Post: जिला खाद्य अधिकारी “अजय यादव” ही निकला जब्त एलपीजी कैप्सूल से 1.5 करोड़ के गैस गबन का मुख्य षड्यंत्रकारी।

जिला खाद्य अधिकारी “अजय यादव” ही निकला जब्त एलपीजी कैप्सूल से 1.5 करोड़ के गैस गबन का मुख्य षड्यंत्रकारी।

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महासमुन्द 09.05.2024 खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर ने बनायीं गबन की योजना।

पंकज चंद्राकर एवं रायपुर के मनीष चौधरी को दी गयी थी, उपयुक्त एजेंसी ढूंढने और गबन के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी। विभिन्न संभावित एजेंसियों से लेन देन की बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल से 80 लाख में हुई थी डील।

विभिन्न संभावित एजेंसियों से लेन देन की बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल से 80 लाख में हुई थी डील।

सौदेबाज़ी में रकम निर्धारित करने के लिए सुपुर्दनामे के चार दिन पहले, 26 मार्च को अजय और पंकज ने सिंघोड़ा जाकर किया था उपलब्ध गैस का आंकलन।

6 कैप्सूल में 102 मीट्रिक टन गैस की उपलब्धता आकने के बाद, एक करोड़ उगाही की योजना बनायीं गयी थी।

विभिन्न गैस एजेंसियों से सौदेबाज़ी की बातचीत के बाद 28 मार्च को ही ठाकुर पेट्रोकेमिकल के साथ 80 लाख में हुई थी फाइनल डील|

खाद्य अधिकारी अजय के हिस्से में 50 लाख, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी के हिस्से में क्रमशः 20 और 10 लाख।

पूर्व निर्धारित षड्यंत्र के तहत खाद्य अधिकारी के द्वारा खाद्य विभाग के कर्मचारियों को सुपुर्दनामा के कागजात में हस्ताक्षर न करने के दिए गए थे आदेश।

आपराधिक मंशा से कैप्सूल के वजन न करने के भी दिए गए थे स्पष्ट निर्देश, पुलिस कर्मचारियों को किया गया गुमराह।

सुपुर्दनामे के बाद एक हफ्ते में 6 कैप्सूल से 92 टन गैस निकालने के बाद कैप्सूल्स का कराया गया वजन।

कैप्सूल के वजन और पंचनामा में आपराधिक कूटरचना, खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बना वजन का फ़र्ज़ी पंचनामा, कार्यालय में ही किया गया हस्ताक्षर।

वास्तविक वजन के प्रक्रिया के पहले ही मात्रा का उल्लेख कर तैयार किया गया और हस्ताक्षर किया हुआ पंचनामा कलेक्टोरेट में हो गया था जमा।

खाद्य अधिकारी अजय यादव के हिस्से के 50 लाख का हुए थे तत्काल भुगतान।

बकाया 30 लाख नकद मिलने में देरी के एवज में संतोष ठाकुर से मनीष चौधरी के अकाउंट में गिरवी (surety) के रूप में डलवाया गया था 30 लाख, नकद मिलने पर अकाउंट से पैसे किये गए वापस।

पूर्व के प्रेस ब्रीफ में निम्नलिखित विषयों को किया गया था स्पष्ट।

तकनीकी विषय विशेषज्ञ के जांच रिपोर्ट के अनुसार सभी कैप्सूल मैकेनिकल फिट, लीकेज की संभावना नहीं।

व्यावहारिक रूप से 100 टन गैस का लीकेज बिना सैकड़ों विस्फोट जैसी घटनाओं के बिना संभव नहीं।

सुपुर्दनामा की पूरी प्रक्रिया खाद्य विभाग के माध्यम से हुई, एजेंसी का चयन और कागजी वेरिफिकेशन खाद्य विभाग के द्वारा।

40 सदस्यीय टीम के 15 दिनों के निरंतर प्रयास, टेक्निकल एनालिसिस, सीडीआर विश्लेषण, साइंटिफिक इंटेरोगेशन और सूक्ष्म विवेचना से हो सका केस का खुलासा।

