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एक लाख से अधिक परिवारों को मिली खुशियों की चाबी और पक्का आशियाना।

महासमुंद, 24 सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा में गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसी संकल्प के अनुरूप प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से महासमुंद जिले के लाखों ग्रामीण परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2016 से 2026 तक जिले में 1,32,776 आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध 1,32,562 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से एक लाख 17 हजार 866 आवास पूर्ण हो चुके हैं। आवास पूर्णता के क्षेत्र में महासमुंद जिला प्रदेश में अग्रणी है।
महासमुंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम तुरेंगा की आवास हितग्राही श्रीमती देवकी कमार ऐसे हितग्राही है, जिनका प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से सुरक्षित और पक्का घर मिलने का सपना पूरा हुआ। अब उन्हें कच्चे मकान में बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की परेशानियों से राहत मिल रही है। इसी तरह ग्राम खैरा की हितग्राही श्रीमती हेमीन सतनामी ने कहा कि पक्के घर के साथ परिवार को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन की नई उम्मीद मिली है। उन्होंने कहा कि नए घर के रूप में मिली यह सौगात उनके परिवार के लिए भविष्य का आधार है। हितग्राही परिवारों ने पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार किया है।महासमुंद जिला आवास पूर्णता में प्रदेश में अग्रणी
ऐसे ही जिले के बागबाहरा में 21,190 आवास, बसना में 21,428, महासमुंद में 20,755, पिथौरा में 28,242 तथा सरायपाली में 26,251 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। जहां हितग्राही अपने सुरक्षित और सपनों के घर में निवास कर रहे हैं। जिले में स्वीकृत आवासों में करीब 89 प्रतिशत आवास पूर्ण हो चुके हैं। जिला पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायतों और मैदानी अमले द्वारा आवास निर्माण की लगातार समीक्षा तथा हितग्राहियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिए जाने से योजना की प्रगति को गति मिली है।पक्का आवास ग्रामीण परिवारों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है। योजना से परिवारों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से सुरक्षा मिली है तथा स्वच्छता, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ाव को भी बढ़ावा मिला है। वर्षों से कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए उनका अपना पक्का घर सामाजिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत बन रहा है।

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