ग्रंथपाल बन सातवें आठवें लेवल उच्च वेतनमान ले रहे ग्रंथपालों से जल्द होगी करोड़ों की वसूली…

विधी विरुद्ध पदोन्नति एवं बिना कार्य अनुभव के सहायक शिक्षक से ग्रंथपाल बन सातवें आठवें लेवल उच्च वेतनमान ले रहे ग्रंथपालों से जल्द होगी करोड़ों की वसूली…

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महासमुन्द 15.05.2026 महासमुंद जिले में वर्ष 2011-12 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी रहे अनेक सहायक शिक्षकों द्वारा पदोन्नति के लालच में नियम विरुद्ध ग्रंथपाल पद पर पदोन्नति लिया गया है क्योंकि वे सहायक शिक्षक एलबी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी थे महासमुन्द जिले के उन सभी सहायक शिक्षक एलबी से ग्रंथपाल बने सभी कर्मचारीयों को जिस समय ग्रंथपाल पद पर पदोन्नत दी गई उस दौरान ग्रंथपाल पद के लिए शासन द्वारा निर्धारित अनिवार्य योग्यता एवं कार्य अनुभव भी नहीं था फिर भी उन्हें पदोन्नति दे दी गई इसलिए प्रथम दृष्टया ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नति किया जाना ही विभागीय नियमों के विपरीत है लेकिन महासमुंद जिले में ग्रंथपाल के पद के लालच में अनेक सहायक शिक्षको द्वारा बिना कोई विभागीय नोटिफिकेशन या विज्ञापन व भर्ती प्रक्रिया के बीना ही पदोन्नति से ग्रंथपाल बन गए हैं चतुराई तो देखो बाद में ये लोगों के द्वारा बाद में इस पद के लिए आवश्यक योग्यता के लिए बाद में  पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक या डिप्लोमा डिग्री (B.lib.) डिग्री ले लिया गया है और अब वर्षों पूर्व से अपने जुगाड़ से लाइब्रेरियन पद पर मिलने वाली की उच्च  मैट्रिक्स लेवल वेतनमान सातवां आठवां लेवल का भी प्रतिमाह वेतन ले रहे लेकिन विभागीय नियम कहता है ग्रंथपाल पद में पदोन्नति के लिए कम से कम 3 साल का कार्य अनुभव भी अनिवार्य होती है जो महासमुंद जिले में पूर्व में सहायक शिक्षक से पदोन्नति से ग्रंथपाल बने कर्मचारीयों के पास नहीं है…. लेकिन बिना कार्य अनुभव के महासमुंद जिले में सहायक शिक्षक से ग्रंथपाल बनकर भारी भरकम शासन के खजाने के राशि को सातवां आठवां लेवल का वेतन लेकर प्रतिमाह शासन के खजाने को लूट रहे हैं और यह लुट सुनियोजित तरीके से शासन की आंखों में धूल झोंक कर नियम कायदों को कुचल कर किया जा रहा है छत्तीसगढ़ सृजन ने जब इस पूरे मामले की शिकायत विभागीय उच्च कार्यालय को किया गया सभी के हाथ पांव फूलने लगे… जिले के ग्रंथपालों की टोली में मानो खलबली मच गई है जानकारी के अनुसार इस मामले की शिकायत पर चल रहे जांच को प्रभावित करने के लिए ग्रंथपालों का एक दस्ता महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जाकर मामले को रफा दफा करने के लिए जुगत में लग गए है

लेकिन हमारा संकल्प है की सच्चाई को हम सामने लाएंगे और विधि विरुद्ध तरीके से शासन के खजाने को लूटने वाले इन ग्रंथपालों के मामले में और भी अधिक गंभीरता से छ.ग. राज्य स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को महासमुन्द जिले के इस सामूहिक सुनियोजित घोटाले एवं लापरवाही के संबंध में त्वरित कार्रवाई हेतु मामले की गंभीरता से भी अवगत कराया जावेगा एवं विधि विरुद्ध तरीके से वेतन के रुप में सातवें आठवें लेवल के रूप में अतिरिक्त राशि ले रहे ग्रंथपालों से वसूली की कार्रवाई होगी… बताया जा रहा है की लगभग 40 से 50 करोड रुपए से भी अधिक की शासकीय राशि की वसूली इन सभी ग्रंथपालों से किया जाएगा…. सहायक शिक्षक से ग्रंथपाल बने इन समस्त ग्रंथपालों की पदोन्नति निरस्त किए जाने की बात भी सामने आ रही है…. क्रमशः….