सन्दर्भ और मूल घटना
थाना सिंघोडा के अपराध क्रमांक 96/25 धारा 305 (ई), 287, 3(5), 221, 351(2) बीएनएस,ईसी एक्ट-1955 की धारा 3,7 में जप्तशुदा 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक क्रमांक CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663, CG 07 CX 7472, ΚΑ 01 ΑΗ 4318, CG 12 BS 4295 में LPG गैस भरे हुए ट्रक को माह 24 दिसम्बर 2025 में जप्त किया गया था। भीषण गर्मी पडने पर तथा थाना सिंघोडा में सुरक्षा के मानक उपबंधों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए, उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने हेतु पुलिस अधीक्षक महासमुन्द के माध्यम से जिला कलेक्टर महासमुन्द जिला महासमुन्द को पत्राचार किया गया था। जिला कलेक्टर जिला महासमुन्द के द्वारा खाद्य विभाग जिला महासमुन्द को उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने हेतु निर्देशित किया गया था, उक्त आदेश के परिपालन में दिनांक 30.03.26 को खाद्य विभाग से खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी एवं मनीष यादव महासमुन्द के उपस्थिति में ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के संतोष सिंह ठाकुर को 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुपुर्दनामा में दिलवाया गया तथा सुपुर्दनामा के बाद संतोष सिंह ठाकुर के द्वारा उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को अपने कर्मचारियों के माध्यम से थाना सिंघोडा से ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर ले गये। उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षार्थ रखने हेतु ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स संतोष सिंह ठाकुर पिता मूलसिंह ठाकुर उम्र 56 वर्ष साकिन ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर छ.ग. को न्यस्त किया गया था। जांच के दौरान प्राथी एवं गवाहों का कथन लिया गया प्राथी के. सुब्रमण्यिम के 03 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक क्रमांक CG 07 CX 7245, CG 07 CX 7244, CG 07 CS 1663 में करीब 50 टन LPG गैस कीमती लगभग 45,00,000 रूपये तथा गवाह गुणाशेखरन के 02 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक CG 07 CX 7472, ΚΑ 01 AH 4318 में 37 टन LPG गैस कीमती 32,00,000 रूपये को ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर के द्वारा मिलीभगत कर उक्त 05 नग LPG कैप्सुल ट्रक गैस भरा हुआ के संबंध में आपराधिक न्यास भंग करना पाया गया। अतः कुल 87 टन LPG गैस कीमती करीब 77,00,000 रूपये का ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर तथा अन्य डायरेक्टर, संचालक, मैनेजर व अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 42/26 धारा 316(3), 3(5) बीएनएस का अपराध घटित करना पाये जाने पर धारा सदर का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

कब हुई षड़यंत्र की शुरुआत-
सुपुर्दनामा के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय से कलेक्टोरेट कार्यालय को लिखे गए प्रथम पत्र के कुछ दिन बाद ही 23 मार्च को हुई षड्यंत्र की पहली बैठक। खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने लिखी 1 करोड़ के गबन की पटकथा। अजय यादव ने पंकज चंद्राकर को दिया क्रियान्वयन और सही एजेंसी को ढूंढने का जिम्मा। पंकज चंद्राकर ने पहली षड्यंत्रकारी बैठक में ही सुझाया मनीष चौधरी का नाम। मनीष को दिया गया विभिन्न एजेंसियों को संपर्क करने का काम।

कैसे हुआ मूल्यांकन-
गैस की मात्रा के जानकारी के बिना पैसो के मूल्यांकन में मुश्किल हो रही थी डील, 26 मार्च को दोनों सूत्रधार खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर गैस की मात्रा का आंकलन करने पहुंचे सिंघोड़ा थाना। 6 कैप्सूल में कुल 105 मीट्रिक टन का अनुमान लगाया गया। तुरंत 1 करोड़ के सपने पर लगा दी गयी मुहर। मनीष चौधरी को फ़ोन पर संपर्क कर उसी दिन संभावित एजेंसी को बुलाने के लिए बताया गया। मात्रा और पैसे के बाद मनीष ने भी देरी नहीं की| 26 मार्च को ही रात 11 बजे तीनो षड्यंत्रकारियों की एक गैस एजेंसी के मालिक के साथ मध्यरात्रि को हुई बैठक। पहली एजेंसी के मालिक ने मजबूती से किया इसमें शामिल होने से इनकार।
मनीष को और एजेंसियों से संपर्क करने का दिया गया जिम्मा। मनीष चौधरी ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल से पक्की की डील। खाद्य अधिकारी के 80 लाख के मांग को ठाकुर ने माना और सुपुर्दनामे लेने के लिए हामी भरी।

किसकी क्या जिम्मेदारी
खाद्य अधिकारी अजय यादव थे परदे के पीछे के मुख्य खिलाडी, पंकज चंद्राकर के जिम्मे था गबन और डील का चेहरा बन कर क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी। डील को महासमुंद से दूर रखने के लिए रायपुर के मनीष चौधरी को दी गयी थी रायपुर के एजेंसियों से बात कर डील को अंतिम कड़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी।

