
लोचन चौहान
प्रधान संपादक-छत्तीसगढ़ सृजन
मो. नं. 7441148 115
महासमुंद/रायपुर। 06.02.2026 विशेष/ महासमुंद वनमंडल के पिथौरा वनपरीक्षेत्र अंतर्गत बगारपाली के वन कक्ष क्रं.211एवं 212 में सिलसिलेवार 10 जंगली सुअरों की मौत होने की खबर से महासमुंद वनमंडल में हड़कंम मची हुई है। दिनांक 03/02/2026 को “छत्तीसगढ़ सृजन” पत्रिका ने पूरी घटना की शिकायत प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक छ.ग.अरुण कुमार पाण्डेय से करने से पड़ी फटकार के बाद चीर निंद्रा से उठकर हरकत में आया वन परिक्षेत्र पिथौरा के आला अफसरों का कारनामा उजागर हुआ है कारनामा बड़ा विचित्र है विदित है की एक निश्चित संरक्षित भूभाग में फैले वन कक्षों में लगातार 10 जंगली सुअरों एक नेवले को अज्ञात शिकारियों द्वारा मौत के घाट उतार दिया जाता है और बड़े आराम से वन्य अपराधों में संलिप्त आज्ञात अपराधी पूरे जंगल में हाहाकार मचाते नंगा नर्तन कर वन विभाग एवं डीएफओ एसडीओ और रेंजर के छाती को कुचल डालते हैं लेकिन फॉरेस्ट गार्ड डिलेश्वरी दीवान और डीप्टी रेंजर छबीराम साहु द्वारा अपनी नाकामियों और इस मामले पर अपनी संलिप्तता को छिपाने मामले के उजागर होने के डर से इस पूरे प्रकरण पर से विभाग और अपने उच्च अधिकारियों से इस अतिसंवेदनशील अवैध शिकार के प्रकरण को छुपाने जंगल के अलग-अलग जगह पर गड्ढे खोदवाकर सभी मृत जंगली सुअरों व नेवले को दफन करवा दिया जाता है

गड्ढे में दफन जंगली सूअर
और रेंजर से लेकर एसडीओ डीएफओ किसी को भनक तक नहीं लगता है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वन परिक्षेत्र पिथौरा के साथ-साथ पूरे महासमुंद मंडल में किस तरह से आला अफसर वन्य प्राणियों एवं वनों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं यह पूरी पूरी लापरवाही एवं वन संरक्षण संवर्धन का खोखले दावे करने वाले भ्रष्ट एवं लापरवाह अफसरों के निष्क्रिय कार्य प्रणाली एवं विभागीय लापरवाही की घोतक उदाहरण है।

जंगली सूअर के मौत की जांच व पीएम करवाते हुए जांच दल
“छ.ग.सृजन पत्रिका द्वारा शिकायत पर एक्शन में आए वन विभाग के आला अफसरों को रातों-रात मौके में जाकर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराने के बाद एवं प्राथमिक जांच में स्पष्टत: फॉरेस्ट गार्ड डिलेश्वरी दीवान द्वारा जानबूझकर अपनी कर्तव्यों के विपरीत कार्य करते हुए इतनी अधिक संख्या में वन्य प्राणियों के अवैध शिकार होने की सत्यता को जानते हुए जान बुझकर वनविभाग एवं विभागीय उच्च अधिकारियों से सत्यता छिपाने और तो और उनके द्वारा जंगली सुअरों के मृत शरीर को ठिकाने लगाने के लिए अपने चौकीदारों के माध्यम से जमीन में गड्ढा खोदकर दफनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है मौका निरीक्षण जांच में यह बात भी सामने आई है कि फॉरेस्ट गार्ड डिलेश्वरी दीवान के कहने पर चौकीदारों के द्वारा एक मृत नेवले को भी दफन करने की बात कबूल किया गया लेकिन मृत नेवले का बाडी दफन स्थल से गायब मिला।

