
महासमुंद 6.5.2026। महासमुंद जिला अंतर्गत पिथौरा तहसील के ग्राम पंचायत डोंगरीपाली के सरपंच पति और भाजपा नेता दुलीकेशन साहू व उसकी पत्नी व सरपंच किरण साहू के विरुद्ध जाति सूचक गाली गलौज कर आदिवासी की जमीन पर जबरदस्ती करने एवं आदिवासी की निजी स्वामित्व की जमीन के खड़े फसलों को जबरदस्ती जप्त करवा कर जमीन को हड़पने की नियत एवं अपनी उच्च राजनीतिक पहुंच एवं दबंगई से पिथौरा एसडीएम के माध्यम से जप्त करवा कर डोंगरीपाली के मनबोध कोड़ाकू व उनके आदिवासी गरीब परिवार को जाति सूचक गाली गलौज करने एवं जान से मारने की धमकी देकर प्रताड़ित करने के मामले में पीड़ित आदिवासी मनबोध कोड़ाकु निवासी ग्राम टेका सुंदरगढ़पारा एवं कैलाशपुर डोंगरीपाली के शिकायत पर पिथौरा पुलिस ने आज भाजपा नेता दुलीकेशन साहू और उनके पत्नी व डोगरीपाली सरपंच किरण साहू के खिलाफ एस सी एस टी एक्ट एवं अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।..

पीड़ित आदिवासी परिवार

पीड़ीत आदिवासी मनबोध कोड़ाकू
बताया जा रहा है कि विगत कई वर्षों से मनबोध कोड़ाकू पिता माधव कोड़ाकू व उनके परिवार को ये भाजपा नेता भारतीय जनता पार्टी मे अपनी उच्च पहुंच होने का धौंस दिखाकर एवं कानून कायदों को ताक में रखते हुए लगातार कानून को अपनी सत्ता और नेतागिरी की ताकत से कुचलने की कोशिश करता रहा स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार के भारतीय जनता पार्टी के उच्च नेताओं के करीबी और उच्च पहुंच होने के कारण ये व्यक्ति का मनोबल इतना बढ़ चुका था कि संवैधानिक कानून कायदों को तो ये कुछ भी नहीं समझता था अपनी उच्च राजनीतिक पहुंच होने के अहंकार में ऐ इतने अंधे हो चुके थे की ये इनके अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने पर ये भाजपा नेता किसी को भी किसी भी झूठे मामले में फंसाने की बार-बार धमकी भी दिया करता था और इसी तरह अपने प्रभाव जमाकर अपने ग्राम पंचायत में भी ये नेता ग्राम पंचायत को आबंटित विभिन्न विकास कार्य के लिए आबंटित सार्वजनिक मद की करोड़ों रुपए की शासकीय धनराशि भी इन्होंने अपनी दबंगई से भोले भाले ग्रामीणों की उनके मुलभूत विकास और हक के लिए शासन द्वारा आबंटित शासकीय धनराशि को हड़पकर गबन कर भारी भ्रष्टाचार में भी संलिप्त रहा हैं..लगातार प्रताड़ना झेल रहे ये गरीब आदिवासी परिवार इस भाजपा नेता के अत्याचार और प्रताड़ना से इतने परेशान हो चुके थे की आदिवासी परिवार सामूहिक रुप से मुख्यमंत्री निवास छ.ग.शासन के सामने आत्मदाह करने को मजबुर होने जैसी नौबते आ चुकी थी लेकिन संघर्ष और शील की परिभाषा को अपने आचरण और जीवटता से समाज के सामने प्रत्यक्ष प्रतिपादन करने वाले गरीब आदिवासी मनबोध कोड़ाकु और उनके परिजनों को आज पिथौरा पुलिस द्वारा पूरे मामले पर एफआईआर दर्ज करने से उन्हें न्याय मिला है और तानाशाही और गुंडागर्दी चाहे जितना भी बड़ा क्यों ना हो एक न एक दिन उसे सत्य और कानून के दहलीज पर घुटने टेकने ही पड़ते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण यह पूरा प्रकरण है