किसके हिस्से में कितना, पैसे के लेन देन का क्रम और प्रक्रिया-
प्रयास १ करोड़ के डील की थी। ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक के साथ 80 लाख में फाइनल हुई थी डील। सबसे बड़ा 50 लाख का हिस्सा खाद्य अधिकारी अजय यादव को सुपुर्दनामे के दूसरे ही दिन 31 मार्च को घर में डिलीवर हुआ| 30 लाख रकम जुगाड़ने में हो रही थी देरी। ठाकुर पर भरोसा भी कम था| ठाकुर के अकाउंट से मनीष चौधरी के अकाउंट में गिरवी surety के रूप में 30 लाख डलवाया गया। बाद में 1 हफ्ते के अंदर ठाकुर से मनीष चौधरी को 30 लाख रकम दिया। 10 लाख मनीष चौधरी ने अपने हिस्से में रखा और 20 लाख पंकज चौधरी को अपने हिस्से के मिले| रकम के लेन देन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनीष चौधरी ने अपने अकाउंट में गिरवी रखे हुए 30 लाख ठाकुर के अकाउंट में वापस कर दिए।

कूटरचित वजन पंचनामा की कहानी-
सिर्फ गैस और पैसों के साथ ही नहीं, कागजों के साथ भी खेला गया खेल।कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे के बाद एक हफ्ते तक एक एक करके कैप्सूल खाली करने के बाद 6 एवं 8 अप्रैल को ख़ाली कैप्सूल्स का कराया गया वजन। वजन के दौरान न तो ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक उपस्थित थे न ही कोई गवाह, वजन प्रक्रिया का एक फ़र्ज़ी पंचनामा महासमुंद में खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बनवाया गया। उस पंचनामा में भी वही षड्यंत्रकारी मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर स्वतंत्र गवाह बने जो कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे में गवाह बनाये गए थे और जिन्होंने खुद ही 92 टन एलपीजी गैस का गबन कर 80 लाख रुपये उगाही किए थे।
आश्चर्य यह भी है की ये कूटरचित वजन पंचनामा का दस्तावेज 8 अप्रैल के दोपहर को ही कलेक्टोरेट के आवक जावक में पहुंच गए थे। जबकि वजन कांटा के रजिस्टर और पर्ची के अनुसार एक कैप्सूल का वजन 8 अप्रैल को ही, रात 8 बजे के बाद हुआ है।

जप्त सामग्री-
01-पंकज चंद्राकर-01 नग मोबाईल, नगदी 13000/- रूपये।
02-मनीष चैधरी- सोनू ट्रेडर्स दूकान से 5,11,900/- रूपयें का होम अप्लायंस का सामान, 01 नग मोबाईल एवं नगद 8000/- रू.।
03- अजय कुमार यादव- 1 नग मोबाईल, नगदी 78,800/-रू. व एक काले रंग का बैंग।

पल्ला झाड़ने की कार्ययोजना-
कोर्ट से सुपुर्दनामा आदेश और पुलिस की सक्रियता के बाद सभी षड्यंत्रकारियों के होश उड़ने शुरू हो गए। 20 अप्रैल के रात 8 से 10 बजे तक पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और संतोष ठाकुर की आरंग के ढाबे में हुई मंथन बैठक, सब कुछ पुलिस पर डालकर पल्ला झाड़ने और दबाव बनाने की बनाई थी योजना| सबको अपने अपने बयान पर कायम रहने के दिए गए थे निर्देश |

गिरफ्तार आरोपी-
1-पंकज चंद्राकर पिता पवन चंद्राकर उम्र 35 वर्ष सा. हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी एमआईजी 140, बीटीआई रोड़ महासमुन्द जिला महासमुन्द।
2-मनीष चौधरी पिता स्व0 राधेश्याम चौधरी उम्र 52 वर्ष पता-ए-2/502 लखजोरा अपार्टमेंट मेन रोड मोवा रायपुुर।
3-अजय कुमार यादव पिता रामफल यादव उम्र 49 वर्ष सा. बी. 70 फेस 02, राजकिशोर नगर बिलासपुर जिला बिलासपुर छ.ग. हाल हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी महासमुन्द जिला महासमुन्द छ.ग.।

जुमला जप्त संपत्ति किमती- 6,11,700 रू

इस प्रकार उपरोक्त प्रकरण में आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षडयंत्र, कूट रचना एवं शासकीय संपत्ति का व्यापारिक हित हेतु हेराफेरी कालाबाजारी करना पाये जाने से धारा 316(3), 316 (5), 61, 238, 336 (3), 338, 340(2) बीएनएस 3,7 ई.सी. एक्ट लगाया जाकर की जा रही है कड़ी कार्यवाही।

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