जिससे परिलक्षित होता है कि फॉरेस्ट गार्ड को इस घटना को अंजाम देने वाले वन्य अपराधियों के साथ भी मिलीभगत होने की आशंका है डिलेश्वरी दिवान अपने कर्तव्यों को दरकिनार कर वन्य प्राणियों के हुए अवैध शिकार की सत्यता और पुरी घटना से अपने विभाग एवं उच्च अधिकारियों से जानबूझकर छिपाया गया एवं लापरवाही पूर्वक अपने वन चौकीदारों के हाथों मृत जंगली सुअरों को जंगल अंदर अलग-अलग जगह ही दफन करवा दिया यह बहुत बड़ी लापरवाही है डिप्टी रेंजर छबीराम साहू भी लापरवाह है ना कभी गस्त करते हैं ना कभी अपने अधीनस्थ को दिशा निर्देशित करते हैं वे तो बस मस्त मौला है अर्थात खाओ पीओ एस करो वाला कार्यप्रणाली है जिस कारण अधिनस्थ फारेस्ट गार्ड भी बेलगाम हो कर वन्य प्राणियों के इतने मौत के बाद भी उच्च अधिकारी को सूचना नहीं देते और स्वयं उन्हें गुपचुप तरीके से दफनवा देते हैं ।


अब तक शिकायत की जांच में 10 में से 8 जंगली सुअरों के मृत शरीर को रिकवर कर पोस्टमार्टम पश्चात फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा गया है फॉरेस्ट गार्ड डिलेश्वरी दीवान ने सभी मृत जंगली सुअरों को दफन करवाने की बात स्वीकार किया जिसकी पुष्टि एसडीओ डिंपी बैस ने खबर लिखे जाने तक पुष्टि की है व जांच जारी है एवं मृत्यु के मुख्य कारण का पता नहीं चला है आरोपियों की पतासाजी कर उन्हें गिरफ्तार करने में वन अमले की हाथ पैर फूलने लगा हैं। वनमंडल के डीएफओ मयंक पाण्डे का कहना है कि कोई भी कार्यवाही रूल रेगुलेशन के आधार पर किया जाता है जल्दबाजी में कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती है यह सही है कि रूल रेगुलेशन से ही कार्यवाही होनी चाहिए लेकिन मैं डीएफओ मयंक पाण्डेय से कहना चाहता हूं अगर आप इतने ही रूल रेगुलेशन वाले हैं तो इतने सेंसेटीव मामले में तीन दिन बीत जाने के बाद भी आपका रूल रेगुलेशन कहा है इतनी संख्या में जंगली सुअरों के शिकार हुई हो और इस सत्यता से आपको एसडीओ रेंजर सब को अंधेरे में डालकर उनमें संलिप्त दोषी फॉरेस्ट गार्ड डिलेश्वरी दीवान और डिप्टीरेंजर छबीराम साहू द्वारा सत्यता को छुपाई गई है फिर भी अब तक उन कोई ठोस कार्यवाही क्यो नही किए जा रहे हैं।

घटना स्थल का निरीक्षण करते हुए वनवृत्त रायपुर सीसीएफ “मनी वासगन”।
क्या अरण्य भवन रायपुर से इस प्रकार के अतिसंवेदनशील मामलों में त्वरित कार्यवाही हेतु आवश्यक दिशानिर्देश देने वाले राज्य के ईमानदार आइएफएस अफसरों के आदेश और निर्देश को महासमुंद वनमंडल में दरकिनार व ठंडा बस्ते में डालकर फाइलों में लीपापोती कर वनविभाग को संचालित की जा रही है। अगर ऐसा नहीं है तो फॉरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर पर तत्काल कार्यवाही क्यों नही की जा रही है।

अब देखना होगा बीते दिनों पूरे घटनाक्रम का निरीक्षण और जायजा लेकर मुख्य वनसंरक्षक वन वृत्त रायपुर मनीवासगन द्वारा प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) के कड़े निर्देश का सही सहीपालन करवाकर दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्यवाही किया जाता है या मामला सिर्फ फाइलों में ही समेट लिया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 मृत जंगली सुअरों का शिकार किया गया है जिसमें से वन विभाग ने जांच में 8 सुअरों की मृत बाड़ी की रिकवर होने की पुष्टि की है दो की खोजबीन जारी होने की बात कही जा रही है सीसीएफ रायपुर के निर्देश पर पूरे आसपास पूरे वनक्षेत्र का सघन जांच और निरीक्षण किए जाने के उच्च स्तरीय निर्देश दिए हैं।