कौन होते हैं ग्रंथपाल कैसी होती है उनकी नियुक्तियां

शिक्षा विभाग में ग्रंथपाल (Librarian) के पद शैक्षणिक संस्थानों से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक विभिन्न स्तरों पर होते हैं। मुख्य रूप से इन पदों को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
1. विद्यालय स्तर
यह सबसे आम स्तर है जहाँ ग्रंथपालों की नियुक्ति होती है:
माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय: सरकारी हाई स्कूल और इंटर कॉलेजों में ‘पुस्तकालय अध्यक्ष’ या ग्रेड-II/ग्रेड-III के पद होते हैं।
केन्द्रीय विद्यालय एवं नवोदय विद्यालय यहाँ स्थायी तौर पर प्रोफेशनल लाइब्रेरियन नियुक्त किए जाते हैं।
निजी स्कूल: मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में सीबीएसई या आईसीएसई मानकों के अनुसार ग्रंथपाल का होना अनिवार्य है।
2. उच्च शिक्षा स्तर:
कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर ग्रंथपाल के पद अधिक जिम्मेदारी और उच्च वेतनमान वाले होते हैं:
शासकीय महाविद्यालय: स्नातक और स्नातकोत्तर कॉलेजों में सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष (Assistant Librarian) के पद होते हैं।
विश्वविद्यालय: यहाँ पदानुक्रम विस्तृत होता है, जैसे— मुख्य ग्रंथपाल,उप-ग्रंथपाल और सहायक ग्रंथपाल।
3. तकनीकी एवं व्यावसायिक संस्थान
शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले तकनीकी शिक्षा बोर्डों में भी ये पद होते हैं:
पॉलीटेक्निक कॉलेज और आईटीआई: यहाँ तकनीकी पुस्तकों के प्रबंधन के लिए ग्रंथपाल होते हैं।
शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान (DIET): जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में भावी शिक्षकों के संदर्भ हेतु पुस्तकालय होते हैं, जहाँ ग्रंथपाल की नियुक्ति की जाती है।
4. सार्वजनिक पुस्तकालय:
कई राज्यों में ‘भाषा एवं पुस्तकालय विभाग’ शिक्षा विभाग के साथ मिलकर काम करता है:
राज्य केंद्रीय पुस्तकालय:
जिला पुस्तकालय:
मंडल/पंचायत स्तर के पुस्तकालय
5. प्रशासनिक एवं शोध संस्थान: राष्ट्रीय और राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषदों में विशेष संदर्भ पुस्तकालय होते हैं।
शिक्षा निदेशालय: कुछ राज्यों में विभागीय रिकॉर्ड और संदर्भ के लिए मुख्यालय स्तर पर भी ग्रंथपाल के पद सृजित होते हैं।
पात्रता :
इन पदों के लिए आमतौर पर B.Lib.Sc. (पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक) या M.Lib.Sc. की डिग्री अनिवार्य होती है। विद्यालय स्तर के लिए कई बार C.Lib. (प्रमाण पत्र) या D.Lib. (डिप्लोमा) धारक भी पात्र होते हैं। उच्च पदों के लिए UGC-NET या Ph.D. की आवश्यकता हो सकती है।

कैसे और कौन सी प्रक्रिया में होती है ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नति

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग (स्कूल शिक्षा विभाग) के अंतर्गत ग्रंथपाल की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया मुख्य रूप से ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संवर्ग) भर्ती नियम’ द्वारा संचालित होती है।
यहाँ इसकी विस्तृत प्रक्रिया दी गई है:
1. सीधी भर्ती की प्रक्रिया:
ग्रंथपाल के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए समय-समय पर ‘लोक शिक्षण संचालनालय’ (DPI) द्वारा विज्ञापन जारी किया जाता है।
शैक्षणिक योग्यता: आमतौर पर किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक के साथ पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक (B.Lib.) या डिप्लोमा (D.Lib.) अनिवार्य होता है।
चयन का आधार: चयन मुख्य रूप से व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से होता है।
आयु सीमा: सामान्यतः 21 से 35 वर्ष (छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों और आरक्षित वर्गों के लिए शासन के नियमानुसार छूट का प्रावधान होता है)।
दस्तावेज सत्यापन: लिखित परीक्षा की मेरिट सूची के आधार पर सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है, जिसके बाद नियुक्ति आदेश जारी होते हैं।
2. पदोन्नति की प्रक्रिया:
शिक्षा विभाग में पदोन्नति ‘वरिष्ठता-सह-योग्यता’ के आधार पर होती है।
चैनल: निचले संवर्ग के कर्मचारियों (जैसे सहायक ग्रंथपाल या स्कूल के अन्य पात्र कर्मचारी, यदि नियमों में प्रावधान हो) को ग्रंथपाल के पद पर पदोन्नत किया जाता है।
अनुभव: पदोन्नति के लिए सामान्यतः संबंधित निचले पद पर 3 से 5 वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य होती है।
विभागीय पदोन्नति समिति (DPC): एक समिति सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय चरित्रावली और वरिष्ठता सूची का अवलोकन करने के बाद पदोन्नति की अनुशंसा करती है।
ई एवं टी संवर्ग: छत्तीसगढ़ में ‘ई’ – शिक्षा विभाग) और ‘टी’ – आदिवासी विकास विभाग) दो संवर्ग हैं। पदोन्नति उसी संवर्ग के भीतर की जाती है जिसमें कर्मचारी कार्यरत है।
मुख्य बिंदु जो ध्यान रखने चाहिए:
सेटअप: स्कूलों में ग्रंथपाल के पद स्वीकृत सेटअप के आधार पर ही भरे जाते हैं।
नियमों में बदलाव: समय-समय पर शासन द्वारा भर्ती नियमों में संशोधन किया जाता है (जैसे हाल के वर्षों में सीधी भर्ती की प्राथमिकता बढ़ी है)।

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